संदेश को लेकर अधिवक्ता समुदाय में चर्चाएं तेज, क्या सेवानिवृत्ति के बाद आरोपों पर देंगे सार्वजनिक जवाब?
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में करीब 11 माह तक जिम्मेदारी संभालने वाले जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा आज सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
लेकिन रिटायरमेंट के दिन भी जस्टिस एसपी शर्मा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
इस बार चर्चा किसी न्यायिक आदेश या प्रशासनिक फैसले को लेकर नहीं, बल्कि उनके द्वारा एक वाट्सऐप ग्रुप में साझा किए गए वीडियो को लेकर है।
वीडियो पर लिखा था-“खेल ऊपर से खेला गया।”
रिटायरमेंट के दिन सुबह वीडियो साझा किए जाने के बाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता समुदाय और न्यायिक जगत में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या जस्टिस एसपी शर्मा सेवानिवृत्ति के बाद अपने कार्यकाल के दौरान लगाए गए आरोपों और विवादों को लेकर सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखेंगे?
वीडियो पर लिखी लाइन-“खेल ऊपर से खेला गया”-ने इस चर्चा को और बढ़ा दिया।
11 माह तक रहे कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने राजस्थान हाईकोर्ट में करीब 11 माह तक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
जस्टिस एस पी शर्मा के पिछले जन्मदिन पर 26 सितंबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था. उसके बाद से ही लगातार करीब 11 माह तक वे इस पद पर रहे.
वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के अग्रवाल के कार्यग्रहण तक वे इस पद पर बने रहे थे. इस दौरान हाईकोर्ट के प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए।
उनके कार्यकाल के अंतिम चरण में हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक फैसलों और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे चर्चा में रहे।
जस्टिस शर्मा वर्तमान में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे।
आज उनके न्यायिक कार्यकाल का औपचारिक रूप से समापन हो रहा है।
सबसे ज्यादा सीजेआई के दौरे
जस्टिस एस पी शर्मा के कार्यकाल का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी रहा कि उनके कार्यकाल में देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के सबसे ज्यादा दौरे हुए.
जस्टिस एस पी शर्मा की मुख्य न्यायाधीश से निकटता की भी खूब तारीफे हुई जब जैसलमेर से लेकर जयपुर और जोधपुर तक के कार्यक्रमों में सीजेआई की मौजूदगी रही.
उपलब्धियों के लिए याद किया जाएगा कार्यकाल
हालांकि जस्टिस एसपी शर्मा का कार्यकाल कई विवादों और प्रशासनिक घटनाक्रमों को लेकर चर्चा में रहा, लेकिन उनके कार्यकाल की कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां भी रहीं, जिन्हें न्यायिक और अधिवक्ता जगत में सराहना मिली।
विशेष रूप से मध्यस्थता के माध्यम से बड़ी संख्या में लंबित मुकदमों के निस्तारण, राष्ट्रीय लोक अदालतों के जरिए मामलों के निपटारे और कई महत्वपूर्ण अनुशासनात्मक एवं प्रशासनिक फैसलों को लेकर उनके कार्यकाल की चर्चा हुई।
जस्टिस एसपी शर्मा के कार्यकाल में मध्यस्थता के माध्यम से हजारों मामलों के निस्तारण पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही राष्ट्रीय लोक अदालतों के माध्यम से बड़ी संख्या में लंबित मामलों का निस्तारण किया गया। न्यायिक व्यवस्था में लंबित मामलों का बोझ कम करने और पक्षकारों को त्वरित समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में इन प्रयासों को महत्वपूर्ण माना गया।

रोस्टर और जजों के तबादले
जस्टिस एस पी शर्मा के कार्यकाल के दौरान रोस्टर प्रणाली से लेकर राजस्थान हाईकोर्ट के जजों के तबादलों ने भी काफी सुखिर्या बटोरी.
जस्टिस एस पी शर्मा के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहते रोस्टर में कई बार बड़े और प्रत्याशित बदलाव किए गए.
राजस्थान हाईकोर्ट में जोधपुर के जजों को जयपुर और जयपुर के जजों को जोधपुर हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए भेजा गया.
इस कदम का शुरूआत में स्वागत किया गया लेकिन बाद इसी पहल का अधिवक्ताओं ने विरोध शुरू कर दिया.
दूसरी तरफ जजों के तबादलों से लेकर रोस्टर पर सवाल भी खड़े हुए.
अधिवक्ताओं के बीच पहुंचे थे जस्टिस शर्मा
सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले शुक्रवार को भी जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा राजस्थान हाईकोर्ट परिसर पहुंचे थे।
हाईकोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं से मुलाकात की और कैंटीन में उनके साथ चाय पर चर्चा की।
वे करीब दोपहर 12 बजे गलियारे से निकलकर गांधीजी की प्रतिमा के पास पहुंचे और इसके बाद कैंटीन में बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों सहित अन्य अधिवक्ताओं के साथ बातचीत की।
इस दौरान अधिवक्ताओं की ओर से उनका स्वागत भी किया गया।
जस्टिस शर्मा की सेवानिवृत्ति से ठीक पहले हुई यह मुलाकात भी हाईकोर्ट परिसर में चर्चा का विषय रही।

हाईकोर्ट में नहीं हुआ आधिकारिक रेफरेंस?
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की सेवानिवृत्ति को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में होने वाले पारंपरिक आधिकारिक रेफरेंस को लेकर भी चर्चा है।
सूत्रों के अनुसार, जस्टिस शर्मा ने मुख्य न्यायाधीश कक्ष में आयोजित होने वाले विदाई रेफरेंस में शामिल होने से इनकार किया।
आमतौर पर सेवानिवृत्त होने वाले न्यायाधीश के अंतिम कार्यदिवस पर मुख्य न्यायाधीश के साथ बैठकर सुनवाई करते हैं और दोपहर के भोजन के बाद उनके सम्मान में विदाई रेफरेंस आयोजित किया जाता है।
इसके बाद हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से भी रात्रिभोज आयोजित किए जाने की परंपरा रहती है।
हालांकि, इस बार आधिकारिक रेफरेंस आयोजित नहीं होने की चर्चा के बावजूद जस्टिस शर्मा की विदाई को लेकर हाईकोर्ट प्रशासन और न्यायाधीशों की ओर से लगातार दो दिन रात्रिभोज आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
आज महाधिवक्ता की ओर से डिनर….
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के सेवानिवृत्त होने के अवसर पर शनिवार शाम राज्य के महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद की ओर से रात्रिभोज आयोजित किया जा रहा है।
इस रात्रिभोज में महाधिवक्ता के साथ ही अतिरिक्त महाधिवक्ता, कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं और अन्य अधिवक्ताओं को आमंत्रित किया गया है।
इससे पहले भी जस्टिस शर्मा की विदाई को लेकर हाईकोर्ट प्रशासन और न्यायाधीशों की ओर से रात्रिभोज आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

11 महीने का कार्यकाल, विवादों के बीच विदाई
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा का करीब 11 महीने का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के बीच रहा।
उनके कार्यकाल के दौरान हाईकोर्ट के प्रशासनिक निर्णयों, न्यायिक कार्यप्रणाली और अधिवक्ता समुदाय से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर चर्चाएं होती रहीं।
इसी पृष्ठभूमि में उनके रिटायरमेंट के दिन सुबह वाट्सऐप ग्रुप में साझा किए गए वीडियो और उस पर लिखी “खेल ऊपर से खेला गया” लाइन ने एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचा है।
हालांकि, इस संदेश का वास्तविक संदर्भ अभी स्पष्ट नहीं है।
पत्रों से जुड़ा विवाद फिर चर्चा में
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के कार्यकाल के दौरान सबसे चर्चित घटनाक्रमों में से एक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता की ओर से लिखे गए पत्रों से जुड़ा विवाद रहा।
जस्टिस संदीप मेहता की ओर से जस्टिस शर्मा के खिलाफ पद के दुरुपयोग सहित विभिन्न आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को चार पत्र लिखे गए थे।
इन पत्रों के सार्वजनिक होने के बाद जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए उनका खंडन किया था।
यानी इस पूरे मामले में आरोप लगाने वाले पक्ष और जस्टिस शर्मा की ओर से उनके खंडन-दोनों पक्ष सामने आए थे।
अब रिटायरमेंट के दिन वाट्सऐप ग्रुप में साझा किए गए वीडियो और उस पर लिखी लाइन के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या जस्टिस शर्मा भविष्य में इन घटनाक्रमों को लेकर अपनी ओर से कोई विस्तृत बात रखेंगे।
क्या रिटायरमेंट के बाद सामने आएगा जस्टिस शर्मा का पक्ष?
जस्टिस S P शर्मा के रिटायरमेंट के दिन सामने आए वीडियो ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा किया है कि क्या सेवानिवृत्ति के बाद वे अपने कार्यकाल से जुड़े विवादों और अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत जवाब देंगे?
हालांकि, अभी यह केवल चर्चा और सवाल के स्तर पर है। अभी तक जस्टिस शर्मा की ओर से इस इस संदर्भ में कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।
अब सबकी नजर जस्टिस शर्मा के अगले कदम पर
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा का न्यायिक कार्यकाल आज समाप्त हो रहा है।
ऐसे में अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि क्या वे सेवानिवृत्ति के बाद अपने कार्यकाल से जुड़े विवादों, आरोपों और घटनाक्रमों पर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखते हैं या नहीं।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि रिटायरमेंट के दिन साझा किए गए वीडियो ने राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायिक और अधिवक्ता जगत में चर्चा को फिर तेज कर दिया है।
वीडियो पर लिखी एक छोटी सी लाइन-“खेल ऊपर से खेला गया”—ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन इन सवालों के जवाब अभी जस्टिस शर्मा की ओर से सामने आना बाकी हैं।
अब देखना यह होगा कि सेवानिवृत्ति के बाद जस्टिस एसपी शर्मा अपने कार्यकाल से जुड़े विवादों पर चुप्पी बनाए रखते हैं या फिर सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष सामने रखते हैं।