जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने विशेष शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक भर्ती से जुड़ी एक महत्वपूर्ण याचिका पर फैसला सुनाते हुए B.Ed. (General) के साथ एक वर्षीय Professional Diploma in Special Education को वैध योग्यता माना है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विशेष शिक्षा के शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में Rehabilitation Council of India (RCI) द्वारा निर्धारित योग्यताओं को महत्व दिया जाना आवश्यक है।
जस्टिस कुलदीप माथुर ने विजेन्द्र व्यास व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया हैं.
2018 की भर्ती में आवेदन, परीक्षा पास करने के बाद दस्तावेज सत्यापन में candidature खारिज
मामला राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा 29 मार्च 2018 को जारी विज्ञापन से जुड़ा था।
इस विज्ञापन के माध्यम से TSP Area में Senior Teacher (Teacher Grade-II), Special Education के पदों पर भर्ती की जानी थी।
याचिकाकर्ताओं ने भर्ती के लिए आवेदन किया और उन्हें लिखित परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई।
दोनों अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्हें 6 फरवरी 2020 को दस्तावेजो के सत्यापन के लिए बुलाया गया।
दस्तावेज सत्यापन के दौरान उनकी उम्मीदवारी इस आधार पर खारिज कर दी गई कि उनके पास B.Ed. Special Education या Special Education में दो वर्षीय डिप्लोमा/कोर्स नहीं था।
विभाग ने कहा कि उनके पास B.Ed. (General) के साथ एक वर्षीय Post Graduate Professional Diploma in Special Education (PGPD-SEDE) था।
विभाग के इस आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि Rehabilitation Council of India की ओर से निर्धारित योग्यता के अनुसार B.Ed. (General) के साथ एक वर्षीय Diploma in Special Education भी विशेष शिक्षा शिक्षक की नियुक्ति के लिए मान्य है।
RCI की 2012 की गाइडलाइन बनी फैसले का महत्वपूर्ण आधार
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने आदेश में Rehabilitation Council of India की 11 जनवरी 2012 के परिपत्र का उल्लेख किया। इसमें Secondary और Senior Secondary Teacher के लिए कई वैकल्पिक योग्यताएं निर्धारित की गई थीं।
इस परिपत्र के अनुसार इनमें
Graduate के साथ B.Ed. (Special Education)
B.Ed. (General) के साथ एक वर्षीय Diploma in Special Education
B.Ed. (General) के साथ दो वर्षीय Diploma in Special Education
B.Ed. (General) के साथ Post Graduate Professional Diploma in Special Education (PGPD)
B.Ed. Special Education के साथ PG Professional Certificate
तथा RCI द्वारा मान्य अन्य समकक्ष योग्यताएं।
यानी RCI की निर्धारित योग्यता में B.Ed. (General) के साथ एक वर्षीय Special Education Diploma को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट फैसले का हवाला
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के Manoj Kumar Sharma बनाम राजस्थान सरकार के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि B.Ed. (General) के साथ Post Graduate Professional Diploma in Special Education रखने वाले अभ्यर्थियों की योग्यता को B.Ed. (Special Education) के समकक्ष माना जा सकता है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सामान्य शिक्षा के लिए NCTE की निर्धारित योग्यता लागू होंगी, जबकि विशेष शिक्षा से संबंधित स्कूलों में विशेष शिक्षा शिक्षकों की योग्यता के मामले में RCI की गाईडलाइन का पालन किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना था कि RCI ने 20 अप्रैल 2009 के आदेश के माध्यम से B.Ed. (General Education) के साथ Special Education Diploma को B.Ed. (Special Education) के समकक्ष माना था। साथ ही NCTE और RCI के बीच 8 अप्रैल 2015 को हुए MoU का भी उल्लेख किया गया।
दो वर्षीय डिप्लोमा वाला तर्क टिकता नहीं
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के Manoj Kumar Sharma फैसले के बाद इस विवाद पर पर्याप्त रूप से स्थिति स्पष्ट हो चुकी है।
कोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि सामान्य शिक्षा में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए NCTE की योग्यता का पालन किया जाना चाहिए, जबकि विशेष शिक्षा के स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए RCI द्वारा निर्धारित योग्यता का पालन किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने RCI की 11 जनवरी 2012 की सूचना का हवाला देते हुए कहा कि B.Ed. (General) के साथ एक वर्षीय Diploma in Special Education को भी उस qualification के समकक्ष मान्यता दी गई है, जिसे 29 मार्च 2018 के विज्ञापन में Secondary/Senior Secondary Teacher अर्थात Senior Teacher (Special Education) के लिए निर्धारित किया गया था।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने विभाग की दलील कि याचिकाकर्ताओं के पास दो वर्षीय डिप्लोमा के बजाय एक वर्षीय डिप्लोमा है, को बिना आधार का मानते हुए खारिज करने का आदेश दिया.
नियुक्ति मेरिट और अन्य पात्रताओं पर निर्भर
दोनो पक्षों की बहस सुनने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं को मंजूर करते हुए सरकार को आदेश दिया कि B.Ed. (General) + एक वर्षीय Professional Diploma in Special Education की qualification को विज्ञापित पद के लिए योग्य माना जाए।
हालांकि कोर्ट ने नियुक्ति के संबंध में एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी है।
कोर्ट ने 4 सितंबर 2020 के अंतरिम आदेश को ध्यान में रखते हुए विभाग को आदेश दिया कि यदि दोनों याचिकाकर्ता 29 मार्च 2018 के विज्ञापन के तहत तैयार merit list में अपनी-अपनी कैटेगरी में आते हैं तो उन्हें नियुक्ति दी जाए।
नियुक्ति की कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश की तारीख से 60 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी.
फैसले में हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ताओं को नियुक्ति मिलती है, तो वे उनके समान स्थिति वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिए जाने की तारीख से नियुक्ति के हकदार होंगे।
उन्हें consequential seniority और pay fixation का लाभ भी मिलेगा। हालांकि कोर्ट ने साफ किया है कि याचिकाकर्ताओं को पिछले भत्ते नहीं दिए जाएंगे।