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पर्दे के पीछे का एक चेहरा, जिनके प्रयासों से देश में लीगल सर्विस ने रचा इतिहास –  Justice Ashok Kumar Jain

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जयपुर, 23 अक्टूबर

राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश  Justice Ashok Kumar Jain का आज जन्मदिन है। इस अवसर पर उन्हें देशभर की न्यायपालिका से शुभकामनाएं मिल रही हैं।

 Justice Ashok Kumar Jain राजस्थान के ऐसे एकमात्र न्यायाधीश हैं जिनकी पहचान केवल अदालत तक सीमित नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हाईकोर्ट से लेकर देश के प्रथम गांव तक बनी हुई है।

हालांकि न्यायिक अधिकारी से हाईकोर्ट जज बनना एक सामान्य पदोन्नति प्रक्रिया होती है, परंतु जस्टिस जैन के मामले में यह यात्रा एक छिपे हुए इतिहास से जुड़ी है।

विधिक सेवा में ऐतिहासिक योगदान

जस्टिस अशोक कुमार जैन ने अपने न्यायिक जीवन का अधिकांश समय राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) में सेवा करते हुए बिताया।
उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप उन्हें NALSA के सदस्य सचिव के रूप में चुना गया — यह किसी भी राज्य के न्यायिक अधिकारी के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दौरान तत्कालीन कार्यकारी चेयरमैन जस्टिस मोहम्मद रफीक के साथ मिलकर उन्होंने प्रदेशभर में 1 लाख पौधारोपण कर एक नया इतिहास रचा।
बाद में इन पौधों की देखभाल और संरक्षण के लिए बनाए गए सिस्टम ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

रेल दुर्घटनाओं में घायल लोगों को जयपुर फुट की मदद से राहत पहुँचाने का अभियान हो, या फिर बाल विवाह की रोकथाम के लिए राज्यव्यापी पहल — उनके द्वारा शुरू की गई कई योजनाएं बाद में राष्ट्रीय स्तर पर लागू की गईं। 

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण में स्वर्णिम कार्यकाल

NALSA के सदस्य सचिव रहते हुए उनके कार्यकाल में देशभर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालतों ने रिकॉर्ड तोड़े।
उनके नेतृत्व में लाखों लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाया गया और विधिक जागरूकता अभियानों की नई मिसालें कायम हुईं।

उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के तीन सीनियर जजों के साथ काम किया, जो आगे चलकर देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बने।
उनकी दक्षता, ईमानदारी और कार्यशैली के चलते हर कार्यकारी चेयरमैन ने उनके कार्यकाल को निरंतर बनाए रखा।

देश के कोने-कोने तक लीगल सर्विस की पहुंच

NALSA सदस्य सचिव के रूप में उन्होंने देश के अंतिम छोर — साबा गांव (पूर्वोत्तर भारत) में पहला लीगल सर्विस कैंप आयोजित कराया।
उन्होंने लद्दाख की बर्फीली वादियों में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज के कार्यक्रम से लेकर जैसलमेर, कन्याकुमारी और कच्छ तक विधिक सेवा कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया।

उनकी पहल ने यह सुनिश्चित किया कि न्याय व्यवस्था केवल अदालतों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

युवा अधिवक्ताओं और Law Student के प्रेरणास्त्रोत

राजस्थान हाईकोर्ट में अल्प समय में ही वे युवा अधिवक्ताओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हो गए हैं।
उनकी अदालत में बहस के दौरान युवाओं को प्रोत्साहित करने की शैली उन्हें सभी के बीच प्रिय बनाती है।

उनके विचार और कार्य न्यायपालिका तथा आम जनता के बीच की खाई को पाटने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
देशभर के लॉ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों में उनके संबोधन की भारी मांग रहती है.

हाल ही में नवरात्रा और दीवाली के अवसर पर जेल में बंद कैदियों को दी गई राहत के लिए भी वे चर्चा में रहे.

जस्टिस अशोक कुमार जैन के जन्मदिन पर आज उन्हें देश-प्रदेश के विधि जगत और न्यायपालिका से लगातार बधाइयाँ मिल रही हैं।

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