जोधपुर। Rajasthan High Court में सोमवार को न्यायिक इतिहास का एक ऐसा अध्याय लिखा जाने जा रहा है, जो संभवतया पूरे देश में पहली बार देखने को मिलेगा।
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ में पति-पत्नी न्यायाधीश की जोड़ी एक साथ खंडपीठ में बैठकर मामलों की सुनवाई करेगी।
यह ऐतिहासिक अवसर तब बनेगा जब वरिष्ठ न्यायाधीश Justice Dr. Pushpendra Singh Bhati और न्यायाधीश Justice Dr. Nupur Bhati एक साथ डिवीजन बेंच में बैठकर न्यायिक कार्य करेंगे।
न्यायपालिका के इतिहास में यह क्षण न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए विशेष महत्व रखता है।
नई रोस्टर व्यवस्था में गठित हुई ऐतिहासिक बेंच
राजस्थान हाईकोर्ट के नए रोस्टर के अनुसार जोधपुर मुख्यपीठ में गठित नई खंडपीठों में मुख्य न्यायाधीश की बेंच के बाद दूसरी बेंच के रूप में यह ऐतिहासिक जोड़ी सुनवाई करेगी।
सोमवार, 11 मई को इस खंडपीठ के समक्ष कुल 45 मामलों को सूचीबद्ध किया गया है।
कानूनी जगत में इस खबर को लेकर विशेष उत्साह और चर्चा का माहौल है।
अधिवक्ताओं और न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारतीय न्यायपालिका में एक नई और सकारात्मक मिसाल प्रस्तुत करेगा।

दोनों न्यायाधीशों का गौरवपूर्ण सफर
जस्टिस डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीशों में दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने अपने न्यायिक कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण मामलों में उल्लेखनीय फैसले दिए हैं और संवैधानिक व प्रशासनिक कानून के मामलों में उनकी विशेष पहचान रही है।
वहीं जस्टिस डॉ. नुपूर भाटी वरिष्ठता क्रम में 19वें स्थान पर हैं। उन्होंने भी अधिवक्ता के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहकर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और बाद में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुईं।
विशेष बात यह है कि दोनों ही न्यायाधीश अधिवक्ता कोटे से हाईकोर्ट में नियुक्त हुए हैं।
दोनों की शिक्षा जोधपुर के जेएनवीयू से हुई और दोनों ही पीएचडी होल्डर हैं।
अब एक ही खंडपीठ में दोनों का साथ बैठना न्यायिक इतिहास की एक दुर्लभ और ऐतिहासिक घटना बन गया है।
न्यायपालिका में नई मिसाल
भारतीय न्यायपालिका में अब तक पति-पत्नी के रूप में कई न्यायाधीश अलग-अलग अदालतों या अलग-अलग बेंचों में कार्यरत रहे हैं, लेकिन किसी हाईकोर्ट की खंडपीठ में पति-पत्नी का एक साथ बैठकर मामलों की सुनवाई करना अत्यंत दुर्लभ और संभवतया पहली घटना है।
यह केवल एक औपचारिक घटना नहीं बल्कि न्यायपालिका में पारदर्शिता, पेशेवर नैतिकता और संस्थागत विश्वास का भी प्रतीक माना जा रहा है।
दोनों न्यायाधीश अपने-अपने स्वतंत्र न्यायिक दृष्टिकोण और अनुभव के लिए जाने जाते हैं, जिससे इस खंडपीठ के कार्य को लेकर कानूनी समुदाय में विशेष रुचि बनी हुई है।
अधिवक्ताओं में उत्साह
राजस्थान हाईकोर्ट परिसर में इस ऐतिहासिक बेंच को लेकर अधिवक्ताओं के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इसे न्यायिक इतिहास का “गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक क्षण” बताया है।
उनका कहना है कि यह घटना न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और समान प्रतिनिधित्व का भी प्रतीक है।
सोमवार को जब यह खंडपीठ अदालत कक्ष में बैठेगी, तब न केवल सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई होगी बल्कि भारतीय न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय भी दर्ज होगा।
जानिए जस्टिस डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी को
राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश Dr. Justice Pushpendra Singh Bhati न्यायपालिका में अपनी विद्वता, न्यायिक दृष्टिकोण और बहुआयामी व्यक्तित्व के लिए विशेष पहचान रखते हैं।
21 सितंबर 1970 को जन्मे डॉ. भाटी ने बीए, एलएलबी, मर्केंटाइल लॉ में एलएलएम तथा “Promotion & Seniority in Public Employment” विषय पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
वर्ष 1992 में अधिवक्ता के रूप में नामांकन के बाद उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर में सेवा, जनहित याचिका, चुनाव, राजस्व, खनन, शिक्षा, पंचायती राज और आपराधिक मामलों में व्यापक प्रैक्टिस की।
वे राजस्थान हाईकोर्ट में अतिरिक्त महाधिवक्ता भी रहे तथा भारतीय रेल के स्थायी अधिवक्ता के रूप में 16 वर्षों तक सेवाएं दीं।
केंद्रीय विद्यालय संगठन, ओएनजीसी, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और कई सरकारी संस्थाओं का भी उन्होंने प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2016 में उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
डॉ. भाटी शिक्षा और मध्यस्थता के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं।
वे जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय और नेशनल Law University, जोधपुर में विजिटिंग फैकल्टी रहे। उत्कृष्ट घुड़सवार, तैराक, निशानेबाज और पैरासेलर के रूप में भी उनका व्यक्तित्व युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
जस्टिस डॉ. नुपूर भाटी
राजस्थान हाईकोर्ट की न्यायाधीश Dr. Justice Nupur Bhati अपनी न्यायिक क्षमता, सामाजिक संवेदनशीलता और बहुआयामी व्यक्तित्व के लिए विशेष पहचान रखती हैं।
12 फरवरी 1971 को जन्मी डॉ. भाटी ने बीएससी, एलएलबी, एलएलएम तथा पीएचडी की उपाधियां प्राप्त कीं।
वर्ष 2003 में अधिवक्ता के रूप में नामांकन के बाद उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ में संवैधानिक रिट, जनहित याचिका, खनन, शिक्षा, सेवा, राजस्व, पंचायत और चुनाव संबंधी मामलों में व्यापक प्रैक्टिस की। वर्ष 2016 से 2018 के बीच उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में भी वकालत की।
16 जनवरी 2023 को उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट में जज के रूप में नियुक्त किया गया।
वे राजस्थान हाउसिंग बोर्ड, ग्रामीण बैंक, उर्मूल डेयरी बीकानेर तथा मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की पैनल अधिवक्ता रहीं।
राजस्थान हाईकोर्ट ने उन्हें कई जनहित याचिकाओं में एमिकस क्यूरी और कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया। नारी निकेतन एवं किशोर गृहों से जुड़े मामलों में भी उन्होंने सात जिलों के लिए अहम जिम्मेदारी निभाई।
महिला सुरक्षा, बाल अधिकार और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।
उन्हें ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की ब्रांड एंबेसडर भी बनाया गया। संगीत, चित्रकला, बैडमिंटन और मेडिटेशन में रुचि रखने वाली डॉ. भाटी युवाओं और महिला विधि पेशेवरों के लिए प्रेरणास्रोत मानी जाती हैं।