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राजस्थान बार काउंसिल चुनाव: आज से शुरू होगी मतगणना, 48 दिन तक चल सकती है प्रक्रिया; प्रत्याशियों में उत्साह के साथ नाराजगी

Rajasthan Bar Council Election Counting Begins Today, Process May Continue for 48 Days

राजस्थान बार काउंसिल के 23 सदस्यीय चुनाव की मतगणना सोमवार से शुरू होने जा रही है।

प्रदेशभर के अधिवक्ताओं की निगाहें इस चुनाव परिणाम पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसे वकीलों की सबसे बड़ी और प्रभावशाली संस्था का चुनाव माना जाता है।

मतगणना को लेकर जहां प्रत्याशियों और समर्थकों में उत्साह का माहौल है, वहीं चुनाव प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं और मतदान आंकड़ों के सार्वजनिक नहीं होने को लेकर नाराजगी भी लगातार सामने आ रही है।

दोपहर 2 बजे से मतगणना

मतगणना का कार्य राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्यपीठ परिसर स्थित राजस्थान बार काउंसिल मुख्यालय में दोपहर 2 बजे से प्रारंभ होगा।

चुनाव समिति के अनुसार मतगणना की प्रक्रिया लंबी होने के कारण इसे पूरा होने में करीब 45 से 48 दिन का समय लग सकता है।

गौरतलब है कि राजस्थान बार काउंसिल चुनाव के लिए प्रदेशभर में 22 अप्रैल को मतदान कराया गया था।

हालांकि जयपुर, जोधपुर और श्रीगंगानगर के कुछ मतदान केन्द्रों पर कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद चुनाव समिति को चार मतदान केन्द्रों का मतदान रद्द करना पड़ा था।

इसके बाद 4 मई को जयपुर हाईकोर्ट, जयपुर सेशन कोर्ट, जोधपुर हाईकोर्ट तथा श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर में पुनर्मतदान कराया गया।

मतगणना में उम्मीदवारों के लिए विशेष दिशा-निर्देश

राजस्थान बार काउंसिल चुनाव-2026 की मतगणना 11 मई को दोपहर 2 बजे से हाईकोर्ट परिसर झालामंड, जोधपुर स्थित बार काउंसिल कार्यालय में होगी।

इस संबंध में बार काउंसिल ऑफ राजस्थान ने सभी उम्मीदवारों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

निर्देशों के अनुसार मतगणना स्थल पर केवल उम्मीदवार या उनका अधिकृत काउंटिंग एजेंट ही प्रवेश कर सकेगा।

दोनों को एक साथ उपस्थित रहने की अनुमति नहीं होगी।

प्रवेश के लिए फोटोयुक्त “एंट्री कार्ड” अनिवार्य रहेगा, जिसे 11 मई सुबह 10 बजे तक फॉर्म जमा कराने के बाद जारी किया जाएगा।

बार काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि एंट्री कार्ड हस्तांतरणीय नहीं होगा और कोई डुप्लीकेट कार्ड जारी नहीं किया जाएगा।

उम्मीदवारों और एजेंटों को मतगणना शुरू होने से कम से कम आधा घंटा पहले पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।

पहली बार महिला आरक्षण

गौरतलब है कि राजस्थान बार काउंसिल के 23 पदों के लिए इस बार कुल 234 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे, जबकि प्रदेशभर से 84,247 अधिवक्ताओं को मतदाता के रूप में पंजीकृत किया गया था।

बड़ी संख्या में प्रत्याशियों के मैदान में होने के कारण यह चुनाव बेहद प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है।

इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता महिलाओं को दिया गया आरक्षण रहा।

बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के इतिहास में पहली बार महिला अधिवक्ताओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। इसके तहत 23 निर्वाचित सीटों में से 5 सीटें महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित रखी गई हैं, जबकि 2 महिला सदस्यों को बाद में सह-नामित (को-ऑप्टेड) किया जाएगा।

इस व्यवस्था के बाद 25 सदस्यीय परिषद में पहली बार 7 महिला सदस्य शामिल होंगी। महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की इस पहल को अधिवक्ता समुदाय में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यही कारण है कि इस बार चुनाव में 57 महिला प्रत्याशी मैदान में उतरी हैं, जिससे मुकाबला और अधिक रोचक तथा बहुचर्चित बन गया है।

मतदान आंकड़ों को लेकर उठ रहे सवाल

चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अब तक चुनाव समिति की ओर से कुल मतदान प्रतिशत और प्रत्येक मतदान केन्द्र का विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसको लेकर कई प्रत्याशियों और अधिवक्ताओं ने सवाल खड़े किए हैं।

प्रत्याशियों का कहना है कि मतगणना शुरू होने से पहले चुनाव समिति को यह स्पष्ट करना चाहिए था कि किस बूथ पर कितना मतदान हुआ और कुल कितने अधिवक्ताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

कई उम्मीदवार लगातार रिटर्निंग अधिकारी और चुनाव समिति से आधिकारिक मतदान आंकड़े जारी करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई अधिकृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

अनियमितताओं पर कार्रवाई की मांग तेज

चुनाव के दौरान हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। कई प्रत्याशियों ने आरोप लगाया है कि कुछ मतदान केन्द्रों पर चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई, जिसके कारण पुनर्मतदान कराना पड़ा।

पुनर्मतदान से पहले चुनाव समिति के सदस्यों ने जयपुर और जोधपुर में प्रत्याशियों से व्यक्तिगत मुलाकात कर उनकी शिकायतें सुनी थीं।

इस दौरान निर्वतमान चेयरमैन और प्रत्याशी भुवनेश शर्मा सहित राजेश कर्नल, पवन शर्मा, प्रहलाद शर्मा, प्रमिला शर्मा, शालिनी शेरोन, राजेन्द्र सिंह तंवर और डॉ. रामरूप मीणा समेत कई प्रत्याशियों ने जयपुर में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई थी।

इसी मामले को लेकर अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी ने अशोक नगर पुलिस थाना में लिखित शिकायत भी दर्ज करवाई थी।

प्रत्याशियों का कहना है कि जिन लोगों की वजह से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई और पुनर्मतदान कराना पड़ा, उनके खिलाफ कार्रवाई किए बिना मतगणना शुरू करना उचित नहीं है।

पुनर्मतदान से बढ़ा आर्थिक बोझ

कई प्रत्याशियों ने पुनर्मतदान के कारण हुए आर्थिक नुकसान पर भी चिंता जताई है।

उम्मीदवारों का कहना है कि चुनाव प्रचार और पुनर्मतदान की वजह से उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर लाखों रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े।

प्रत्याशियों का आरोप है कि कुछ लोगों की लापरवाही और अनियमितताओं का खामियाजा पूरे अधिवक्ता समुदाय और उम्मीदवारों को भुगतना पड़ा है।

राजस्थान बार काउंसिल में अधिवक्ता समुदाय के हितों के लिए खर्च होने वाली राशि चुनाव में खर्च करनी पड़ी.

पुर्नमतदान के लिए जो लाखो रूपए की अतिरिक्त राशि खर्च हुई उसकी स्थिती स्पष्ट होने के साथ ही दोषि लोगो से वसूली करने की मांग कि गयी थी.

प्रत्याशियों का कहना है कि पुनर्मतदान में खर्च हुए अधिवक्ताओं के पैसों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और दोषियों से इसकी वसूली की जानी चाहिए।

अब सभी की निगाहें मतगणना प्रक्रिया और आगामी परिणामों पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस चुनाव के नतीजे आने वाले वर्षों में राजस्थान की अधिवक्ता राजनीति और बार काउंसिल की कार्यप्रणाली की दिशा तय करेंगे।

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