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नाबालिग को घर से भगाकर ले जाकर दुष्कर्म करने के आरोपी को आजीवन उम्रकैद की सजा

Jaipur Court Denies Bail to Kunal Parashar in Organized Crime & Illegal Arms Case

जयपुर, 21 नवंबर

जयपुर की पोक्सो (POCSO) अदालत संख्या 1 ने राजधानी जयपुर से नाबालिग को उसके घर से बहला-फुसलाकर भगाकर ले जाने, उसका अपहरण करने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी को आजीवन उम्रकैद की सजा सुनाई है।

जज मीना अवस्थी ने बिहार के अररिया जिला निवासी 24 वर्षीय सादिक अहमद को माता-पिता की बिना अनुमति घर से भगाने और पोक्सो की विभिन्न धाराओं में दोषी माना है।

अदालत ने पोक्सो की धाराओं में सादिक अहमद को आजीवन उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 1 लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

घर से भगाकर ले गया था नाबालिग को

जयपुर के प्रतापनगर थाने में 20 जनवरी 2023 को नाबालिग के पिता ने मामला दर्ज कराया कि बिहार निवासी सादिक अहमद उसकी नाबालिग बेटी को घर से भगाकर ले गया है।

इस मामले में पीड़िता के पिता ने पुलिस को आरोपी के उसकी बेटी के साथ सीसीटीवी फुटेज भी दिए।

मामले में पुलिस ने जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया।

पीड़िता के बयानों के अनुसार आरोपी ने उसे घर से जबरन बस में बैठाकर ले गया और उसे गुजरात सूरत एवं बिहार कटिहार, कुर्साकांटा ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

बचाव में दलील

आरोपी की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि वह विवाहित पुरुष है और उसका 1 साल का बच्चा भी है। साथ ही लंबे समय से जेल में रहने के आधार पर नरमी का अनुरोध किया गया।

आरोपी की ओर से अदालत से कहा गया कि पीड़िता और आरोपी पहले से ही एक-दूसरे को जानते हैं और पीड़िता ने कोर्ट में दिए बयान में आरोपी का नाम गलत बताया है।

पीड़िता के नाबालिग होने को भी चुनौती देते हुए कहा गया कि उसके नाबालिग होने का कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया है।

अभियोजन का तर्क

आरोपी की दलीलों का अभियोजन पक्ष ने विरोध किया और कहा कि पत्रावली पर उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य से यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित है कि आरोपी ने पीड़िता के नाबालिग होते हुए भी उसे जबरन अपने साथ ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया है। ऐसे में उसके प्रति किसी तरह की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।

कोर्ट का आदेश

जज मीना अवस्थी ने सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद कहा कि आरोपी ने 18 वर्ष से कम आयु की नाबालिग पीड़िता को उसके माता-पिता की अनुमति एवं सहमति के बिना उनकी विधिक संरक्षकता में से बहला-फुसलाकर ले जाना साबित हुआ है।

कोर्ट ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्त के प्रति नरमी का रुख अपनाया जाना न्यायोचित नहीं है।

सजा

IPC धारा 366 – 10 वर्ष की जेल और 25,000 रुपये का जुर्माना
POCSO Act धारा 5/6 – 20 वर्ष की जेल और 50,000 रुपये का जुर्माना
SC/ST Act धारा 3(2)(v) – आजीवन कारावास और 25,000 रुपये का जुर्माना

सभी सजाएं एक साथ चलने के कारण आरोपी को आजीवन उम्रकैद की सजा भुगतनी हो

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