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कानून सिर्फ नियम नहीं, सभ्यता की रीढ़ है” : ‘Law Is Life’ के पहले एपिसोड में बोले पूर्व जज जस्टिस वी.एस. दवे

“Law Is Not Just Rules, It Is the Backbone of Civilization”: Justice V.S. Dave in First Episode of ‘Law Is Life’

जयपुर। “अगर कानून नहीं हो तो जीवन जीवन नहीं, बल्कि अराजकता बन जाएगा।” इसी विचार के साथ कानूनी जागरूकता को आमजन तक पहुंचाने के उद्देश्य से Laws & Legals की नई पहल “Law Is Life” कार्यक्रम का पहला एपिसोड आयोजित किया गया।

“Law Is Life” में राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और वरिष्ठ विधि विशेषज्ञ जस्टिस वी.एस. दवे ने कानून, समाज और मानव जीवन के गहरे संबंधों पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम में विधि विशेषज्ञ एम.के. सिंह ने गेस्ट एंकर की भूमिका निभाते हुए जस्टिस दवे से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे।

इस दौरान कानून की परिभाषा, संविधान में जीवन के अधिकार, समाज में न्याय व्यवस्था की भूमिका और आम लोगों तक कानून की पहुंच जैसे विषयों पर गंभीर संवाद हुआ।

जस्टिस वी.एस. दवे ने कहा कि कानून केवल नियमों की किताब नहीं है, बल्कि यह सभ्यता की नींव है।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जन्म से पहले ही कानून की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और मृत्यु के बाद भी उससे जुड़े अधिकार और दायित्व समाप्त नहीं होते।

उन्होंने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रेप पीड़िताओं के गर्भसमापन से जुड़े मामले में दिए गए निर्णय का उदाहरण देते हुए बताया कि कानून और जीवन के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को केवल कानूनी प्रावधानों को नहीं, बल्कि पीड़ित के जीवनभर के मानसिक आघात को भी ध्यान में रखना पड़ता है।

कार्यक्रम के दौरान जस्टिस दवे ने भारतीय व्यवस्था की कई जमीनी समस्याओं को भी सामने रखा।

उन्होंने कहा कि “Ignorance of Law is No Excuse” यानी कानून की जानकारी न होना कोई बहाना नहीं है, लेकिन देश के दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक आज भी कानून और सरकारी प्रक्रियाएं ठीक तरह से नहीं पहुंच पातीं।

उन्होंने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक तकनीकी त्रुटि के कारण सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें “मृत” घोषित कर दिया गया और उनकी पेंशन तक रुक गई।

उन्होंने कहा कि जब तक कानून के क्रियान्वयन में समन्वय और संवेदनशीलता नहीं होगी, तब तक आम लोगों को न्याय का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएगा।

कार्यक्रम में मौजूद विधि विद्यार्थियों ने भी न्याय व्यवस्था, संविधान और कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल पूछे। जस्टिस दवे ने छात्रों को कानून को केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम मानने की सलाह दी।

“Law Is Life” कार्यक्रम का उद्देश्य कानून को आमजन की भाषा में समझाना और न्यायपालिका तथा समाज के बीच संवाद स्थापित करना है।

इस मंच पर देश के वरिष्ठ न्यायाधीश, अधिवक्ता, विधि शिक्षाविद और कानूनी विशेषज्ञ समय-समय पर अपने अनुभव साझा करेंगे, ताकि लोगों में कानूनी जागरूकता बढ़ाई जा सके।

कार्यक्रम का सबसे खास पहलू यह रहा कि इसे पूरी तरह निशुल्क रखा गया, ताकि समाज के हर वर्ग तक कानूनी जानकारी पहुंच सके।

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