राजस्थान हाईकोर्ट से श्रीनगर तक ऐतिहासिक सफर, वकालत, बार नेतृत्व, शिक्षा और न्यायिक अनुभव से सजी है जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी की शानदार यात्रा
जयपुर। राजस्थान के न्यायिक जगत के लिए गर्व और गौरव का क्षण आने वाला है। राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी बुधवार को श्रीनगर में आयोजित होने वाले समारोह में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।
शपथ ग्रहण के साथ ही जस्टिस पी. एस. भाटी देश के सबसे युवा सेवारत मुख्य न्यायाधीशों में अग्रणी और सबसे युवा मुख्य न्यायाधीश के रूप में एक नई न्यायिक जिम्मेदारी संभालेंगे।

शनिवार देर शाम केंद्र सरकार की ओर से जारी नियुक्ति अधिसूचना में राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार की मंजूरी के साथ उनकी नियुक्ति पर औपचारिक मुहर लग गई।
यह नियुक्ति न केवल जस्टिस भाटी के लंबे और प्रभावशाली न्यायिक करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है, बल्कि राजस्थान की न्यायपालिका के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

राजस्थान से जम्मू-कश्मीर तक, अब संभालेंगे हाईकोर्ट की कमान
जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी राजस्थान हाईकोर्ट के उन न्यायाधीशों में शामिल रहे हैं, जिनके पास वकालत, संवैधानिक एवं न्यायिक मामलों, प्रशासन, बार एसोसिएशन, विधि शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों का व्यापक अनुभव है।
अब जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण केंद्रशासित क्षेत्रों के हाईकोर्ट की जिम्मेदारी संभालना उनके न्यायिक जीवन का एक नया और ऐतिहासिक अध्याय होगा।

1992 में शुरू की वकालत, 2016 में बने हाईकोर्ट के न्यायाधीश
जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी का जन्म 21 सितंबर 1970 को हुआ। उन्होंने बीए, एलएलबी और मर्केंटाइल लॉ में एलएलएम की शिक्षा प्राप्त की। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों में पीएचडी भी शामिल है।
उन्होंने “Promotion & Seniority in Public Employment, its Changing Dimensions and Role of Supreme Court” विषय पर शोध किया।
वर्ष 1992 में वकालत शुरू करने वाले जस्टिस भाटी ने राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ में मुख्य रूप से रिट क्षेत्राधिकार में प्रैक्टिस की।
लंबे विधिक अनुभव के बाद उन्हें 16 नवंबर 2016 को राजस्थान हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्रों में सर्विस लॉ, रिट क्षेत्राधिकार, राजस्व, चुनाव, खनन, शिक्षा, पंचायती राज, आपराधिक मामले और जनहित याचिकाएं शामिल रही हैं।

एडिशनल एडवोकेट जनरल से मुख्य न्यायाधीश तक का सफर
जस्टिस भाटी ने न्यायाधीश बनने से पहले राजस्थान सरकार के लिए एडिशनल एडवोकेट जनरल के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
उन्होंने 13 अक्टूबर 2008 से 29 दिसंबर 2008 तक और बाद में 6 जनवरी 2014 से हाईकोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त होने तक यह दायित्व संभाला।
उन्होंने केंद्रीय विद्यालय संगठन, ओएनजीसी, राजस्थान सरकार के श्रम विभाग और आयुर्वेद विभाग सहित कई संस्थाओं के लिए विधिक सेवाएं दीं।
इसके अलावा उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर सहित विभिन्न संस्थानों का प्रतिनिधित्व किया।
जस्टिस भाटी करीब 16 वर्षों तक भारतीय रेलवे के स्टैंडिंग काउंसल भी रहे।

बार की राजनीति और प्रशासनिक अनुभव का मजबूत आधार
जस्टिस भाटी का बार से बेहद गहरा और लंबा जुड़ाव रहा है। वे 2009 से 2015 तक बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के सदस्य रहे।
उन्होंने 2011 से 2013 तक राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई, जबकि वर्ष 2001 में राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के महासचिव भी रहे।
वे राजस्थान हाईकोर्ट में प्रशिक्षित मध्यस्थ (Trained Mediator) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
बार, प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था की उनकी व्यापक समझ को उनकी नई जिम्मेदारी के लिए महत्वपूर्ण अनुभव माना जा रहा है।

19 साल तक लॉ फैकल्टी में बांटा कानून का ज्ञान
न्यायिक सेवा और वकालत के साथ-साथ जस्टिस भाटी का विधि शिक्षा से भी गहरा रिश्ता रहा है।
वे अपने अल्मा मेटर जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर की फैकल्टी ऑफ लॉ में वर्ष 1997 से 2016 तक करीब 19 वर्षों तक विजिटिंग फैकल्टी रहे।
उन्होंने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर में भी विजिटिंग फैकल्टी के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
जस्टिस भाटी इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट के राजस्थान चैप्टर की एग्जीक्यूटिव कमेटी से भी जुड़े रहे हैं और वर्ष 1992 से सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य हैं।

घुड़सवारी, शूटिंग और ग्लाइडिंग का भी जुनून
जस्टिस पी. एस. भाटी की शख्सियत केवल कानून और न्यायालय तक सीमित नहीं रही है। उनकी रुचि विभिन्न साहसिक गतिविधियों में भी रही है।
वे घुड़सवारी, तैराकी और शूटिंग के शौकीन रहे हैं। इसके अलावा वे सोलो ग्लाइडर पायलट और पैरासेलर भी रहे हैं।
एनसीसी से जुड़े रहते हुए उन्होंने कई साहसिक गतिविधियों में हिस्सा लिया और उनके पास A, B और C सर्टिफिकेट भी हैं।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ नेतृत्व का सफर
जस्टिस भाटी छात्र जीवन में भी सक्रिय रहे। वर्ष 1990-91 में वे जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी के स्टूडेंट्स यूनियन के उपाध्यक्ष रहे।
छात्र राजनीति से लेकर बार नेतृत्व, सरकारी विधिक दायित्व, वकालत, विधि शिक्षा और फिर हाईकोर्ट की न्यायिक जिम्मेदारियों तक-उनका सफर लगातार नए मुकाम हासिल करता रहा है।

बुधवार को श्रीनगर में रचा जाएगा नया न्यायिक अध्याय
राजस्थान से निकलकर देश की न्यायपालिका में अपनी अलग पहचान बनाने वाले जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी अब जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं।
बुधवार को श्रीनगर में होने वाला शपथ ग्रहण समारोह उनके न्यायिक करियर का ऐतिहासिक क्षण होगा। वकालत से शुरू हुआ उनका सफर अब एक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद तक पहुंच चुका है।
राजस्थान के न्यायिक और विधिक जगत की निगाहें अब श्रीनगर पर टिकी हैं, जहां जस्टिस पी. एस. भाटी मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेकर न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखेंगे।

पूरे हिंदुस्तान के लिए गर्व और गौरव का क्षण
राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिलीपसिंह उदावत ने जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी के जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे हिंदुस्तान के लिए गर्व और गौरव का क्षण है।
उदावत ने कहा, “राजस्थान के लिए यह बेहद गर्व की बात है कि हमारे बीच से एक ऐसे सम्मानित और गरिमामय न्यायाधीश देश के महत्वपूर्ण हाईकोर्ट की कमान संभालने जा रहे हैं, जिन्हें आज तक शायद ही किसी ने कभी गुस्से में देखा हो। जस्टिस पी. एस. भाटी का शांत, सौम्य और विनम्र व्यक्तित्व उन्हें एक अलग पहचान देता है।”

एसोसिएशन के महासचिव अरूण झांझड़िया कहते हैं कि “उन्होंने अपनी भाषा, व्यवहार और शब्दों के माध्यम से महिला अधिवक्ताओं को जो सम्मान दिया है, वह उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है। न्यायिक और अधिवक्ता समुदाय में उनके इस योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।”
उन्होंने कहा कि जस्टिस भाटी ने अपने पूरे न्यायिक जीवन में युवा अधिवक्ताओं को हमेशा प्राथमिकता दी, उन्हें प्रोत्साहित किया और आगे बढ़ने के अवसर प्रदान किए। वहीं महिला अधिवक्ताओं के प्रति उनका सम्मान और संवेदनशीलता भी हमेशा अनुकरणीय रही है।

राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी कहते हैं कि ने कहा कि जस्टिस भाटी एक बेहद योग्य, अनुभवी, विद्वान और सम्माननीय व्यक्तित्व हैं। उनका जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार संभालना भारतीय न्यायपालिका के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है।

वही एडवोकेट एसोसिएशन के महासचिव विजय चौधरी कहते हैं “पूरा राजस्थान गर्व महसूस कर रहा है और हमें पूरा विश्वास है कि जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी अपने अनुभव, न्यायिक दृष्टि, विनम्रता और नेतृत्व क्षमता के साथ जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट को नई दिशा देंगे। यह वास्तव में पूरे हिंदुस्तान के लिए गौरव का पल है।”