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राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ही अपराध के लिए दर्ज दो FIR पर रोक लगाने से किया इंकार, कोर्ट ने कहा जांच जरूरी

जयपुर, 17 सितम्बर 2025

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एक ही अपराध के मामले में दायर दो एफआईआर को रद्द करने से इंकार कर दिया है।

हाईकोर्ट ने मामले में दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि बीएनएसएस की धारा 528 के तहत इस स्तर पर मामले के गुण-दोष की जांच करना संभव नहीं है।

जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि इस स्तर पर जबकि जांच पेंडिंग है, इन मामलों के विवादित तथ्यों में अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

इस मामले में एक ही अपराध के लिए दो एफआईआर दर्ज हुई हैं।
पहली एफआईआर फर्जी तरीके से पट्टे जारी करने के आरोप से संबंधित है, जबकि दूसरी एफआईआर धोखाधड़ी और सरकारी धन के गबन के आरोप में दर्ज की गई है।

पहली एफआईआर

मामला बारां शहर में स्थित करोड़ों की जमीन के फर्जी पट्टों से जुड़ा है, जिसमें लगभग 1.5 करोड़ रुपये मूल्य की 1500 वर्गफुट की खाली भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया।

इस मामले में एक निजी प्रतिवादी ने बारां के कोतवाली थाने में जून 2024 में एफआईआर संख्या 509/2024 दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता ने फर्जी तरीके से पट्टे अपने नाम करवाए हैं।

मामले में यह भी आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ताओं ने संबंधित व्यक्ति के जाली हस्ताक्षर कर पट्टों को पूर्व तिथि में जारी करवाया।

दूसरी एफआईआर

बाद में इस मामले में कोतवाली थाने में जनवरी 2025 में दूसरी एफआईआर संख्या 12/2025 दर्ज की गई।

इसमें आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ताओं ने सहआरोपियों के साथ मिलकर एक फर्जी लीज बनाकर सरकार की बेशकीमती जमीन को धोखाधड़ी से अपने नाम किया।

सरकारी भूमि होने के चलते इसे नीलामी के जरिए ही खरीदा जा सकता था।
सरकारी दर के अनुसार इस जमीन की वास्तविक दर 10,000 रुपये प्रति वर्गफुट थी, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने धोखाधड़ीपूर्वक इसे योजना से निकालकर केवल 28 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से अपने नाम करवा लिया।

दूसरी एफआईआर में आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ताओं ने सरकारी धन की धोखाधड़ी और गबन किया है।

हाईकोर्ट ने कहा तथ्य अलग

हाईकोर्ट ने एक ही अपराध में दर्ज दोनों एफआईआर को रद्द करने से इंकार करते हुए कहा कि वर्तमान मामले में दो एफआईआर दर्ज हुई हैं और दोनों में अलग-अलग तथ्य शामिल हैं।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पहली एफआईआर फर्जी तरीके से पट्टे जारी करने के आरोपों से संबंधित है, जबकि दूसरी एफआईआर में धोखाधड़ी और सरकारी धन के गबन के आरोप शामिल हैं।

वर्तमान मामले में सार्वजनिक धोखाधड़ी के तत्व निहित हैं, जिसके कारण राज्य राजस्व को हानि हुई है।

हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों एफआईआर की जांच अभी लंबित है। ऐसे में हाईकोर्ट अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए मिनी ट्रायल नहीं चला सकती।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट सहित कई अन्य फैसलों का हवाला देते हुए मामले में दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया।

आर.पी. कपूर बनाम स्टेट ऑफ पंजाब: AIR 1960 SC 866
स्टेट ऑफ हरियाणा व अन्य बनाम भजन लाल व अन्य: 1992 Supp (1) SCC 335
त्रिसंस केमिकल इंडस्ट्री बनाम राजेश अग्रवाल व अन्य: (1999) 8 SCC 686
एम. कृष्णन बनाम विजय सिंह व अन्य: (2001) 8 SCC 645
जोसेफ साल्वराज ए. बनाम स्टेट ऑफ गुजरात व अन्य: (2011) 7 SCC 59
आनंद भंडारी बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश व अन्य: (2013) 2 SCC 801
नीहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. बनाम स्टेट ऑफ महाराष्ट्र: AIR 2021 SC 191

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