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वर्ष 2025 राष्ट्रीय लोक अदालत : रिकॉर्ड 2.07 करोड़ मुकदमों का निपटारा, ₹44 हजार करोड़ से अधिक राशि के अवार्ड पारित

National Lok Adalat 2025: 2.07 Crore Cases Settled, Awards Worth Over ₹44,000 Crore

जयपुर। राजस्थान में त्वरित, सुलभ और सस्ता न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में वर्ष 2025 एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बनकर उभरा है।

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RSLSA) के नेतृत्व में आयोजित लोक अदालतों ने न केवल न्यायिक व्यवस्था पर पड़े बोझ को कम किया, बल्कि आमजन को वर्षों पुराने विवादों से राहत दिलाकर न्याय को उनके द्वार तक पहुँचाया।

वर्ष भर में आयोजित चार राष्ट्रीय लोक अदालतों के माध्यम से प्रदेश में दो करोड़ से अधिक प्रकरणों का आपसी सहमति से निस्तारण किया गया और ₹44 हजार करोड़ से अधिक की राशि का समाधान हुआ।

चार लोक अदालतों ने रचा इतिहास

वर्ष 2025 में राजस्थान में लोक अदालतों का आयोजन 8 मार्च, 10 मई, 13 सितंबर और वर्ष की सबसे व्यापक व अंतिम लोक अदालत 21 दिसंबर 2025 को किया गया।

इन लोक अदालतों में राजस्थान हाईकोर्ट, जिला एवं सत्र न्यायालय, तहसील स्तर पर तालुका अदालतों के साथ-साथ स्थायी लोक अदालतों में मामलों का निस्तारण किया गया।

अभूतपूर्व आँकड़े, अभूतपूर्व उपलब्धि

राज्यभर में आयोजित लोक अदालतों में कुल 2,37,25,819 प्रकरण सुनवाई के लिए रखे गए, जिनमें से 2,07,69,451 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया।

इन मामलों में ₹44,11,47,81,708 की राशि का आपसी समझौता हुआ।

प्री-लिटिगेशन में बड़ी सफलता

लोक अदालतों की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उन्होंने अदालतों में जाने से पहले ही विवादों को सुलझाने में प्रभावी भूमिका निभाई।

वर्ष 2025 में कुल 1,99,31,637 प्री-लिटिगेशन के मामले लोक अदालतों में रखे गए, जिनमें से 1,77,98,522 मामलों का निस्तारण कर दिया गया।

इन मामलों में ₹10,30,45,72,704 की राशि का समाधान हुआ। इससे हजारों नागरिकों को लंबी और खर्चीली न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिली।

लंबित मुकदमों का निस्तारण

लोक अदालतों ने वर्षों से अदालतों में लंबित मुकदमों के निस्तारण में भी अहम योगदान दिया।

कुल 37,94,182 लंबित मुकदमों को लोक अदालतों में सुनवाई के लिए रखा गया, जिनमें से 29,70,929 मामलों का निस्तारण किया गया।

इन मुकदमों में ₹33,81,02,09,004 की राशि के अवार्ड आपसी समझौते के जरिए जारी किए गए।

लोक अदालत: केवल निस्तारण नहीं, विश्वास का मंच

राजस्थान की लोक अदालतें केवल आँकड़ों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने न्याय को जनसरोकारों से जोड़ा। पारिवारिक विवाद, वैवाहिक मामले, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, बैंक ऋण वसूली, चेक अनादरण, बिजली-पानी बिल विवाद, श्रम, राजस्व एवं उपभोक्ता मामलों का शांतिपूर्ण समाधान किया गया।

लोक अदालतों के फैसले अंतिम और बाध्यकारी होते हैं, जिनके विरुद्ध कोई अपील नहीं होती, जिससे पक्षकारों को स्थायी और संतोषजनक राहत मिलती है।

कार्यकारी अध्यक्ष का कुशल नेतृत्व

वर्ष 2025 में राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के पीछे राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष की अहम भूमिका रही है।

जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के नेतृत्व में वर्ष की अंतिम दो राष्ट्रीय लोक अदालतों में रिकॉर्ड मुकदमों को चिन्हित किया गया।

साथ ही हाईकोर्ट के जजों, न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों, पैरा-लीगल स्वयंसेवकों, बैंक, बीमा कंपनियों और विभिन्न सरकारी विभागों की सक्रिय भूमिका रही।

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉ. हरिओम अत्री के अनुसार, प्राधिकरण द्वारा किए गए व्यापक प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता अभियानों ने आम नागरिकों को लोक अदालतों से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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