जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग के निर्माण में सामने आई गंभीर अनियमितताओं के मामले में पुलिस का शिकंजा अब और कसता जा रहा है।
इसी कड़ी में पुलिस ने फरार 50 हजार रुपये के इनामी आरोपी और वीरेंद्र कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक वीरेंद्र गर्ग को हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया है।
इस मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और अब तक RSRDC के करीब 4 अधिकारी गिरफ्तार में आ चुके हैं।
पुलिस ने मंगलवार को राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम लिमिटेड (RSRDC) के तत्कालीन सहायक अभियंता अजय किशन मुथा और जयपुर में तैनात अधिशासी अभियंता दीपक मित्तल को गिरफ्तार किया।
इससे पहले 5 अधिकारियों और ठेकेदारों को पकड़ा गया था। वहीं अब 50 हजार रुपये के इनामी आरोपी वीरेंद्र कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक वीरेंद्र गर्ग को पुलिस ने हरिद्वार से गिरफ्तार किया।
पुलिस अब निर्माण से जुड़े अधिकारियों, ठेकेदारों और अलग-अलग तकनीकी काम करने वाली कंपनियों की भूमिका की भी जांच में जुटी हुई है।
यह गिरफ्तारियां इसलिए भी अहम हैं क्योंकि राजस्थान हाईकोर्ट खुद भवन की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर स्वतः संज्ञान ले चुका है और मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होनी है।
गिरफ्तारी के डर से फरारी काट रहा था आरोपी वीरेंद्र गर्ग
आरोपी वीरेंद्र गर्ग मामला सामने आने के बाद फरार हो गया था और गुरुग्राम चला गया था। यहां से वो लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था।
जिसके बाद पुलिस ने धरपकड़ के लिए उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया था। पुलिस की विशेष टीम ने सूचना के मुताबिक उत्तराखंड के हरिद्वार से उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अब उससे निर्माण कार्य, कंपनी की भूमिका और मामले से जुड़े दूसरे आरोपियों के साथ उसके कथित संबंधों को लेकर पूछताछ कर रही है।
कई अधिकारी और ठेकेदार समेत अब तक 8 गिरफ्तारियां
पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 12 विशेष टीमों और साइबर सेल की 4 टीमों को लगाया था।
इन टीमों ने जोधपुर, जयपुर, कोटा, बूंदी, अजमेर और अलवर के अलावा गुरुग्राम, दिल्ली-NCR, पंजाब और हरिद्वार तक दबिश दी।
इस मामले में सबसे पहले 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें RSRDC के तत्कालीन अधिकारी राजेश पुरोहित, नवीन राय और जितेंद्र शर्मा के अलावा जेके कंपनी के मालिक रामेश्वर दयाल और फायर इंस्टॉलेशन कंपनी के मालिक गोपाल लाल खंडेलवाल शामिल थे।
इसके बाद पुलिस ने RSRDC के तत्कालीन सहायक अभियंता अजय किशन मुथा और जयपुर में तैनात अधिशासी अभियंता दीपक मित्तल को गिरफ्तार किया।
अब हरिद्वार से वीरेंद्र गर्ग की गिरफ्तारी के साथ कुल संख्या 8 हो गई है। पुलिस सभी आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
220 करोड़ की बिल्डिंग में हैंडओवर के बाद सामने आईं खामियां
राजस्थान हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग का निर्माण करीब 220 करोड़ रुपये की लागत से हुआ था। इसका निर्माण कार्य 2011 में शुरू हुआ और 2019 में भवन हैंडओवर किया गया।
हैंडओवर के बाद ही भवन में कई तरह की समस्याएं सामने आने लगीं। फॉल सीलिंग गिरने, पानी की सीलन, आग लगने और प्लास्टर समेत दूसरी निर्माण संबंधी खामियों के मामले सामने आए।
इसके बाद भवन की मजबूती और उसकी संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे। जिसके बाद इन मामलों को लेकर वर्ष 2024 में कुड़ी थाने में केस दर्ज किया गया था।
पुलिस अब निर्माण से जुड़े अधिकारियों, ठेकेदारों और दूसरी एजेंसियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
CS ने जिम्मेदारों पर कार्रवाई की बात कही थी
हाईकोर्ट भवन को लेकर सरकार की तरफ से भी कार्रवाई तेज की गई है।
5 सितंबर को राजस्थान के चीफ सेक्रेटरी वी. श्रीनिवास ने जोधपुर में हाईकोर्ट के नए भवन का निरीक्षण किया था। उन्होंने डोम क्षेत्र समेत भवन के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे रेस्टोरेशन और रिपेयर वर्क का जायजा लिया और अधिकारियों से काम की प्रगति की जानकारी ली।
चीफ सेक्रेटरी ने भवन की सुरक्षा और निर्माण की गुणवत्ता से जुड़े कामों की समीक्षा की थी। साथ ही, निर्माण में जहां भी कमियां सामने आई हैं, वहां जवाबदेही तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इससे पहले 31 अगस्त को भी उन्होंने भवन के स्ट्रक्चरल रिहैबिलिटेशन और सुरक्षा कार्यों की समीक्षा कर उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए थे।
यानी अब यह मामला सिर्फ निर्माण में सामने आई खामियों की जांच तक सीमित नहीं है। 8 गिरफ्तारियों के बाद पुलिस स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई तेज कर दी गई है।