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गेस्ट फैकल्टी भर्ती पर हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, राजस्थान में नई भर्ती प्रक्रिया का रास्ता साफ; परिणाम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अधीन

Rajasthan Guest Faculty Recruitment: Supreme Court Stays High Court Order, Recruitment Process to Continue

नई दिल्ली/जयपुर। राजस्थान के सरकारी कॉलेजों में राजस्थान कॉलेज शिक्षा सोसायटी (Raj CES) के तहत शिक्षण पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ के 14 जुलाई 2026 के उस आदेश के प्रभाव और संचालन पर रोक लगा दी है, जिसके तहत भर्ती प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित रखने का निर्देश दिया गया था।

इसके बाद राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) की ओर से चल रही भर्ती प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ सकेगी।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 30 अप्रैल 2026 की अधिसूचना के तहत होने वाली भर्ती प्रक्रिया का परिणाम लंबित विशेष अनुमति याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।

हाईकोर्ट ने गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों को दी थी अंतरिम राहत

मामला राजस्थान कॉलेज शिक्षा सोसायटी के अधीन विभिन्न सरकारी कॉलेजों में सहायक आचार्य के रूप में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों से जुड़े विवाद से शुरू हुआ था।

हाईकोर्ट ने लंबित मामलों में अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया था कि मामले लंबित रहने तक संबंधित याचिकाकर्ता और अपीलकर्ता सहायक आचार्य के पद पर अपनी सेवाएं जारी रख सकेंगे।

मामले में हाईकोर्ट के समक्ष यह भी बताया गया था कि पहले से संविदा पर कार्यरत शिक्षकों को हटाकर उनकी जगह नए संविदा शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। हाईकोर्ट ने संबंधित विज्ञापन को मामलों के निस्तारण तक स्थगित रखने का निर्देश दिया था।

इसी विवाद के बीच भर्ती प्रक्रिया आयोजित करने में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की भूमिका और अधिकारिता को भी चुनौती दी गई थी। अलग-अलग पीठों के समक्ष इस मुद्दे पर अलग-अलग मत सामने आने के बाद मामलों को बड़ी पीठ के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया था।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसका अंतरिम आदेश सभी लंबित समान मामलों पर लागू होगा और समान राहत के लिए प्रभावित शिक्षकों को अलग-अलग नई याचिकाएं दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होगी।

हाईकोर्ट आदेश को राजस्थान सरकार ने दी चुनौती

हाईकोर्ट के 14 जुलाई 2026 के आदेश के खिलाफ राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

राज्य सरकार ने विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच के आदेश को चुनौती दी।

यह मामला ‘द स्टेट ऑफ राजस्थान एवं अन्य बनाम घनश्याम शर्मा एवं अन्य’ के नाम से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आया।

इस मामले पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने सुनवाई की।

राज्य सरकार ने कहा रोक नहीं लगनी चाहिए थी

राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और पैनल काउसिल अनीशा रस्तोगी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पक्ष रखा।

राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच को 30 अप्रैल 2026 की अधिसूचना के तहत शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया पर रोक नहीं लगानी चाहिए थी।

सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि मामले से जुड़े निजी प्रतिवादी और रिट याचिकाकर्ता फिलहाल गेस्ट फैकल्टी के रूप में सेवाएं जारी रखे हुए हैं और वर्तमान में उन्हें हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

हाईकोर्ट के आदेश पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और मामले को 2 नवंबर 2026 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

अदालत ने अंतरिम व्यवस्था के तहत राजस्थान हाईकोर्ट के चुनौती दिए गए आदेश के प्रभाव और संचालन पर रोक लगा दी।

इस आदेश का सीधा असर भर्ती प्रक्रिया पर पड़ा है। हाईकोर्ट के आदेश के कारण जिस भर्ती प्रक्रिया को स्थगित रखा गया था, वह अब निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ सकती है।

भर्ती प्रक्रिया जारी, लेकिन परिणाम फैसले के अधीन

सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को रोकने का आदेश नहीं दिया है। इसके बजाय अदालत ने स्पष्ट किया कि 30 अप्रैल 2026 की अधिसूचना के तहत होने वाली भर्ती प्रक्रिया का परिणाम लंबित विशेष अनुमति याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगा।

यानी भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, लेकिन उससे संबंधित अंतिम परिणाम पर सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के फैसले का प्रभाव रहेगा।

2 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और अगली सुनवाई के लिए 2 नवंबर 2026 की तारीख तय की है। तब तक हाईकोर्ट के 14 जुलाई के आदेश के प्रभाव और संचालन पर लगी रोक लागू रहेगी।

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