श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी के सम्मान में मंगलवार शाम श्रीनगर के होटल ताज में विशेष रात्रि भोज का आयोजन किया गया।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से आयोजित इस रात्रि भोज में न्यायपालिका और विधि जगत से जुड़े कई प्रमुख लोग शामिल हुए।

जस्टिस पी.एस. भाटी के सम्मान में आयोजित इस समारोह में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीशों के साथ ही बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने शिरकत की।

राजस्थान हाईकोर्ट से जुड़े कई न्यायाधीश और वरिष्ठ अधिवक्ता भी विशेष रूप से श्रीनगर पहुंचे।

रात्रि भोज में राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस इंदरजीत सिंह और जस्टिस विनीत माथुर खास तौर पर मौजूद रहे।

दोनों न्यायाधीश मंगलवार देर शाम श्रीनगर पहुंचे हैं और बुधवार को होने वाले जस्टिस पी.एस. भाटी के मुख्य न्यायाधीश पद के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल होंगे।

इसके अलावा राजस्थान हाईकोर्ट के कई अन्य सिटिंग जज भी बुधवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करेंगे।

राजस्थान से जुड़े ये न्यायाधीश बुधवार अल-सुबह श्रीनगर पहुंचेंगे और इसके बाद शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेंगे।

रात्रि भोज में राजस्थान हाईकोर्ट के कई वरिष्ठ अधिवक्ता भी शामिल हुए।

जस्टिस पी.एस. भाटी के राजस्थान हाईकोर्ट में लंबे न्यायिक कार्यकाल और उनके साथ जुड़े अधिवक्ताओं एवं न्यायिक अधिकारियों की बड़ी संख्या के चलते समारोह में राजस्थान की विशेष मौजूदगी देखने को मिली।

इस विशेष आयोजन में उदयपुर के लक्षित राज सिंह मेवाड़ भी अपने परिवार के साथ शामिल हुए।

राजस्थान से जुड़े न्यायिक और विधि जगत के लोगों के अलावा जस्टिस पी.एस. भाटी के निजी स्टाफ के सदस्य भी रात्रि भोज में मौजूद रहे।

जानकारी के अनुसार, इस आयोजन में राजस्थान से जुड़े 100 से अधिक अधिवक्ताओं और जस्टिस पी.एस. भाटी के निजी स्टाफ के सदस्यों ने हिस्सा लिया।

राजस्थान से बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों का श्रीनगर पहुंचना जस्टिस भाटी के प्रति उनके आत्मीय संबंध और सम्मान को दर्शाता है।

जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी बुधवार को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।

राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस के एस अहलुवालिया और जस्टिस निर्मलजीत कौर भी श्रीनगर पहुंचे है।

उनके शपथ ग्रहण समारोह में न्यायपालिका, बार और प्रशासन से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के शामिल होने की संभावना है।