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जयपुर में चुनावी बवाल के बाद बड़ा एक्शन: जिम्मेदार वकीलों की सनद रद्द करने तक की तैयारी

Rajasthan Bar Council Election Counting Begins Today, Process May Continue for 48 Days

बार काउंसिल चुनाव में हंगामे के बाद एक्शन मोड में कमेटी, पुनर्मतदान से पूर्व जिम्मेदारों पर कसा जा सकता है शिकंजा

जयपुर। राजस्थान बार काउंसिल चुनाव के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर में हुई अव्यवस्थाओं और मतदान प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अब चुनाव कमेटी सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है।

सूत्रों के अनुसार, चुनाव रद्द होने के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें उनकी अधिवक्ता सनद रद्द करने जैसे कदम भी शामिल हैं।

राजस्थान बार काउंसिल के चुनाव रद्द होने के मामले में अब सख्त कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं। 22 अप्रैल को राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर स्थित मतदान केंद्र सहित चार केंद्रों पर हुई अव्यवस्थाओं और कथित अनियमितताओं के बाद चुनाव कमेटी ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, दोषी पाए जाने वाले अधिवक्ताओं की सनद रद्द करने तक के कदम उठाए जा सकते हैं।

मतदान में गड़बड़ी से बढ़ा विवाद

22 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान जयपुर हाईकोर्ट परिसर में शुरुआत से ही अव्यवस्था और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं।

कई प्रत्याशियों ने मौके पर विरोध दर्ज कराया, वहीं कई ने लिखित शिकायतें देकर पुलिस प्रशासन को भी अवगत कराया।

इस दौरान सामने आए वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिससे मामला और अधिक गंभीर हो गया।

कुछ उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि विशेष प्रत्याशियों को लाभ पहुंचाने के लिए सुनियोजित प्रयास किए गए।

जांच तेज, रिपोर्ट तलब

मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव कमेटी ने संबंधित चुनाव अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

प्रत्याशियों और अधिवक्ताओं द्वारा प्रस्तुत फोटो, वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

सूत्रों का कहना है कि यदि कोई अधिवक्ता दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उसकी अधिवक्ता सनद तक निरस्त की जा सकती है।

28 अप्रैल को जयपुर में अहम बैठक

चुनाव के लिए गठित हाई पावर कमेटी 28 अप्रैल को सुबह 11 बजे जयपुर के अधिवक्ता भवन में बैठक करेगी।

इस बैठक में सभी रिटर्निंग ऑफिसर, एआरओ और उम्मीदवारों को मौजूद रहने की अनुमति दी गई है, ताकि सभी पक्षों को सुनकर निर्णय लिया जा सके।

बैठक में रिटर्निंग अधिकारियों के लिखित जवाब, वीडियो-फोटो साक्ष्य और घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।

इसके साथ ही कमेटी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का औपचारिक ऐलान भी कर सकती है।

पुनर्मतदान पर मंथन

28 अप्रैल की बैठक में कमेटी पुनर्मतदान को लेकर नई रणनीति तैयार करेगी।

माना जा रहा है कि जयपुर हाईकोर्ट और अन्य प्रभावित केंद्रों पर दोबारा मतदान कराने की योजना पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

इसके साथ ही कमेटी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का औपचारिक ऐलान भी कर सकती है।

एक से अधिक दिन मतदान संभव…

जयपुर हाईकोर्ट प्रदेश का सबसे बड़ा मतदान केंद्र है, जहां 14 हजार से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं।

ऐसे में एक ही दिन में मतदान कराना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

इसी कारण कमेटी एक से अधिक दिन मतदान कराने के विकल्प पर भी विचार कर रही है, ताकि भीड़ नियंत्रित रहे और प्रक्रिया सुचारु ढंग से पूरी हो सके।

इससे मतदाताओं की भीड़ कम होगी, मतदान प्रक्रिया सुचारु रहेगी और अव्यवस्था की संभावना भी घटेगी।

लेकिन इससे पहले कमेटी सभी प्रत्याशियों से भी इस बारे में मंथन कर सकती है।

वरिष्ठ अधिवक्ताओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी

चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाने के लिए जयपुर और जोधपुर के वरिष्ठ अधिवक्ताओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी चल रही है।

कुछ वरिष्ठ अधिवक्ता, जो अनुशासन के मामले में बेहद सख्त हैं, कमेटी की पहली पसंद हैं, जिससे कि यह चुनाव बेहद मजबूती से निष्पक्ष हो।

कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सहयोग के लिए सहमति जताई है, हालांकि उन्होंने सख्त नियम लागू करने और अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति जैसी शर्तें भी रखी हैं।

सुरक्षा व्यवस्था भी बड़ी चुनौती

जयपुर, जोधपुर और श्रीगंगानगर जैसे शेष केंद्रों पर मतदान होना बाकी है।

लेकिन जयपुर में सर्वाधिक मतदाता हैं, ऐसे में प्रदेशभर से प्रत्याशियों और समर्थकों के जयपुर पहुंचने की संभावना है, जिससे कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है।

चुनाव कमेटी इस स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने की योजना पर भी काम कर रही है।

निष्पक्ष चुनाव पर टिकी निगाहें

राजस्थान बार काउंसिल चुनाव को प्रदेश के विधिक जगत का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक आयोजन माना जाता है।

24 अप्रैल को हुई हाई पावर कमेटी की बैठक में भी सभी सदस्यों ने एकमत से माना कि 22 अप्रैल की घटनाओं की गंभीर जांच आवश्यक है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

अब पूरे प्रदेश के अधिवक्ताओं की नजर 28 अप्रैल की बैठक और कमेटी के फैसलों पर टिकी है।

उम्मीद की जा रही है कि निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ठोस और सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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