जयपुर/जोधपुर। प्रदेश की सबसे बड़ी वकीलों की संस्था बार काउंसिल ऑफ राजस्थान (बीसीआर) के बहुप्रतीक्षित चुनाव आज सुबह 8 बजे से शुरू होंगे।
करीब तीन साल की देरी और आठ साल के लंबे अंतराल के बाद हो रहे इन चुनावों में इस बार रिकॉर्ड संख्या में प्रत्याशी मैदान में हैं।
23 पदों के लिए कुल 234 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जबकि 84,247 अधिवक्ता मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
जयपुर-जोधपुर में सबसे ज्यादा मत
राजस्थान बार काउंसिल के चुनावों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ और जयपुर में सबसे अहम पोलिंग बूथ है।
यहां पर मतदान को कड़ी सुरक्षा के साथ ही माकुल व्यवस्था की गयी हैं.
राजस्थान हाईकोर्ट मुख्यपीठ में एडवोकेट एकलव्य भंसाली चुनाव की जिम्मेदारी देख रहे हैं.
एडवोकेट एकलव्य भंसाली
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ में अधिवक्ता बसंतसिंह छाबा को चुनाव की जिम्मेदारी दी गयी हैं.
अधिवक्ता बसंतसिंह छाबा
ऑब्जर्वर रहेंगे जयपुर में
राजस्थान बार काउंसिल के चुनावों को लेकर ऑब्जर्वर जस्टिस मनोज कुमार गर्ग बुधवार को जयपुर में रहेंगे।
वे मंगलवार देर शाम जोधपुर से जयपुर पहुंचे हैं। उनकी निगरानी में चुनावी टीम प्रबंधन करेगी।
Justice Manoj Kumar Garg
मतदान का पूरा शेड्यूल और व्यवस्था
राज्यभर में मतदान सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक होगा।
चुनाव के लिए कुल 258 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
मतदान के बाद मतपेटियों को संबंधित जिला न्यायाधीशों के पास सुरक्षित रखा जाएगा और बाद में पुलिस सुरक्षा में जोधपुर भेजा जाएगा, जहां 29 अप्रैल से मतगणना शुरू होगी।
जयपुर में सबसे अधिक मतदाता
राजधानी जयपुर में कुल 22 हजार से अधिक वकील मतदाता हैं, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा हैं।
यहां हाईकोर्ट के अलावा सेशन कोर्ट, फैमिली कोर्ट, आमेर और सांगानेर कोर्ट में भी मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
जयपुर में हाईकोर्ट परिसर सबसे बड़ा मतदान केंद्र होगा। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर में स्थित पोलिंग बूथ पर 14,781 अधिवक्ता वोटर पंजीकृत हैं।
यहां 200 वोटिंग कैबिन बनाए गए हैं, जिससे एक समय में 200 वकील मतदान कर सकेंगे। प्रवेश केवल गेट नंबर 3 और 4 से ही दिया जाएगा।
पहली बार महिला आरक्षण, ऐतिहासिक भागीदारी
इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत महिलाओं को दिया गया आरक्षण है।
बीसीआर के इतिहास में पहली बार 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है।
23 में से 5 सीटें महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित हैं, जबकि 2 महिला सदस्य बाद में सह-नामित (को-ऑप्टेड) की जाएंगी।
इस तरह 25 सदस्यीय परिषद में पहली बार 7 महिला सदस्य शामिल होंगी। यही कारण है कि इस बार 57 महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जिससे मुकाबला बेहद रोचक हो गया है।
अधिवक्ता मनीष व्यास
33 साल में महिला वकीलों की बड़ी छलांग
प्रदेश में महिला वकीलों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है।
वर्ष 1993 में जहां केवल लगभग 1,200 महिला अधिवक्ता थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 22 हजार तक पहुंच गई है।
सिंगल ट्रांसफरेबल वोटिंग सिस्टम
चुनाव “एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली” (Single Transferable Vote) के तहत होंगे।
इसमें मतदाता एक ही वोट देता है, लेकिन उम्मीदवारों को वरीयता क्रम (1, 2, 3…) में अंकित करता है। इससे प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित और लोकतांत्रिक माना जाता है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चुनाव
पूरी चुनाव प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति की निगरानी में संपन्न कराई जा रही है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। चुनाव में पर्यवेक्षक और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी भी तैनात किए गए हैं।
सख्त आचार संहिता लागू
चुनाव को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं—
- मतदान से 36 घंटे पहले प्रचार पूरी तरह बंद
- मतदान केंद्र में केवल अधिकृत मतदाता को प्रवेश
- मोबाइल, कैमरा, स्कैनर सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण प्रतिबंधित
- मतदान केंद्र के 200 गज के दायरे में प्रचार पर रोक
कोई भी प्रत्याशी या समर्थक मतदाताओं को प्रभावित करने, पर्चे बांटने, नारे लगाने या बैनर लगाने जैसी गतिविधियां नहीं कर सकेगा।
कड़ा मुकाबला, ऐतिहासिक चुनाव
इस बार का चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है—रिकॉर्ड उम्मीदवार, महिला आरक्षण की शुरुआत, और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पारदर्शी प्रक्रिया।
कुल मिलाकर, यह चुनाव न केवल बार काउंसिल की नई कार्यकारिणी तय करेगा, बल्कि प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में वकीलों की भूमिका और दिशा भी निर्धारित करेगा।