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बैंक की गलती का खामियाजा किसान नहीं भुगतेंगे: राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 6 साल बाद नागौर के किसानों को मिलेगी फसल बीमा राशि

Rajasthan High Court Directs Cooperative Bank to Pay Crop Insurance Claims to Affected Farmers

नागौर केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड को हाईकोर्ट की फटकार, किसानों के खिलाफ दायर याचिकाएँ खारिज, बीमा क्लेम राशि का ब्याज सहित भुगतान का आदेश

जयपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के बीमा क्लेम को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों के किए गए आवेदन में बैंक की तकनीकी गलती या प्रशासन के अधिकारियों की प्रशासनिक त्रुटि के नुकसान का बोझ किसानों पर नहीं डाला जा सकता।

हाईकोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि याचिकाकर्ता किसान वर्ष 2020 की खरीफ फसल के बीमा दावों के संबंध में तीसरी बार कोर्ट की शरण में आए।

पूर्व में दिए आदेशों में हाई पावर कमेटी के स्पष्ट निर्णय दिए जाने के बावजूद उन्हें फसल हानि का मुआवजा प्राप्त नहीं हुआ है।

बैंक की गलती, हाईकोर्ट के बार-बार आदेश, फिर भी 6 साल में नहीं मिला किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का क्लेम

हाईकोर्ट ने नागौर केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड शासन को फटकार लगाते हुए कहा कि किसान छोटे और सीमांत किसान हैं, जिनकी आजीविका का एकमात्र स्रोत कृषि है। किसानों की आजीविका की सुरक्षा के उद्देश्य से भारत सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की है।

कोर्ट ने कहा कि इसके बावजूद सहकारी बैंक ने बिना किसी गलती के किसानों को इस योजना के लाभ से वंचित रखा। बल्कि किसानों को अपने वैध दावे प्राप्त करने के लिए तीन बार अदालत में मुकदमेबाजी की पीड़ा सहनी पड़ी।

ब्याज सहित बीमा राशि का भुगतान करें

हाईकोर्ट ने यह आदेश नागौर केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड की ओर से हाई पावर कमेटी के 9 अक्टूबर 2024 और 3 जनवरी 2025 के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बिना आधार के बताते हुए खारिज करने का फैसला दिया है।

हाईकोर्ट ने किसानों की याचिकाएँ मंजूर करते हुए नागौर केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह कमेटी के आदेश के अनुसार किसानों को देय बीमा राशि का ब्याज सहित 8 सप्ताह में भुगतान करे।

किसानों के संघर्ष के 6 साल

इस मामले की शुरुआत वर्ष 2020 की खरीफ फसल से हुई, जब नागौर जिले के कमेडिया क्षेत्र के अनेक किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसल का बीमा कराया था।

किसानों ने आवश्यक दस्तावेज सहकारी ग्राम सेवा सहकारी समिति के माध्यम से बैंक को दिए और बीमा प्रीमियम भी समय पर जमा कराया।

लेकिन उसी वर्ष कम वर्षा के कारण क्षेत्र में फसल को भारी नुकसान हुआ और किसानों ने बीमा दावा पेश किया।

कमेडिया” और “खेरात” में उलझा क्लेम

समस्या तब सामने आई जब राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP) पर पटवार क्षेत्र का नाम “कमेडिया” की जगह “खेरात” दर्ज पाया गया।

इस तकनीकी गलती के कारण किसानों के दावे प्रोसेस ही नहीं हो सके और हजारों किसानों को मुआवजा मिलने में वर्षों की देरी हो गई।

बीमा राशि नहीं मिलने पर किसानों ने संबंधित बैंक और अधिकारियों से कई बार संपर्क किया।

वर्ष 2021 में किसानों ने बैंक को प्रतिनिधित्व देकर जानकारी सुधरवाने और बीमा भुगतान कराने की मांग की। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

बैंक की गलती, फिर भी…

राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले चरण में संबंधित अधिकारियों को किसानों के प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने का आदेश दिया।

कोर्ट के पहले आदेश के बाद राहत नहीं मिलने पर किसानों ने दोबारा याचिका दायर की, जिसके बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा गठित हाई लेवल कमेटी को मामले की जांच और निर्णय का आदेश दिया।

हाई लेवल कमेटी ने सुनवाई के बाद पाया कि पोर्टल पर गलत एंट्री बैंक अधिकारियों की त्रुटि के कारण हुई थी और किसानों को इसका नुकसान नहीं उठाना चाहिए।

कमेटी ने अपने 9 अक्टूबर 2024 के आदेश में बैंक को किसानों का बीमा भुगतान करने के आदेश दिए और बाद में 3 जनवरी 2025 को अपने आदेश को पुनः दोहराया।

बैंक का पक्ष

नागौर केंद्रीय सहकारी बैंक ने अदालत में दलील दी कि वह केवल एक मध्यस्थ संस्था है और उसका काम बीमा प्रीमियम जमा कराना तथा पोर्टल पर डेटा अपलोड करना है।

बैंक ने कहा कि पात्रता निर्धारण, नुकसान का आकलन और भुगतान की जिम्मेदारी बीमा कंपनी या अन्य एजेंसियों की होती है, इसलिए बैंक को भुगतान के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

बैंक ने यह भी तर्क दिया कि हाई लेवल कमेटी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित किया है और उसे रद्द किया जाना चाहिए।

किसानों की दलील

किसानों की ओर से कहा गया कि उन्होंने योजना के सभी नियमों का पालन किया और दस्तावेज समय पर जमा किए।

यदि पोर्टल पर गलत जानकारी दर्ज हुई है तो वह पूरी तरह बैंक की गलती है। किसानों को किसी तीसरे पक्ष की प्रशासनिक त्रुटि का दंड नहीं दिया जा सकता।

किसानों ने यह भी कहा कि फसल बीमा योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदा या फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करना है। यदि तकनीकी त्रुटियों के कारण ही भुगतान रोक दिया जाए तो योजना का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।

हाईकोर्ट का फैसला

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने कहा कि किसानों ने सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया था। पोर्टल पर गलत पटवार क्षेत्र दर्ज होना बैंक अधिकारियों की त्रुटि थी और किसानों को उस गलती के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, जिस पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था।

एकलपीठ ने कहा कि हाई लेवल कमेटी ने सभी पक्षों को सुनने के बाद उचित आदेश पारित किया था।

अदालत ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचना चाहिए और प्रशासनिक या तकनीकी लापरवाही के कारण उन्हें वंचित नहीं किया जा सकता।

अदालत का अंतिम आदेश

हाईकोर्ट ने मामले का निस्तारण करते हुए हाई लेवल कमेटी के आदेशों को सही माना और यह स्पष्ट किया कि बैंक द्वारा की गई त्रुटि के कारण किसानों को नुकसान नहीं उठाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने नागौर केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड को आदेश दिया कि वह अगले 8 सप्ताह में नियमानुसार ब्याज सहित किसानों को बीमा दावा राशि का भुगतान करे।

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