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Rajasthan High court: मिशन वात्सल्य में आउटसोर्सिंग से की गई नियुक्तियां अवैध, सिंगल बेंच का आदेश रद्द, मौजूदा कार्मिक सेवा में बने रहेंगे

Rajasthan High Court Declares Outsourcing Appointments Under Mission Vatsalya Invalid; Existing Staff to Continue in Service

जोधपुर, 8 दिसंबर

राजस्थान हाईकोर्ट ने मिशन वात्सल्य के तहत प्रोटेक्शन ऑफिसर और आउटरीच वर्कर की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है.

जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार द्वारा आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से इन पदों पर तैनाती की गई पूरी प्रक्रिया कानूनसम्मत नहीं है.

हाईकोर्ट ने इस तरह की भर्ती पर तत्काल रोक लगाते हुए इसे अवैध करार दिया.

हालाँकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा संविदात्मक कर्मचारी तब तक सेवा में बने रहेंगे, जब तक मिशन वात्सल्य योजना प्रभावी है या फिर नई भर्ती प्रक्रिया को सरकार नीति और नियमों के अनुरूप पूरा नहीं कर लेती.

सरकार को भी राहत

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम बिंदु पर राज्य सरकार को राहत देते हुए कहा कि हाईकोर्ट सरकार को स्थायी पद सृजित करने या नया कैडर बनाने के लिए बाध्य नहीं कर सकता.

इसी आधार पर डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें राज्य को प्रोटेक्शन ऑफिसर और आउटरीच वर्कर के स्वीकृत पद बनाने और नियम अधिसूचित करने के निर्देश दिए थे.

राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं की दलीलें

सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता डॉ. प्रवीण खंडेलवाल ने दलील दी कि मिशन वात्सल्य केंद्र प्रायोजित स्कीम है और इसमें सेवा शर्तें व भर्ती प्रक्रिया केंद्र की गाइडलाइंस से तय होती हैं.

अधिवक्ता ने कहा कि स्कीम-बेस्ड पद होने के कारण स्थायी पद बनाना तर्कसंगत नहीं है, और पीटीपीपी एक्ट के तहत आउटसोर्सिंग कानूनी रूप से गलत है।

वहीं याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि मिशन वात्सल्य की अनुबंध-III चयन प्रक्रिया स्पष्ट है, जिसके तहत जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति द्वारा भर्ती होनी चाहिए.

अधिवक्ता ने कहा कि आउटसोर्सिंग इस प्रक्रिया को निष्प्रभावी बना देती है और बाल संरक्षण जैसे संवेदनशील कार्यों की गुणवत्ता पर असर डालती है.

ये हैं मामला

मिशन वात्सल्य के तहत विभिन्न जिलों में कार्यरत प्रोटेक्शन ऑफिसर और आउटरीच वर्कर 2021 तक संविदात्मक रूप से लगे हुए थे.

कॉन्ट्रैक्ट अवधि समाप्त होने पर इनको हटाने की कार्यवाही शुरू हुई, जिसके खिलाफ कई रिट याचिकाएँ दायर हुईं और अंतरिम आदेशों के चलते ये कर्मचारी सेवा में बने रहे।

इसी दौरान राजस्थान कंस्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट्स रूल्स, 2022 लागू हुए, जिनमें सामान्य संविदात्मक नियुक्तियों पर रोक थी.

इसके बावजूद, 5 फरवरी 2024 को राज्य सरकार ने आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया शुरू की, जिसे याचिकाकर्ताओं ने चुनौती दी। सिंगल बेंच ने 16 जनवरी 2025 को राज्य को इन पदों को स्वीकृत कर नियम बनाने के निर्देश दिए, जिसके विरुद्ध सरकार ने विशेष अपील दायर की।

हाईकोर्ट का आदेश

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि यदि राज्य मिशन वात्सल्य लागू करता है, तो उसे इसकी गाइडलाइंस पूरी तरह अनुपालन में लानी होंगी। आउटसोर्सिंग से की गई भर्ती योजना के विरुद्ध है, इसलिए अमान्य है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि मौजूदा कार्मिक सालाना मूल्यांकन संतोषजनक होने पर योजना की अवधि तक बने रहेंगे और भविष्य की भर्ती केवल जिला चयन समिति द्वारा मिशन वात्सल्य गाइडलाइंस के अनुसार ही होगी।

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