जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में लंबे समय से लंबित नए न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है।
पिछले करीब तीन महीनों से चल रही चर्चाओं, बैठकों और मंथन के बाद हाईकोर्ट कॉलेजियम में अधिवक्ता कोटे से नियुक्त होने वाले नामों पर सहमति बनने की खबर सामने आ रही है।
सूत्रों के अनुसार, यदि अंतिम स्तर की औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं तो इसी सप्ताह संभावित नाम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को भेजे जा सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कॉलेजियम स्तर पर एक दर्जन से अधिक छोटी-बड़ी बैठकें हुईं।
पिछले दो सप्ताह में यह कवायद और तेज हो गई थी। खासतौर पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश Justice Sandeep Mehta के जयपुर दौरे के बाद नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी आने की चर्चा है।
माना जा रहा है कि इसी दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण स्तरों पर विचार-विमर्श हुआ, जिसके बाद कॉलेजियम के भीतर सहमति का रास्ता साफ हुआ।
फिलहाल राजस्थान हाईकोर्ट कॉलेजियम के तीनों वरिष्ठ सदस्य जोधपुर मुख्यपीठ में सुनवाई कर रहे हैं और इसी बीच संभावित नामों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी जारी बताई जा रही है।
न्यायिक गलियारों में चर्चा है कि कॉलेजियम द्वारा तैयार सूची को बेहद गोपनीय रखा गया है ताकि नाम सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से पहले सार्वजनिक न हो सकें।
सूत्रों का कहना है कि इस बार कॉलेजियम ने गोपनीयता बनाए रखने के लिए विशेष सावधानी बरती है। पिछले वर्षों में कई बार संभावित नाम पहले ही सार्वजनिक हो जाते थे, जिससे विवाद और लॉबिंग की स्थिति बन जाती थी।
इसी कारण इस बार नामों को लेकर बेहद सीमित स्तर पर ही चर्चा रखी गई है। हालांकि तमाम सतर्कता के बावजूद कुछ नाम न्यायिक और अधिवक्ता समुदाय के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू न्यायिक अधिकारियों के कोटे को लेकर माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस बार केवल वरिष्ठता के आधार पर ही निर्णय नहीं लिया जाएगा, बल्कि कार्यक्षमता, न्यायिक दृष्टिकोण, लंबित मामलों के निस्तारण और प्रशासनिक क्षमता जैसे पहलुओं को भी प्राथमिकता दी जा सकती है।
यही कारण है कि कुछ ऐसे नामों पर भी विचार होने की चर्चा है जो पारंपरिक वरिष्ठता क्रम से अलग माने जा रहे हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट में लंबे समय से न्यायाधीशों के रिक्त पदों को लेकर चिंता जताई जाती रही है। लंबित मामलों का बढ़ता बोझ और न्यायिक कार्यों पर बढ़ता दबाव लगातार नए जजों की नियुक्ति की आवश्यकता को रेखांकित करता रहा है।
ऐसे में यदि इस सप्ताह नाम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को भेजे जाते हैं तो इसे न्यायिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और योग्यता आधारित चयन से न्यायपालिका की विश्वसनीयता और मजबूत होगी।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कॉलेजियम किन नामों पर अंतिम मुहर लगाता है और सुप्रीम कोर्ट स्तर पर इस सूची को कितनी तेजी से मंजूरी मिलती है।