जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में शनिवार को होने वाली फुल कोर्ट की बैठक प्रदेश के विधिक इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक मानी जा रही है।
करीब चार वर्ष के लंबे इंतजार के बाद पहली बार सीनियर एडवोकेट (Designation) के लिए अंतिम फैसला होने की संभावना है।
यदि फुल कोर्ट सहमति देती है तो राजस्थान हाईकोर्ट को वर्षों बाद नए डेज़िग्नेटेड सीनियर एडवोकेट मिल सकते हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में जोधपुर मुख्यपीठ और जयपुर पीठ के सभी न्यायाधीश शामिल होंगे।
यद्यपि बैठक का आयोजन जयपुर में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन के चलते किया जा रहा है, लेकिन कानूनी गलियारों में सबसे अधिक चर्चा सीनियर एडवोकेट के संभावित फैसले की है।
चार साल से नहीं हुआ कोई डेज़िग्नेशन
राजस्थान हाईकोर्ट में अंतिम बार 25 जनवरी 2022 को 26 अधिवक्ताओं को सीनियर एडवोकेट नामित किए गए थे।
इसके बाद से यह प्रक्रिया पूरी तरह रुकी रही।
राजस्थान हाईकोर्ट ने Designation of Senior Advocates Rules, 2026 के तहत 27 फरवरी 2026 को जारी आधिकारिक अधिसूचना के जरिए प्रदेशभर के अनुभवी और योग्य अधिवक्ताओं से आवेदन आमंत्रित किए थे।
इसके लिए आवेदन जमा करने की अंतिम समयसीमा 31 मार्च शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई थी, जिसमें 192 अधिवक्ताओं ने आवेदन किया।
स्क्रूटनी पूरी, अब फुल कोर्ट का अंतिम फैसला
हाईकोर्ट की स्क्रूटनी समिति ने पिछले कई महीनों में आवेदनों की गहन जांच की।
अधिवक्ताओं के अनुभव, रिपोर्टेबल जजमेंट, प्रो बोनो सेवाओं, विधिक योगदान और अन्य मानकों का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।
स्क्रूटनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब समिति की सिफारिशें फुल कोर्ट के समक्ष रखी जाएंगी, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
35 से 55 अधिवक्ताओं को मिल सकता है सम्मान
लॉ एंड लीगल्स को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बार करीब 35 से 55 अधिवक्ताओं को सीनियर एडवोकेट का पदनाम दिए जाने की संभावना है।
हालांकि अंतिम संख्या और नामों पर फैसला केवल फुल कोर्ट की स्वीकृति के बाद ही माना जाएगा।
यदि यह प्रस्ताव पारित होता है तो राजस्थान हाईकोर्ट में चार वर्षों बाद एक साथ बड़ी संख्या में नए सीनियर एडवोकेट नामित होंगे।
192 आवेदनों में 13 महिला अधिवक्ता भी शामिल
इस बार की प्रक्रिया में 192 अधिवक्ताओं ने आवेदन किया, जिनमें 13 महिला अधिवक्ता भी शामिल हैं।
पिछले वर्षों की तुलना में महिला अधिवक्ताओं की भागीदारी बढ़ी है और उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार महिला अधिवक्ताओं को भी सीनियर एडवोकेट का पदनाम मिल सकता है।
नई अंक-आधारित प्रणाली से हुआ मूल्यांकन
इस बार चयन प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पारदर्शी अंक-आधारित प्रणाली के तहत हुई।
अधिवक्ताओं का मूल्यांकन कानूनी दक्षता, महत्वपूर्ण निर्णयों में भूमिका, प्रो बोनो कार्य, अनुभव और साक्षात्कार सहित विभिन्न मानकों पर किया गया।
अंतिम निर्णय फुल कोर्ट द्वारा लिया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर मतदान भी कराया जा सकता है।
प्रतिष्ठा और पहचान का प्रतीक
सीनियर एडवोकेट का दर्जा न्यायिक क्षेत्र में बेहद सम्मानजनक माना जाता है।
यह न केवल पेशेवर उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि अधिवक्ता की कानूनी समझ, अनुभव और न्यायपालिका में योगदान को भी दर्शाता है।
यही कारण है कि इस बार बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिवक्ता इस दौड़ में शामिल हुए हैं।
सीनियर एडवोकेट के विशेषाधिकार
सीनियर एडवोकेट बनने के बाद अधिवक्ता को कई विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, जो उन्हें अन्य अधिवक्ताओं से अलग पहचान देते हैं।
उच्च फीस – सीनियर एडवोकेट की फीस सामान्य अधिवक्ताओं से अधिक होती है और वे प्रति सुनवाई शुल्क लेते हैं।
विशेष वेशभूषा – उनकी यूनिफॉर्म अलग होती है, जो उनके वरिष्ठ दर्जे को दर्शाती है।
हालांकि विशेषाधिकारों के साथ कुछ सीमाएँ भी होती हैं—
वे सीधे केस फाइल नहीं कर सकते। उन्हें किसी जूनियर या एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के माध्यम से ही पेश होना होता है।
वे सीधे क्लाइंट से संपर्क नहीं कर सकते। यह व्यवस्था इस उद्देश्य से बनाई गई है कि सीनियर एडवोकेट केवल जटिल कानूनी मुद्दों और रणनीति पर ध्यान केंद्रित करें।
फुल कोर्ट की भूमिका: अंतिम निर्णय
सीनियर एडवोकेट के चयन में अंतिम निर्णय फुल कोर्ट द्वारा लिया जाता है।
स्थायी समिति द्वारा चयनित नामों को फुल कोर्ट के सामने रखा जाता है, जहां सभी न्यायाधीश मिलकर निर्णय लेते हैं।
यदि सहमति नहीं बनती है, तो मतदान के जरिए फैसला किया जाता है।
गुप्त मतदान और पारदर्शिता
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि गुप्त मतदान केवल विशेष परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए और इसके कारण भी दर्ज किए जाने चाहिए।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समिति द्वारा किए गए मूल्यांकन का सम्मान किया जाए और निर्णय निष्पक्ष हो।
क्या जज सिफारिश कर सकते हैं?
एक महत्वपूर्ण सुधार यह किया गया है कि अब कोई भी न्यायाधीश किसी अधिवक्ता के नाम की सिफारिश नहीं करेगा।
यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि प्रक्रिया में पक्षपात की संभावना समाप्त हो और चयन पूरी तरह योग्यता-आधारित हो।
अनुभव की शर्त
सीनियर एडवोकेट बनने के लिए न्यूनतम 10 वर्षों का अनुभव आवश्यक है।
हालांकि, असाधारण प्रतिभा वाले युवा अधिवक्ताओं को भी अवसर दिया जा सकता है, विशेषकर यदि वे 45 वर्ष से कम आयु के हों।
विविधता और लैंगिक समानता की आवश्यकता
इस बार राजस्थान हाईकोर्ट में 13 महिला अधिवक्ताओं द्वारा आवेदन किया जाना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह संख्या अभी भी कम है।
न्यायपालिका ने स्वयं इस बात को स्वीकार किया है कि अधिक महिला वकीलों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए, पहली पीढ़ी के वकीलों को अवसर दिया जाना चाहिए।
विविध पृष्ठभूमि से आने वाले अधिवक्ताओं को शामिल किया जाना चाहिए, ट्राइब्यूनल विशेषज्ञों को भी मौका दिया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो अधिवक्ता NCLT, TDSAT जैसे ट्राइब्यूनलों में विशेषज्ञता रखते हैं, उन्हें केवल इस आधार पर वंचित नहीं किया जाना चाहिए कि उनकी सुप्रीम कोर्ट में उपस्थिति कम है।
पूरे राजस्थान की नजरें फुल कोर्ट पर
राजस्थान के विधिक समुदाय की निगाहें अब शनिवार को होने वाली फुल कोर्ट बैठक पर टिकी हैं।
यदि बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो वर्षों से सीनियर एडवोकेट बनने का इंतजार कर रहे कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं का सपना पूरा होगा।