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PG और सुपरस्पेशियलिटी बॉन्ड विवाद पर राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: केंद्र में चयन होने पर राज्य सेवा बॉन्ड लागू नहीं होगा

Rajasthan HC Rules State Service Bond Not Applicable to PG Doctors Selected in Central Government Jobs

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा से जुड़े एक अहम और दूरगामी प्रभाव वाले आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि कोई पीजी या सुपरस्पेशियलिटी डॉक्टर केंद्र सरकार अथवा केंद्र सरकार के अधीन किसी अधिकृत संस्थान में चयनित होता है, तो उस पर राज्य सरकार द्वारा लिया गया सेवा बॉन्ड (Service Bond) लागू नहीं होगा।

हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों में न केवल बॉन्ड की शर्तों से छूट देने, बल्कि संबंधित अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेज तुरंत जारी करने के आदेश दिए हैं.

यह महत्वपूर्ण आदेश जस्टिस अनुरूप सिंघी की एकलपीठ ने डॉ. प्रियंका पी. नायर और डॉ. काना राम की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया हैं.

ये हैं पूरा मामला

याचिकाकर्ता डॉ. प्रियंका पी. नायर, जो केरल के कोट्टायम की निवासी हैं, ने राजस्थान के एस.एम.एस. मेडिकल कॉलेज, जयपुर से पीजी/सुपरस्पेशियलिटी की पढ़ाई पूरी की थी।

राज्य सरकार के नियमों के अनुसार, ऐसे अभ्यर्थियों से दो वर्ष का सेवा बॉन्ड भरवाया जाता है, जिसके तहत उन्हें राज्य सरकार की सेवा करनी होती है या निर्धारित राशि/गारंटी देनी होती है।

डॉ. प्रियंका पी. नायर का चयन केंद्र सरकार के अधीन रेलवे बोर्ड (भारत सरकार) में हो गया और उन्हें 12 अगस्त 2022 को नियुक्ति आदेश जारी किया गया। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा उनसे बॉन्ड की शर्तें पूरी करने की मांग की गई और उनके शैक्षणिक दस्तावेज रोके गए।

दूसरे मामले में डॉ. काना राम से भी जुड़ा हुआ था, जिनका चयन केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत हुआ था। दोनों चिकित्सकों ने इसे नियमों और कानून के विपरीत बताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सरकार का बदला हुआ रुख और आदेश का आधार

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त कार्यालय द्वारा 1 दिसंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि—

यदि कोई पीजी या सुपरस्पेशियलिटी अभ्यर्थी केंद्र सरकार, राज्य सरकार, अथवा केंद्र/राज्य सरकार के पूर्ण या आंशिक स्वामित्व वाले अधिकृत संस्थान में नियुक्ति प्राप्त करता है और उस कारण राज्य सेवा छोड़ता है, तो उस पर भरे गए सेवा बॉन्ड की शर्तें प्रभावी नहीं होंगी, तथा उसे एनओसी और बॉन्ड से छूट दी जाएगी।

हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि इसी प्रकार का विवाद पहले भी अदालत के समक्ष आया था, जिस पर 16 दिसंबर 2025 को निर्णय दिया जा चुका है। वर्तमान मामला उसी आदेश और विभागीय नीति से पूरी तरह covered है।

हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश

जस्टिस अनुरूप सिंघी ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ताओं का चयन केंद्र सरकार में हो चुका है और इस तथ्य पर राज्य सरकार को कोई विवाद नहीं है, इसलिए—

याचिकाकर्ताओं को सेवा बॉन्ड की शर्तों से बाध्य नहीं किया जाएगा।

राज्य सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया कि वे सभी मूल दस्तावेज तुरंत रिहा करें।

यदि किसी याचिकाकर्ता ने बैंक गारंटी या अन्य सुरक्षा राशि जमा कराई है, तो संबंधित प्राधिकारी के समक्ष आवेदन देने पर उसे 7 दिन के भीतर लौटाया जाए।

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