हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, बार काउंसिल और सभी बार एसोसिएशनों को युवा अधिवक्ताओं के लिए योजना बनाने का दिया आदेश,
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला आदेश पारित करते हुए न मामले में 450 दिन की देरी को सशर्त माफ किया, बल्कि पूरे राज्य के युवा अधिवक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए।
हाईकोर्ट युवा और प्रथम-पीढ़ी के अधिवक्ताओं के हित में आदेश जारी करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर को “जूनियर एडवोकेट्स वेलफेयर फंड फॉर परचेजिंग लॉ बुक्स” के नाम से अलग बैंक खाता खोलने और उसकी अनुपालना रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए हैं.
न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढांड ने अपने विस्तृत आदेश में स्पष्ट कहा कि न्याय प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए युवा अधिवक्ताओं को आर्थिक और बुनियादी संसाधनों की सहायता देना आवश्यक है।
मोटर दुर्घटना से जुड़ा मामला लेकिन
राजस्थान हाईकोर्ट में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण, दौसा के फैसले के खिलाफ मीना देवी व अन्य परिजनों ने अपील दायर की.
मामले में अपीलकर्ताओं ने मोटर दुर्घटना मुआवजे की राशि बढ़ाने के लिए अपील दायर की थी, लेकिन अपील दाखिल करने में 450 दिन की देरी हो गई।
अपीलकर्ताओं ने अदालत को बताया कि वे अपने वकील से संपर्क नहीं कर पाए, जिसके कारण उन्हें ट्रिब्यूनल के आदेश की जानकारी समय पर नहीं मिली।
हाईकोर्ट ने माना कि देरी का कारण पूरी तरह संतोषजनक नहीं है, फिर भी न्याय के हित में महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों को देखते हुए देरी को सशर्त माफ कर किया।
हाईकोर्ट ने 11,000 रुपये की कोस्ट लगाते हुए यह राशि “जूनियर एडवोकेट्स वेलफेयर फंड” में जमा कराने का आदेश दिया।
याचिका से इतर, युवा अधिवक्ताओं का दर्द
राजस्थान हाईकोर्ट में दायर कि गयी अपील में मामला दुर्घटना दावे से जुड़ा था लेकिन हाईकोर्ट ने कोस्ट की राशि को युवा अधिवक्ताओं के हितों में देने और उसके लिए व्यवस्था बनाने के आदेश देते हुए इसे विस्तृत रूप दिया.
हाईकोर्ट ने कहा कि युवा अधिवक्ता न्याय प्रणाली की रीढ़ हैं, लेकिन शुरुआती वर्षों में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है—कम आय, संसाधनों की कमी, बैठने की जगह का अभाव और मार्गदर्शन की कमी।
हाईकोर्ट ने कहा कि युवा वकील लंबे समय तक मेहनत करते हैं, केस तैयार करते हैं, रिसर्च करते हैं, लेकिन आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई प्रतिभाशाली वकील पेशा छोड़ देते हैं। इसलिए शुरुआती वर्षों में सहायता देना न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में जरूरी कदम है।
हाईकोर्ट के बिंदूवार निर्देश
हाईकोर्ट ने युवाओं के हित में कई बिंदूवार आदेश दिए जिसमें
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को “Junior Advocates Welfare Fund for Purchasing Law Books” नाम से अलग बैंक खाता खोलने आदेश दिया.
ऐसे अधिवक्ताओं को, जिनकी आयु 28 वर्ष से कम है और जिनकी प्रैक्टिस 1 से 5 वर्ष के बीच है, उन्हें कानून की किताबें खरीदने के लिए 5,000 रुपये की एकमुश्त सहायता देने का आदेश दिया गया।
इसके साथ ही राज्य सरकार, बार काउंसिल ऑफ राजस्थान तथा सभी जिला और तालुका स्तर की बार एसोसिएशनों को “Rajasthan Advocates (Aid to Purchase Law Books) Scheme” बनाने का आदेश दिया गया.
सहायता राशि का उपयोग केवल कानून की किताबें खरीदने के लिए ही किया जाएगा, और रसीद जमा नहीं करने पर राशि ब्याज सहित वापस ली जा सकेगी।
हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशन को खाते के संचालन और लाभार्थियों की सूची तैयार कर अदालत में अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया.
वरिष्ठ अधिवक्ता करे सहयोग
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में वरिष्ठ अधिवक्ताओं से भी अनुरोध किया हैं कि वे स्वेच्छा से इस फंड में योगदान दे ताकि नई पीढ़ी के वकीलों को मजबूती मिल सके।
हर वरिष्ठ वकील कभी न कभी जूनियर रहा है और यदि शुरुआती वर्षों में सहयोग दिया जाए तो पूरी न्याय व्यवस्था मजबूत हो सकती है। युवा अधिवक्ताओं को सम्मान, संसाधन और मार्गदर्शन देना न्याय व्यवस्था की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करता है।