जयपुर। राजस्थान बार काउंसिल चुनाव-2026 को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है।
22 अप्रैल को हुए मतदान के बाद जयपुर स्थित प्रत्याशियों ने कथित फर्जी मतदान और धांधली के गंभीर आरोप लगाते हुए पुनर्मतदान से पहले निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
इस संबंध में गुरुवार शाम कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब, जयपुर में प्रत्याशियों की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से उच्च स्तरीय समिति को पत्र लिखने का निर्णय लिया गया।
बैठक के बाद प्रत्याशियों ने हाई पावर्ड इलेक्शन कमेटी के चेयरमैन जे.आर. मिढा और रिटर्निंग ऑफिसर डॉ. सचिन आचार्य को पत्र के जरिए एक विस्तृत प्रतिवेदन भेजा।
सीसीटीवी कैमरों में कैद
इस पत्र में चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि जयपुर के प्रमुख मतदान केंद्रों—हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर और दी बार एसोसिएशन जयपुर—में सुनियोजित तरीके से फर्जी मतदान कराया गया।
प्रत्याशियों का कहना है कि कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह पूरा खेल रचा गया।
प्रत्याशियों ने दावा किया कि फर्जी मतदान की घटनाएं सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई हैं और कई अधिवक्ताओं ने अपने मोबाइल फोन से भी वीडियो रिकॉर्डिंग की है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं। ऐसे में चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच
प्रत्याशियों ने अपने प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से मांग की है कि पुनर्मतदान से पहले पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
साथ ही, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित उम्मीदवारों और चुनाव से जुड़े कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाए।
निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रत्याशियों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं।
इनमें वरिष्ठ अधिवक्ताओं की निगरानी में मतदान कराना, नए रंग के मतपत्रों की छपाई, मतदाताओं की सख्त पहचान प्रक्रिया लागू करना और चुनाव प्रक्रिया से बार पदाधिकारियों को दूर रखना शामिल है।
इसके अलावा, पर्याप्त पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
तीन चरण में हो मतदान
प्रत्याशियों ने यह भी सुझाव दिया है कि मतदाताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए मतदान प्रक्रिया को तीन चरणों में संपन्न कराया जाए, ताकि भीड़ और अव्यवस्था को नियंत्रित किया जा सके।
उन्होंने पूरे मतदान प्रक्रिया की सीसीटीवी निगरानी सुनिश्चित करने, मतदान केंद्रों पर मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने तथा महिला और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए अलग बूथ और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
और चेतावनी भी…
बैठक में शामिल प्रत्याशियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया और निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो वे प्रस्तावित पुनर्मतदान का बहिष्कार करेंगे।
साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि वे निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए न्यायालय का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं।
अब सबकी निगाहें हाई पावर्ड कमेटी के निर्णय पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि चुनाव प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।