जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश डॉ संजय कुमार अग्रवाल के स्वागत में गुरूवार देर शाम हाईकोर्ट परिसर के फ्रंट लॉन में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया.
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर की ओर से आयोजित इस समारोह में हाईकोर्ट के सभी सिटिंग जज, न्यायिक अधिकारी ओर अधिवक्ता शामिल हुए.
मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल का संबोधन –
माननीय न्यायाधीशगण, महाधिवक्ता महोदय, राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं पदाधिकारीगण, वरिष्ठ अधिवक्तागण, युवा अधिवक्तागण तथा उपस्थित सभी सम्मानित साथीगण—
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर की ओर से जिस आत्मीयता, सम्मान और स्नेह के साथ मेरा स्वागत किया गया है, उसके लिए मैं हृदय से आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं।
यह मेरे लिए केवल एक औपचारिक स्वागत समारोह नहीं है। यह मेरे लिए आपके विश्वास, सहयोग और अपेक्षाओं को स्वीकार करने का अवसर है। मैं इस सम्मान को एक बड़ी जिम्मेदारी के रूप में देखता हूं।
बार और बेंच की भूमिका अलग, लेकिन उद्देश्य एक
बार और बेंच की भूमिकाएं भले ही अलग-अलग हों, लेकिन हमारा अंतिम उद्देश्य एक ही है—न्याय की प्रतिष्ठा को बनाए रखना और आमजन का न्याय व्यवस्था में विश्वास मजबूत करना।
बार और बेंच के बीच जितना बेहतर संवाद और सहयोग होगा, न्याय व्यवस्था उतनी ही प्रभावी, पारदर्शी और मजबूत होगी।
हमारी जिम्मेदारी केवल न्यायालय तक सीमित नहीं है। समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर वंचित और कमजोर वर्गों तक सुलभ, निष्पक्ष और प्रभावी न्याय पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
राजस्थान हाईकोर्ट की अपनी एक गौरवशाली न्यायिक और संवैधानिक विरासत रही है। इस न्यायालय ने विधि के शासन, नागरिक अधिकारों और न्याय के उच्च आदर्शों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राजस्थान की बार ने देश को अनेक प्रतिभावान अधिवक्ता, न्यायविद और न्यायाधीश दिए हैं। इस बार की समृद्ध परंपरा और विरासत हम सभी के लिए गौरव का विषय है।
न्याय व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां
आज न्याय व्यवस्था के सामने अनेक नई चुनौतियां हैं।
मुकदमों का बढ़ता बोझ, न्याय में देरी, बदलती तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता प्रभाव और समाज की न्याय व्यवस्था से बढ़ती अपेक्षाएं—ये सभी हमारे सामने महत्वपूर्ण प्रश्न हैं।
इन परिस्थितियों में हमें अपनी कार्यप्रणाली के साथ-साथ अपनी सोच को भी समय के अनुरूप विकसित करना होगा।
तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे लिए चुनौती भी हैं और अवसर भी। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि बदलते समय के साथ न्याय की गुणवत्ता, निष्पक्षता और संवेदनशीलता बनी रहे।
युवा अधिवक्ताओं के लिए संदेश
मैं विशेष रूप से युवा अधिवक्ताओं से कहना चाहता हूं कि वकालत केवल एक पेशा नहीं है, बल्कि न्याय और समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है।
ज्ञान इस पेशे की पहली आवश्यकता है, लेकिन ज्ञान के साथ धैर्य, विनम्रता, ईमानदारी और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता भी उतनी ही आवश्यक है।
केवल किसी मुकदमे को जीत लेना ही सफलता नहीं है। उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है न्यायालय का विश्वास जीतना।
मैं वरिष्ठ अधिवक्ताओं से भी आग्रह करूंगा कि वे युवा अधिवक्ताओं का मार्गदर्शन करें और अपने अनुभव उनके साथ साझा करें।
याद रखिए, भविष्य के न्यायाधीश भी इसी बार से निकलेंगे। इसलिए हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम ऐसे अधिवक्ता तैयार करें, जिनमें कानून के ज्ञान के साथ न्याय के प्रति संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता भी हो।
छत्तीसगढ़ से भावनात्मक जुड़ाव, राजस्थान की सेवा का सौभाग्य
मेरी मातृभूमि छत्तीसगढ़ से मेरा भावनात्मक जुड़ाव हमेशा बना रहेगा। लेकिन छत्तीसगढ़ को पीछे छोड़कर राजस्थान की इस गौरवशाली न्यायिक परंपरा में सेवा करने का अवसर मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
राजस्थान हाईकोर्ट की सेवा मेरे लिए केवल एक नए पद का दायित्व ग्रहण करना नहीं है। यह राजस्थान की समृद्ध न्यायिक विरासत, गौरवशाली परंपरा और यहां के लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप स्वयं को समर्पित करने का अवसर है।
राजस्थान आने के बाद जिस गर्मजोशी, अपनत्व और स्नेह के साथ मेरा स्वागत हुआ है, उससे मुझे कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि मैं किसी नई जगह आया हूं।
जयपुर की मेहमाननवाजी पर कुछ पंक्तियां
जयपुर के लोगों के इस अपनत्व ने मुझे अभिभूत किया है। इसी भावना को कुछ पंक्तियों के माध्यम से व्यक्त करना चाहूंगा—
गुलाबी पत्थरों से जिनका नूर है,
जयपुर के लोगों का दिल बड़ा मशहूर है।
अतिथि देवो भवः, जिसकी रीत पुरानी है,
हर चेहरे पर अपनेपन की कहानी है।
हवा में किशनगढ़ और आमेर की शान,
यहां के वासियों की अनूठी है आन-बान।
जहां हाईकोर्ट की प्राचीरें न्याय का मान बढ़ाती हैं,
काले कोट की गरिमा यहां शान से लहराती है।
दलीलों में भी सख्ती है,
खम्मा घणी की मिठास यहां,
संविधान के साए में
जीता है हर विश्वास यहां।
रिश्तों की सादगी और मानवता की बात,
हर नुक्कड़-नुक्कड़ बांटते अपनापन साथ।
मेहमान को गले लगाना इनकी पहचान है,
जयपुर के लोगों से ही जयपुर महान है।
बार की समस्याओं पर मिलकर काम करने का भरोसा
बार अध्यक्ष राजीव सोगरवाल जी ने चैंबर और अन्य कई समस्याओं की ओर हमारा ध्यान आकर्षित किया है। मैंने इन सभी समस्याओं का संज्ञान लिया है।
इन विषयों पर हम लोग मिलकर काम कर रहे हैं। चैंबर, भवन, जमीन और अन्य मूलभूत समस्याओं के संबंध में भी आवश्यक स्तर पर कार्य किया जा रहा है।
मैं विश्वास दिलाना चाहता हूं कि आने वाले समय में इन समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने का प्रयास किया जाएगा।
हमारा प्रयास केवल समस्याओं को सुनना नहीं, बल्कि उनके समाधान की दिशा में प्रभावी ढंग से आगे बढ़ना होना चाहिए।
न्यायपालिका में विश्वास मजबूत करना हमारा सामूहिक दायित्व
मैं यह मानता हूं कि मेरी पहचान किसी एक निर्णय, किसी एक पहल या किसी एक उपलब्धि से नहीं होनी चाहिए।
हमारा प्रयास सामूहिक होना चाहिए। हम सभी मिलकर ऐसी न्याय व्यवस्था का निर्माण करें, जिसमें निष्पक्षता, संवेदनशीलता और न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता दिखाई दे।
बार और बेंच के बीच सहयोग जितना मजबूत होगा, उसका लाभ अंततः आमजन को मिलेगा।
हम सभी का अंतिम लक्ष्य यही होना चाहिए कि राजस्थान की न्यायपालिका में लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हो तथा प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावी और निष्पक्ष न्याय प्राप्त हो।
अंत में, जिस आत्मीयता और स्नेह के साथ आपने मेरा स्वागत किया है, उसके लिए मैं हृदय से आभारी हूं।
इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर के सभी पदाधिकारियों और सभी अधिवक्ता साथियों का मैं धन्यवाद करता हूं।
मुझे भविष्य में भी आप सभी के सहयोग, मार्गदर्शन और सकारात्मक सहभागिता की अपेक्षा रहेगी।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय हिंद।