दो साल से नोटिस तामील कराने के प्रयास नाकाम; हाईकोर्ट ने भारत-अमेरिका की कानूनी सहायता संधि के तहत पीड़िता का ठिकाना पता कर समन तामील कराने को कहा, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के जरिए तलाशा जाएगा वर्तमान ठिकाना; भारतीय दूतावास के माध्यम से नोटिस तामील कराने की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने दुष्कर्म के एक मामले में अहम आदेश देते हुए अमेरिका में रह रही पीड़िता का वर्तमान ठिकाना पता लगाने और उसे अदालत के समक्ष उपस्थित होने के लिए नोटिस/समन तामील कराने के लिए अहम आदेश दिया हैं.
राजस्थान हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार को भारत-अमेरिका के बीच लागू पारस्परिक कानूनी सहायता व्यवस्था के तहत अदालत के नोटिस तामिल कराने की प्रक्रिया अपनाने का आदेश दिया हैं.
राजस्थान हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा विभाग और विदेश मंत्रालय को इस मामले में अमेरिकी समकक्ष के समक्ष अनुरोध भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि पीड़िता के वर्तमान ठिकाने का पता लगाया जा सके।
हाईकोर्ट ने राजस्थान पुलिस को भी आदेश दिया हैं कि वह उपलब्ध रिकॉर्ड में मौजूद उसके पूरे विवरण, यदि उपलब्ध हों तो पासपोर्ट संबंधी जानकारी सहित आवश्यक दस्तावेज 21 दिनों के भीतर गृह मंत्रालय को उपलब्ध कराएगी.
हाईकोर्ट ने मामले को आठ सप्ताह बाद फिर सूचीबद्ध करने के आदेश देते हुए पालना रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया हैं.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला जयपुर पश्चिम के चित्रकूट पुलिस थाने में वर्ष 2022 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।
परिवादी पक्ष की ओर से भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(n) के तहत दुष्कर्म के आरोप लगाए गए थे।
आरोपी चंदर भूषण सिंह ने एफआईआर रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में जानकारी दी गयी कि पीड़िता को 3 सितंबर 2024 को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन बार-बार प्रयासों के बावजूद नोटिस की तामील नहीं हो सकी।
पुलिस की ओर से अदालत में पेश हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सिविल राइट्स), पुलिस मुख्यालय जयपुर, बुगलाल मीणा ने बताया कि पीड़िता के परिजनों से संपर्क किया गया।
उनके अनुसार, पीड़िता वर्तमान में अमेरिका में रह रही है, लेकिन उसका पूरा पता और संपर्क नंबर उपलब्ध नहीं हो सका।
पीड़िता के दो अलग-अलग रुख सामने आने से जांच लंबित
पुलिस जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद 1 जुलाई 2022 को पीड़िता अपने पति के साथ चित्रकूट थाने पहुंची थी और उसने आवेदन देकर कहा था कि उसने गुस्से में एफआईआर दर्ज कराई थी तथा वह आरोपी के खिलाफ आगे कार्रवाई नहीं चाहती।
इस आवेदन के आधार पर तत्कालीन जांच अधिकारी ने नकारात्मक अंतिम रिपोर्ट पेश करने का प्रस्ताव तैयार किया था।
हालांकि, 24 नवंबर 2022 को जब एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आवेदन की पुष्टि के लिए पीड़िता से मोबाइल फोन पर संपर्क किया, तो उसने कथित तौर पर बताया कि आवेदन दबाव में दिया गया था और वह आरोपी के खिलाफ कार्रवाई जारी रखना चाहती है। मामले की जांच दोबारा शुरू की गई
पुलिस ने अदालत को बताया कि पीड़िता की अनुपस्थिति में यह सत्यापित नहीं किया जा सका कि आवेदन किन परिस्थितियों में दिया गया था। इसी कारण जांच अब तक लंबित है।
पीड़िता को बताया मामले का अहम गवाह
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में पीड़िता को मामले का प्रमुख गवाह बताया और कहा कि उसकी भागीदारी के बिना जांच प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ सकती।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि कि न्यायपूर्ण सुनवाई के लिए पीड़िता को नोटिस या समन की प्रभावी तामील आवश्यक है।
अदालत ने इस स्थिति से निपटने के लिए विदेश में रह रहे व्यक्ति को समन भेजने और विदेश से साक्ष्य प्राप्त करने से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विचार किया।
आदेश में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 110 और 112 तथा भारत-अमेरिका म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) का हवाला दिया गया.
गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को भेजा जाएगा अनुरोध
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि पीड़िता का वर्तमान ठिकाना पता करने के लिए राजस्थान पुलिस द्वारा गृह मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा प्रभाग और विदेश मंत्रालय को अनुरोध भेजा जाए।
ठिकाने की पुष्टि होने के बाद, लागू कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास के माध्यम से नोटिस/समन तामील कराया जाएगा।
जांच अधिकारी को पीड़िता से संबंधित रिकॉर्ड में उपलब्ध पूरा विवरण, पासपोर्ट की जानकारी यदि उपलब्ध हो, समन की दो प्रतियां, निर्धारित अनुरोध प्रपत्र, चेतावनी और दस्तावेजों का सारांश 21 दिनों के भीतर गृह मंत्रालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को भी आवश्यक दस्तावेजों के साथ अनुरोध पत्र गृह मंत्रालय भेजने को कहा गया है, ताकि उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सक्षम प्राधिकारी तक पहुंचाया जा सके।
आठ सप्ताह बाद होगी अनुपालन की समीक्षा
जस्टिस अनूप कुमार ढंड की पीठ ने मामले को आठ सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है, ताकि यह देखा जा सके कि पीड़िता का वर्तमान पता लगाने और उसे नोटिस तामील कराने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि तब तक यदि कोई अंतरिम आदेश प्रभावी है, तो वह जारी रहेगा।