जयपुर। राजस्थान में सरकारी भर्तियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश पारित करते हुए RAS 2023 विभागीय श्रेणी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने RAS 2023 भर्ती में विभागीय श्रेणी (Departmental Category) के लिए आरक्षित पदों पर नियुक्ति आदेश जारी करने पर रोक लगा दी है।
यह रोक राजस्थान स्टेट एंड सबऑर्डिनेट सर्विसेज कंबाइंड कॉम्पिटिटिव (मेन्स) परीक्षा, 2023 के तहत की जा रही नियुक्तियों पर लगाई गई है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक विभागीय आरक्षण की वैधता और उसके लागू होने के तरीके पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक इन पदों पर नियुक्ति नहीं की जा सकती।
यह आदेश जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने रोहित कुमार सहित अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पारित किया।
मामले में अमितकुमार, रोहितकुमार व अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अक्षित गुप्ता, मोहित खंडेलवाल, प्रणव शर्मा, प्रज्ञा सेठ एवं श्रेयांश धारीवाल ने पैरवी।
ये हैं मामला
मामला विभागीय अभ्यर्थियों को दिए जाने वाले आरक्षण (Departmental Reservation) की प्रकृति और दायरे से जुड़ा है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा विभागीय श्रेणी के लिए अपनाई गई आरक्षण नीति संवैधानिक प्रावधानों और स्थापित न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
एक पक्ष की ओर से दलील दी गई कि विभागीय अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल दोनों रूपों में लागू हो सकता है।
इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय महावीर सिंह बनाम एसएससी (1986) का हवाला दिया गया, जिसमें विभागीय अभ्यर्थियों के आरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण सिद्धांत दिया गया हैं.
वहीं दूसरी ओर, कुछ याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार द्वारा विभागीय अभ्यर्थियों के लिए अपनाई गई मौजूदा आरक्षण नीति को ही चुनौती देते हुए कहा कि यह नीति समानता के अधिकार का उल्लंघन करती है और अन्य वर्गों के अभ्यर्थियों के अवसरों को सीमित करती है।
राज्य सरकार की दलील
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता और अन्य अधिवक्ताओं ने अदालत से समय मांगा।
उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है और यदि इस पर रोक लगाई जाती है, तो पूरी चयन प्रक्रिया प्रभावित होगी।
राज्य की ओर से यह आग्रह किया गया कि सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने से न रोका जाए।
सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि विवादित विभागीय श्रेणी के पदों पर नियुक्ति हो जाती है, तो बाद में चयनित अभ्यर्थियों के अधिकार पैदा हो जाएंगे, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय आरक्षण की लागू करने की वैधता और उसका स्वरूप एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न है, जिस पर विस्तार से विचार किया जाना आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने माना कि यदि बिना अंतिम निर्णय के नियुक्तियां कर दी गईं, तो बाद में उन्हें निरस्त करना न केवल कठिन होगा, बल्कि इससे अनावश्यक विवाद और मुकदमेबाजी भी बढ़ेगी।
इसी को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने आरएएस भर्ती में विभागिय श्रेणी के लिए आरक्षित पदों पर नियुक्ति आदेश जारी करने पर रोक लगा दी.
13 जनवरी को होगी सुवाई
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को आदेश दिया है कि वे अगली सुनवाई से पहले अपना विस्तृत जवाब (Reply) दाखिल करें और उसकी प्रति याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को भी उपलब्ध कराएं।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजे निर्धारित की गई है। तब तक विभागीय श्रेणी के अंतर्गत आने वाले पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया स्थगित रहेगी।