जयपुर। सुप्रीम कोर्ट के बाद अब राजस्थान हाईकोर्ट ने भी राजस्थान बार काउंसिल के आगामी चुनावों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के प्रावधान के आदेश दिए हैं।
प्रदेश में बार एसोसिएशन के चुनावों में महिला अधिवक्ताओं के प्रतिनिधित्व को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश लागू होने के बाद संबंधित याचिका का उद्देश्य पूरा हो चुका है, इसलिए कार्यवाही समाप्त की जाती है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए विस्तृत निर्देशों को लागू करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि जिस मुद्दे को लेकर याचिका दायर की गई थी, उस पर पहले ही सुप्रीम कोर्ट विस्तृत निर्देश जारी कर चुका है, इसलिए अब इस याचिका पर आगे विचार की आवश्यकता नहीं रह गई है।
अधिवक्ता हेमा तिवाडी ने याचिका दायर कर प्रदेश के विभिन्न बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों के पद महिलाओं के लिए आरक्षित रखने की मांग की थी
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का प्रभाव
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने 8 दिसंबर 2025 को पारित आदेश में स्पष्ट किया है कि राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जिन राज्यों में बार काउंसिल चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है या संपन्न हो चुकी है, वहां तत्काल सीटें आरक्षित करना व्यावहारिक नहीं होगा, लेकिन अन्य राज्यों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य बार काउंसिलों की कुल सीटों में से 30 प्रतिशत सीटें महिला अधिवक्ताओं के लिए सुनिश्चित की जाएं। इनमें से 20 प्रतिशत सीटें चुनाव के माध्यम से और 10 प्रतिशत सीटें सह-नामांकन (को-ऑप्शन) के जरिए भरी जाएंगी।
यदि पर्याप्त संख्या में महिला उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ती हैं, तो शेष सीटें भी सह-नामांकन की प्रक्रिया से भरी जाएंगी ताकि कुल 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।
हाईकोर्ट का निष्कर्ष
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता द्वारा उठाया गया मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले ही हल हो चुका है, इसलिए याचिका में मांगी गई राहत स्वतः संतुष्ट मानी जाएगी। इसी आधार पर अदालत ने याचिका की कार्यवाही समाप्त करते हुए इसे निस्तारित कर दिया।