जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए दुकान मालिक को कानून के मुताबिक नोटिस देना साबित नहीं कर पाने पर उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) की सीलिंग कार्रवाई रद्द कर दी।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी संपत्ति को सील करने का अधिकार होने का मतलब यह नहीं है कि प्राधिकरण कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना कार्रवाई कर सकता है।
जस्टिस नूपुर भाटी ने विमला भनावत की याचिका स्वीकार करते हुए 20 अगस्त 2026 को दुकान सील करने की कार्रवाई रद्द कर दी। कोर्ट ने माना कि UDA यह साबित नहीं कर सका कि दुकान की मालिक को वैध तरीके से नोटिस दिया गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनीष पितलिया और कौशी आर.जे. सुथार ने पैरवी की। राज्य सरकार और प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता विजय पुरोहित पेश हुए।
2003 में रजिस्टर्ड सेल डीड से खरीदी थी दुकान
मामला उदयपुर के यूनिवर्सिटी रोड स्थित दुकान से जुड़ा है। विमला भनावत ने प्लॉट नंबर 1, खसरा नंबर 1057-1058 में स्थित करीब 193.32 वर्गफीट की दुकान 2 जून 2003 को रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए खरीदी थी।
उनका कहना था कि दुकान उनके खरीदने से करीब 10 साल पहले ही बन चुकी थी। दुकान में कमर्शियल बिजली कनेक्शन था। मार्च 2026 में इस परिसर पर अर्बन डेवलपमेंट टैक्स भी लगाया गया और बकाया राशि व पेनल्टी वसूली गई।
उन्होंने दुकान के मौजूदा इस्तेमाल को नियमित कराने और जमीन का उपयोग आवासीय से व्यावसायिक कराने के लिए 28 जुलाई 2026 को UDA में आवेदन किया था। यह आवेदन लंबित था। इसी बीच प्राधिकरण ने 20 अगस्त 2026 को दुकान सील कर दी।
याचिकाकर्ता ने कहा- दुकान सील करने से पहले नहीं मिला वैध नोटिस
विमला ने हाईकोर्ट में दलील दी कि दुकान सील करने से पहले उन्हें कोई वैधानिक नोटिस नहीं दिया गया। उन्हें सीलिंग का आदेश और इससे जुड़े दस्तावेज यानी जब्ती मेमो या निरीक्षण रिपोर्ट की कॉपी भी उपलब्ध नहीं कराए गए।
UDA की ओर से कहा गया कि 23 जुलाई 2026 को राजस्थान नगरीय विकास अधिनियम, 2023 की धारा 32 के तहत नोटिस जारी किया गया था। प्राधिकरण ने यह भी दावा किया कि नोटिस पर मनोहर नाम के व्यक्ति के हस्ताक्षर हैं, जो याचिकाकर्ता के भाई हैं।
पूर्व मालिक के नाम जारी किया गया था नोटिस
हालांकि, हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड में पाया कि नोटिस विमला के नाम नहीं, बल्कि पूर्व मालिक दिवंगत दयावंती आहूजा के नाम जारी किया गया था।
हाईकोर्ट ने पाया कि UDA यह साबित नहीं कर पाया कि नोटिस विमला भनावत को कानून में तय तरीके से दिया गया था। नोटिस लेने वाले व्यक्ति की पहचान, उसकी भूमिका और नोटिस की तामील के हालात भी स्पष्ट रूप से साबित नहीं किए गए।
हाईकोर्ट ने कहा- धारा 32 के नोटिस का अपना महत्व है
हाईकोर्ट ने कहा कि राजस्थान नगरीय विकास अधिनियम, 2023 की धारा 32 के तहत अनधिकृत निर्माण या जमीन के इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले संबंधित मालिक को नोटिस देना जरूरी है।
अगर जमीन का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया जाता है, तो कब्जाधारी को भी नोटिस देना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नोटिस केवल औपचारिकता नहीं है। इससे संबंधित व्यक्ति को प्रस्तावित कार्रवाई की जानकारी मिलती है और उसे अपना पक्ष रखने का मौका मिलता है।
UDA ने दावा किया था कि उसे दुकान के मालिकाना हक में बदलाव की जानकारी याचिका दायर होने के बाद मिली। लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि विमला ने 28 जुलाई 2026 को दिए आवेदन के साथ रजिस्टर्ड सेल डीड की कॉपी और भुगतान से जुड़े दस्तावेज जमा किए थे।
ऐसे में प्राधिकरण का यह कहना सही नहीं था कि उसे दुकान के मालिकाना हक की जानकारी नहीं थी।
‘सील करने का अधिकार है, लेकिन कानून का पालन जरूरी’
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अधिनियम की धारा 36 प्राधिकरण को अनधिकृत विकास या परिसर सील करने का अधिकार देती है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल कानून में तय प्रक्रिया के अनुसार ही किया जा सकता है।
इस मामले में UDA यह साबित नहीं कर पाया कि विमला को वैध तरीके से नोटिस दिया गया था। इसलिए केवल सील करने का अधिकार होने के आधार पर कार्रवाई को सही नहीं ठहराया जा सकता।
‘टैक्स जमा करने और बिजली कनेक्शन से इस्तेमाल वैध नहीं होता’
विमला ने दलील दी थी कि दुकान पर व्यावसायिक बिजली कनेक्शन है और वह नगरीय विकास कर जमा करती रही हैं। दुकान के इस्तेमाल को नियमित कराने और जमीन का उपयोग आवासीय से व्यावसायिक कराने के लिए उनका आवेदन भी UDA के पास लंबित था।
हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि टैक्स जमा करने या व्यावसायिक बिजली कनेक्शन होने से दुकान का व्यावसायिक इस्तेमाल अपने आप वैध नहीं हो जाता। कोर्ट ने इस इस्तेमाल को कानूनी मंजूरी नहीं दी और न ही UDA को भविष्य में कानून के मुताबिक कार्रवाई करने से रोका।
दुकान का निर्माण कब हुआ था और धारा 32 के तहत कार्रवाई करने की 10 साल की समय-सीमा बीत चुकी थी या नहीं, इस पर भी कोर्ट ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया।
हाईकोर्ट ने नोटिस की तामील में कमी के आधार पर कार्रवाई रद्द करते हुए समय-सीमा से जुड़े मुद्दे को खुला छोड़ दिया।
हाईकोर्ट ने दुकान सील करने की कार्रवाई रद्द की
हाईकोर्ट ने विमला भनावत की याचिका मंजूर करते हुए 20 अगस्त 2026 को दुकान सील करने की कार्रवाई रद्द कर दी। यह आदेश विमला को प्रभावित करने वाली कार्रवाई पर लागू होगा।
हाईकोर्ट का फैसला नोटिस देने की कानूनी प्रक्रिया का पालन साबित नहीं होने पर आधारित है। इसका मतलब यह नहीं है कि दुकान के व्यावसायिक इस्तेमाल को स्थायी मंजूरी मिल गई है। UDA कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई कर सकता है।