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PTI भर्ती परीक्षा 2022 डिग्री घोटाला: JS यूनिवर्सिटी के डिप्टी डायरेक्टर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

जयपुर, 5 अक्टूबर

जयपुर की जिला अदालत ने पीटीआई भर्ती परीक्षा 2022 फर्जी डिग्री घोटाले में उत्तर प्रदेश की JS यूनिवर्सिटी के डिप्टी डायरेक्टर सुकेश कुमार की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।

जयपुर महानगर द्वितीय एडीजे क्रम संख्या 1 अदालत के जज बी.एल. चंदेल ने अग्रिम जमानत देने से इंकार करते हुए कहा कि मामले में एक जिम्मेदार अधिकारी के तौर पर गंभीर आरोप हैं।

क्या कहा याचिका में

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष दलील दी कि याचिकाकर्ता JS यूनिवर्सिटी में कुलसचिव के पद पर कार्यरत है। यह पद केवल औपचारिक एवं प्रशासनिक प्रकृति का है, जिससे किसी वित्तीय या प्रबंधकीय अधिकार का सीधा संबंध नहीं है।

साथ ही, अधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता ने किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या फर्जी डिग्री पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और न ही विश्वविद्यालय के वित्तीय मामलों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई लाभ प्राप्त किया है।

सरकार ने किया विरोध

राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक साजिया खान ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि एसआई भर्ती मामले की जांच के दौरान अन्य भर्तियों में भी फर्जीवाड़े का मामला सामने आया।

पीटीआई भर्ती परीक्षा 2022 में जेएस यूनिवर्सिटी फतेहगढ़ द्वारा कई फर्जी बीपीएड कोर्सेज की मार्कशीट एवं डिग्रियां जारी की गईं।

लोक अभियोजक ने कहा कि एसओजी की जांच में सामने आया कि वर्ष 2016 से 2020 के बीच जेएस यूनिवर्सिटी द्वारा 21 अभ्यर्थियों को चयन के बाद जाली डिग्रियां उपलब्ध कराई गईं। इन डिग्रियों का प्रयोग अभ्यर्थियों ने राजस्थान शिक्षक भर्ती परीक्षा 2022 में किया।

जांच के दौरान आरोपी सुकेश कुमार का नाम सह-अभियुक्त के रूप में सामने आया। एसओजी की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी सुकेश कुमार, जो जेएस यूनिवर्सिटी फतेहगढ़ में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर कार्यरत था, ने फर्जी डिग्रियां तैयार करवाकर लाखों रुपये का लाभ उठाया और भर्ती बोर्ड को गुमराह किया।

याचिका खारिज

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद एडीजे कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा फर्जी डिग्रियां जारी करने की पुष्टि हुई है। मामले में जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आरोपी की गिरफ्तारी आवश्यक है ताकि साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो सके।

अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की बिक्री से न केवल शिक्षा व्यवस्था की साख पर प्रश्नचिह्न लगता है, बल्कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलता है। ऐसे में आरोपी को अग्रिम जमानत देना न्यायहित में उचित नहीं है।

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