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निकाय चुनाव में नामांकन से जुड़ी 19 याचिकाएं खारिज, राजस्थान हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया के बीच हस्तक्षेप से किया इनकार

Rajasthan HC Rejects 19 Pleas Against Nomination Rejections, Refuses to Interfere in Ongoing Municipal Polls

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने नगरीय निकाय चुनाव में नामांकन विवादों को लेकर अहम फैसला सुनाया है।

हाईकोर्ट ने नामांकन रद्द होने से जुड़ी 19 याचिकाओं को खारिज करते हुए चुनाव प्रक्रिया में दखल देने से इनकार कर दिया।

इन याचिकाओं में उम्मीदवारों ने अपना नामांकन रद्द किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि महज छोटी तकनीकी गलतियों के चलते उनेक नामांकन रद्द कर दिए गए और उन्हें चुनाव से बाहर कर दिया गया।

जस्टिस मुकेश राजपुरोहित की एकल पीठ ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद ऐसे मामलों में कोर्ट का हस्तक्षेप सीमित रहता है। जब चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तब नामांकन रद्द होने जैसे मामलों में बीच में दखल देकर चुनाव प्रक्रिया को रोकना ठीक नहीं होगा।

इसलिए कोर्ट ने इस स्तर पर उम्मीदवारों को कोई राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने उम्मीदवारों को चुनाव परिणाम आने के बाद कानून के मुताबिक चुनाव याचिका दायर करने की छूट दी है।

नामांकन रद्द होने के बाद हाईकोर्ट पहुंचे उम्मीदवार

राज्य निर्वाचन आयोग ने 19 अगस्त 2026 को राजस्थान के 309 नगर पालिकाओं, नगर परिषदों और नगर निगमों के चुनाव का कार्यक्रम जारी किया था।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त थी। इसके बाद 1 सितंबर को रिटर्निंग अधिकारियों ने नामांकन पत्रों की जांच की। जांच के दौरान कई उम्मीदवारों के नामांकन अलग-अलग कारणों से रद्द कर दिए गए।

इसके बाद चूरू की निधि सैन, सिरोही की सुंदर माली, पाली की हिना देवी, जैसलमेर की सोनू और पुष्पा देवी समेत कई उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट का रुख किया।

छोटी तकनीकी गलतियों का दिया हवाला

याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि उनके नामांकन महज छोटी तकनीकी गलतियों की वजह से निरस्त कर दिए गए। उनके नामांकन पत्रों में कमियां ऐसी थीं, जिन्हें दूर किया जा सकता था। लेकिन सीधे नामांकन ही रद्द कर दिए गए।

याचिकाकर्ताओं के मुताबिक कुछ मामलों में नोटरी के दस्तखत नहीं होने, गवाह के हस्ताक्षर छूट जाने या नगर पालिका का कुछ बकाया होने जैसी कमियों रह गईं थी। लेकिन ये ऐसी खामियां नहीं थीं जिनके चलते उन्हें चुनाव से ही बाहर कर दिया गया।

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से मांग की थी कि उनके नामांकन रद्द करने के फैसले को हटाए और उन्हें चुनाव लड़ने का मौका दिया जाए।

आयोग ने कहा- चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है

राज्य निर्वाचन आयोग ने इन याचिकाओं का विरोध किया। आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास बालिया ने दलील दी कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई थी।

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने भी याचिकाओं का विरोध किया।

दोनों पक्षों की ओर से यह तर्क रखा गया कि चुनाव कार्यक्रम जारी होने के साथ ही चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में नामांकन रद्द करने जैसे मामलों में सीधे हाईकोर्ट के जरिए हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

आयोग और सरकार की ओर से संविधान के अनुच्छेद 243जेडजी(बी) और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 30(2) का हवाला दिया गया।

इन प्रावधानों के तहत चुनाव से जुड़े विवादों के लिए अलग कानूनी व्यवस्था है। इसका मतलब है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद कोर्ट आम तौर पर सीधे चुनाव रोकने या उसमें बदलाव करने से बचती है।

हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया में दखल देने से मना किया

इसी वजह से हाईकोर्ट ने इस चरण में नामांकन रद्द किए जाने के मामलों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और सभी 19 याचिकाएं खारिज कर दीं।

हालांकि, कोर्ट ने उम्मीदवारों के लिए कानूनी रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया।

हाईकोर्ट ने उन्हें चुनाव परिणाम आने के बाद कानून के मुताबिक चुनाव याचिका दाखिल करने की छूट दी है। यानी अभी रद्द किए गए नामांकन के आधार पर उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिलेगी।

अगर किसी उम्मीदवार को लगता है कि उसका नामांकन गलत तरीके से रद्द किया गया था, तो वह चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत इस फैसले को चुनौती दे सकता है।

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