जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे दो विदेशी छात्रों की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा है कि स्टूडेंट वीजा खत्म होने के बाद अवैध रूप से भारत में रह रहे लोगों के मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता, खासकर तब जब उन पर एनडीपीएस कानून के तहत आरोप भी लगे हों।
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे हैं और कई मामलों में उनका नाम अवैध गतिविधियों में भी सामने आ रहा है।
अदालत ने माना कि ऐसी परिस्थितियों में अदालत को जमानत देने में बेहद सावधानी बरतनी होगी।
जस्टिस रवि चिरानिया की अदालत ने यह आदेश तंजानिया और केन्या के दो विदेशी छात्रों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
दोनों छात्र राजस्थान यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे और उनके खिलाफ जयपुर के जवाहर सर्किल थाने में एनडीपीएस कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था।
क्या है पूरा मामला ?
मामला जयपुर के जवाहर सर्किल थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने 11 नवंबर 2025 को एफआईआर दर्ज कर दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तार आरोपियों में तंजानिया निवासी यूडो कोम्बा और केन्या निवासी मार्गरेट काजुंग शामिल हैं। दोनों छात्र राजस्थान यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे और जयपुर के मालवीय नगर इलाके में रह रहे थे।
पुलिस के अनुसार दोनों को होटल ग्रीन विस्टा से गिरफ्तार किया गया, जहां से उनके पास से कोकीन बरामद हुई। मामले में एनडीपीएस कानून, भारतीय न्याय संहिता और विदेशी अधिनियम की धाराएं लगाई गईं।
एफआईआर के अनुसार दोनों आरोपी छात्र वीजा पर भारत आए थे, लेकिन उनकी वीजा अवधि काफी पहले समाप्त हो चुकी थी और उसके बाद भी वे बिना वैध अनुमति भारत में रह रहे थे।
आरोपी विदेशी छात्रों की दलील
आरोपी विदेशी छात्रों की ओर से अदालत में कहा गया कि वे राजस्थान यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं और छात्र वीजा पर भारत आए थे।
उनकी ओर से यह भी कहा गया कि पुलिस द्वारा बरामद की गई कोकीन की मात्रा व्यावसायिक श्रेणी में नहीं आती।
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि कुल बरामद पदार्थ 4.26 ग्राम था, जबकि शुद्ध मात्रा 3.94 ग्राम बताई गई और एनडीपीएस कानून के तहत कोकीन की व्यावसायिक मात्रा 100 ग्राम तय है।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने यह भी कहा कि दोनों आरोपियों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।
केंद्र सरकार ने बेल का क्यों किया विरोध ?
मामले में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भारत व्यास ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि दोनों आरोपी विदेशी नागरिक हैं और लंबे समय से बिना वैध वीजा के भारत में रह रहे थे।
केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि:
- दोनों के वीजा काफी पहले समाप्त हो चुके थे।
- उन्होंने वीजा विस्तार के लिए कोई वैध प्रक्रिया नहीं अपनाई।
- वे अवैध रूप से भारत में रह रहे थे।
सरकार ने यह भी कहा कि जब पुलिस ने उन्हें होटल से गिरफ्तार किया, तब उनके पास से मादक पदार्थ भी बरामद हुआ।
अभियोजन पक्ष ने अदालत से कहा कि आरोपी एक तरफ बिना वैध दस्तावेजों के देश में रह रहे थे। दूसरी तरफ उनके पास से कोकीन मिली। इसलिए उन्हें जमानत देना उचित नहीं होगा।
एफआरआरओ अधिकारी की जानकारी पर अदालत की चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद एफआरआरओ यानी फॉरेन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस, जयपुर के अधिकारी ने भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। अधिकारी ने अदालत को बताया कि राजस्थान में लगभग 15 हजार से अधिक विदेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं।
एफआरआरओ अधिकारी ने यह भी कहा कि ऐसे कई लोग अवैध गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं, जिनमें एनडीपीएस कानून से जुड़े मामले भी शामिल हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस जानकारी को गंभीर चिंता का विषय माना। अदालत ने संकेत दिया कि यह केवल एक जमानत मामला नहीं बल्कि कानून व्यवस्था और निगरानी व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा है।
हाईकोर्ट ने पुराने मामले का भी किया जिक्र
सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने एक पुराने मामले का भी उल्लेख किया जिसमें एक विदेशी नागरिक को एनडीपीएस मामले में जमानत दी गई थी। अदालत ने कहा कि उस मामले में आरोपी जमानत मिलने के बाद ट्रायल कोर्ट में पेश ही नहीं हुआ।
कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने पहले वकील किया, लेकिन बाद में अदालत की कार्यवाही से बचने लगा। बाद में उसके वकील ने भी अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दिया।
हाईकोर्ट ने माना कि ऐसे मामलों में विदेशी नागरिकों के फरार होने की आशंका अधिक रहती है। इसी कारण अदालत को जमानत पर फैसला लेते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने क्या कहा
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्यों को देखते हुए दोनों आरोपियों को जमानत देना उचित नहीं होगा।
अदालत ने माना कि आरोपी वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी भारत में रह रहे थे, उनके पास से मादक पदार्थ बरामद हुआ और राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की संख्या भी गंभीर चिंता का विषय है।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में अदालत नरम रुख नहीं अपना सकती। इसके बाद अदालत ने दोनों विदेशी छात्रों की जमानत याचिका खारिज कर दी।
क्यों अहम है यह फैसला?
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि विदेशी नागरिकों द्वारा बिना वैध वीजा के भारत में रहना और साथ ही NDPS Act के तहत मादक पदार्थ के साथ पकड़ा जाना गंभीर मामला है।
राजस्थान हाईकोर्ट का यह फैसला केवल एनडीपीएस कानून तक सीमित नहीं माना जा रहा। अदालत ने इस मामले के जरिए वीजा नियमों, विदेशी नागरिकों की निगरानी और कानून व्यवस्था से जुड़े बड़े सवालों की ओर भी संकेत किया है।
यह फैसला भविष्य में उन मामलों में महत्वपूर्ण आधार बन सकता है जहां विदेशी नागरिक वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी भारत में रह रहे हों, उन पर गंभीर आपराधिक आरोप हों या उनके फरार होने की आशंका हो।