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परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी करने वाले जोड़े की सुरक्षा याचिका पर हाईकोर्ट में उठा रोस्टर का सवाल, जस्टिस समीर जैन ने मामला मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने के दिए निर्देश

Rajasthan High Court Directs Protection Plea by Love-Married Couple to Be Placed Before Chief Justice Over Roster Issue

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में सुनवाई के दौरान उठा कानूनी प्रश्न; एकलपीठ ने कहा-मामले की सुनवाई के लिए उचित रोस्टर नहीं, मुख्य न्यायाधीश करेंगे प्रशासनिक स्तर पर विचार

जयपुर। परिवार की मर्जी के खिलाफ विवाह करने वाले एक बालिग जोड़े ने राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में याचिका दायर कर सुरक्षा की मांग की।

याचिका की सुनवाई के दौरान यह कानूनी प्रश्न सामने आया कि ऐसे मामलों की सुनवाई किस एकलपीठ के रोस्टर के अंतर्गत की जानी चाहिए।

इस पर Justice समीर जैन ने याचिका और अपने आदेश की प्रति हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने के निर्देश दिए, ताकि मामले पर प्रशासनिक स्तर पर विचार किया जा सके।

यह याचिका राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में एसबी सिविल रिट याचिकाके तहत दायर की गई थी। डिवीजन बेंच के पूर्व निर्देशों के अनुसार इसे Justice समीर जैन की एकलपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था।

एकलपीठ के समक्ष सुनवाई को लेकर उठा कानूनी सवाल

सुनवाई के दौरान Justice समीर जैन ने कहा कि उनकी पीठ के पास इस मामले की सुनवाई के लिए उपयुक्त रोस्टर नहीं है।

उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट के नियम 315(1)(h) का भी उल्लेख किया, जो आपराधिक मामलों में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी करने संबंधी आवेदनों से जुड़ा है।

संविधान का अनुच्छेद 226 हाईकोर्ट को मौलिक अधिकारों और अन्य कानूनी अधिकारों के संरक्षण के लिए रिट जारी करने की शक्ति प्रदान करता है।

इस मामले में मुख्य प्रश्न यह था कि परिवार की इच्छा के विरुद्ध विवाह करने वाले बालिग जोड़े की सुरक्षा से संबंधित याचिका की सुनवाई किस पीठ के निर्धारित रोस्टर के तहत होनी चाहिए।

एकलपीठ ने इस प्रश्न पर स्वयं अंतिम निर्णय लेने के बजाय मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया, ताकि सुनवाई के लिए उपयुक्त पीठ और रोस्टर के संबंध में प्रशासनिक स्तर पर विचार किया जा सके।

‘जिया’ मामले में खंडपीठ के आदेश का भी उल्लेख

Justice समीर जैन ने जिया एवं अन्य बनाम राजस्थान सरकार एवं अन्य मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा पारित आदेश का भी उल्लेख किया।

उक्त आदेश में कहा गया था कि संविधान में ‘क्रिमिनल रिट याचिका’ की कोई अलग अवधारणा नहीं है। इसी आदेश के संदर्भ में वर्तमान याचिका को Justice समीर जैन की एकलपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था।

इस पृष्ठभूमि में सुनवाई के दौरान यह प्रश्न महत्वपूर्ण हो गया कि ऐसी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए लागू नियमों और निर्धारित रोस्टर की स्थिति क्या है।

मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाएगा मामला

Justice समीर जैन ने निर्देश दिया कि याचिका के साथ उनके आदेश की प्रति भी राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत की जाए, ताकि इस कानूनी और प्रशासनिक प्रश्न पर विचार किया जा सके।

फिलहाल न्यायालय ने जोड़े को सुरक्षा प्रदान करने के अनुरोध पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। न ही याचिका खारिज की गई है। वर्तमान आदेश का दायरा मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने और सुनवाई के लिए उपयुक्त रोस्टर पर विचार करने तक सीमित है।

परिवार की मर्जी के खिलाफ दोनों ने की थी शादी

रोहित अमरसरिया और अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता बालिग हैं और उन्होंने अपने परिवारों की इच्छा के खिलाफ शादी की है। याचिका में उनकी जान की सुरक्षा के लिए कोर्ट से जरूरी निर्देश देने की मांग की गई थी।

यह याचिका राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच में एसबी सिविल रिट पिटीशन के तहत दायर की गई थी। डिवीजन बेंच के पहले के निर्देशों के तहत इसे जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ के सामने सूचीबद्ध किया गया था।

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