जोधपुर: राजस्थान में वकीलों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नए नियम लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
राजस्थान बार काउंसिल ने राज्य के सभी बार एसोसिएशनों को निर्देश जारी कर बार काउंसिल ऑफ इंडिया की नई सोशल मीडिया आचार संहिता का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
नई गाइडलाइन के तहत वकील अब न्यायाधीशों, कोर्ट्स, न्यायिक कार्यवाही या अपने पेशे से जुड़ी ऐसी कोई भी सामग्री सोशल मीडिया पर साझा नहीं कर सकेंगे, जिससे कोर्ट की गरिमा प्रभावित हो, लोगों में भ्रम फैले या पेशे की मर्यादा को नुकसान पहुंचे।
राजस्थान बार काउंसिल ने सभी बार एसोसिएशनों को भेजे पत्र में कहा है कि इस आचार संहिता को केवल सूचना पट्ट पर चस्पा करना पर्याप्त नहीं होगा।

हर अधिवक्ता तक इसे व्यक्तिगत रूप से पहुंचाया जाए, बार एसोसिएशन की वेबसाइट और अधिकृत संचार समूहों में भी प्रमुखता से साझा किया जाए। साथ ही इसके पालन की रिपोर्ट जल्द से जल्द बार काउंसिल को भेजनी होगी।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस आचार संहिता को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अब विधि महाविद्यालय में प्रवेश, इंटर्नशिप और अधिवक्ता के रूप में नामांकन के समय सोशल मीडिया आचार संहिता का पालन करने संबंधी शपथ-पत्र देना भी अनिवार्य कर दिया गया है।
रील, डीपफेक और भ्रामक पोस्ट पर सख्ती
नई गाइडलाइन के मुताबिक कोई भी अधिवक्ता सोशल मीडिया पर ऐसी रील, शॉर्ट वीडियो, संपादित क्लिप, मीम या दूसरी डिजिटल सामग्री साझा नहीं करेगा, जिससे किसी जज, कोर्ट, वकील, पक्षकार, गवाह, पीड़ित, मुवक्किल या न्यायिक कार्यवाही को गलत, भ्रामक या सनसनीखेज तरीके से पेश किया जाए।
गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से बनाई गई तस्वीरें, डीपफेक वीडियो, वॉइस क्लोनिंग या किसी भी तरह की बदली हुई डिजिटल सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, अगर उससे कोर्ट, किसी जज या न्यायिक कार्यवाही के बारे में गलत तस्वीर पेश होती हो या लोगों में भ्रम फैलने की आशंका हो।

बार काउंसिल ने साफ किया है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंचाने, किसी की मानहानि करने, गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करने या वकालत के पेशे की मर्यादा के खिलाफ किसी भी उद्देश्य से नहीं किया जाना चाहिए।
साझा करने पर भी रोक
नई आचार संहिता के तहत बिना कानूनी अनुमति कोर्ट की सुनवाई की रिकॉर्डिंग, फोटो या वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर साझा नहीं किया जा सकेगा। यह नियम केवल कोर्ट रूम तक सीमित नहीं है।
वर्चुअल सुनवाई, मुवक्किल से बातचीत, चैंबर में हुई चर्चा, केस से जुड़े दस्तावेज, ड्राफ्ट, रिसर्च नोट, मुकदमे की रणनीति, समझौता वार्ता और मध्यस्थता की प्रक्रिया से जुड़ी किसी भी गोपनीय जानकारी को भी सोशल मीडिया पर साझा करने की अनुमति नहीं होगी।
बार काउंसिल का कहना है कि ऐसी जानकारी वकील और मुवक्किल के बीच भरोसे का हिस्सा होती है। इसे सार्वजनिक करना पेशेवर जिम्मेदारियों के खिलाफ है और इससे न्यायिक प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।
पेशेवर पहचान के इस्तेमाल को लेकर नियम
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने वकीलों की पेशेवर पहचान के इस्तेमाल को लेकर भी साफ नियम तय किए हैं।
नई गाइडलाइन के मुताबिक कोई भी अधिवक्ता अपनी वकालती वेशभूषा, सफेद बैंड, कोर्ट परिसर, कोर्ट के गलियारे, चैंबर, लॉ फर्म, मुवक्किल की फाइल या कोर्ट के प्रतीक चिन्ह का इस्तेमाल व्यक्तिगत प्रचार, फॉलोअर्स बढ़ाने, ग्लैमर दिखाने या अपनी ब्रांडिंग के लिए नहीं कर सकेगा।
बार काउंसिल का कहना है कि अधिवक्ता की पहचान एक पेशेवर जिम्मेदारी है। इसका इस्तेमाल सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने या निजी प्रचार के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
अभिव्यक्ति की आजादी
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई सोशल मीडिया आचार संहिता का उद्देश्य वकीलों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाना नहीं है।
अधिवक्ता सामाजिक, कानूनी या सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर अपनी राय रख सकते हैं। लेकिन ऐसी कोई भी पोस्ट, वीडियो या दूसरी सामग्री साझा नहीं की जा सकती, जिससे कोर्ट की गरिमा प्रभावित हो, किसी की निजता का उल्लंघन हो, लोगों में भ्रम फैले या न्यायिक प्रक्रिया पर असर पड़े।
यानी सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन पेशेवर जिम्मेदारियों और नैतिक मर्यादाओं का पालन करना भी जरूरी होगा।
नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई
राजस्थान बार काउंसिल ने सभी बार एसोसिएशनों को निर्देश दिया है कि वे नई सोशल मीडिया आचार संहिता को औपचारिक रूप से अपनाएं और राज्य के हर अधिवक्ता तक इसकी जानकारी पहुंचाना सुनिश्चित करें। इसके बाद सभी बार एसोसिएशनों को अनुपालन रिपोर्ट भी भेजनी होगी।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपने जारी निर्देश में स्पष्ट किया है कि अगर कोई अधिवक्ता इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ अधिवक्ता अधिनियम, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों और लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
नई गाइडलाइन लागू होने के बाद अब राजस्थान के वकीलों को सोशल मीडिया पर कोर्ट, न्यायिक कार्यवाही, मुवक्किल और अपनी पेशेवर पहचान से जुड़ी सामग्री साझा करते समय नई आचार संहिता का पालन करना होगा।