एसडीएम को थप्पड़ मारने के मामले में नरेश मीणा को हाईकोर्ट से फिर जमानत मिल गई है। इससे पहले एससी-एसटी कोर्ट ने शर्तों के उल्लंघन का हवाला देकर उनकी जमानत रद्द कर दी थी।
जयपुर। एसडीएम थप्पड़ कांड से जुड़े मामले में नरेश मीणा को राजस्थान हाईकोर्ट से एक बार फिर जमानत मिल गई है।
टोंक के पुलिस थाना नगरफोर्ट में दर्ज एफआईआर के मामले में हाईकोर्ट ने नरेश मीणा की तीसरी जमानत याचिका मंजूर कर ली है।
इस मामले में टोंक स्थित अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति विशेष न्यायालय ने 11 अगस्त 2026 को उनकी मिली हुई नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
मामले में हाईकोर्ट के जस्टिस अनिल कुमार उपमन की अदालत में तीसरी जमानत याचिका पर सुनवाई 15 सितंबर को पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था. मंगलवार को इस मामले में फैसला सुनाए जाने के बाद देर रात इस मामले से जुड़ा फैसला सामने आया.
इसके बाद अदालत ने जमानत मंजूर करते हुए अपना आदेश जारी किया।
अदालत ने दी सशर्त जमानत
जस्टिस अनिल उपमन की अदालत ने नरेश मीणा को सशर्त जमानत दी है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नरेश मीणा जमानत के दौरान संबंधित थाने में हर महीने के पहले सप्ताह में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
इसके साथ ही जमानत के दौरान वे किसी अन्य अपराध में शामिल नहीं होंगे। कोर्ट ने यह भी शर्त रखी कि जमानत पर रिहा होने के बाद वे समाज में अपनी छवि का महिमामंडन नहीं करेंगे।
पहले भी मिल चुकी थी जमानत
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, नरेश मीणा की पहली जमानत याचिका 19 मार्च 2025 को वापस लेने की अनुमति के साथ खारिज हुई थी और परिस्थितियों में बदलाव होने पर दोबारा जमानत मांगने की स्वतंत्रता दी गई थी।
इसके बाद दूसरी जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने 30 मई 2025 को जमानत मंजूर की थी। हालांकि, बाद में जमानत की शर्तों के उल्लंघन के आधार पर विशेष लोक अभियोजक की ओर से जमानत रद्द करने की अर्जी पेश की गई, जिसे ट्रायल कोर्ट ने 13 जुलाई 2026 को स्वीकार कर पहले मिली जमानत रद्द कर दी थी।
इसके बाद नरेश मीणा ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष नियमित जमानत के लिए आवेदन किया, लेकिन 11 अगस्त 2026 को विशेष न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में तीसरी जमानत याचिका दायर की।
वकीलों का दावा, मामले राजनीति से प्रेरित
नरेश मीणा की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता रजनीश गुप्ता और फतेह राम मीणा ने बताया कि नरेश मीणा के खिलाफ दर्ज ज्यादातर मामले राजनीति से प्रेरित हैं।
उनके मुताबिक झालावाड़ मामले में भी हाईकोर्ट ने जमानत देते समय प्रथमदृष्टया इसे राजनीति से प्रेरित मामला माना था। यह वकीलों का दावा है, जो कोर्ट के पहले के आदेश पर आधारित बताया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने किन तथ्यों पर दी जमानत?
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि पहले जमानत रद्द किए जाने का मुख्य आधार उस अवधि में दर्ज हुए तीन अन्य मामलों को माना गया था।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि इनमें से दो मामलों में नरेश मीणा की कोई विशिष्ट भूमिका सामने नहीं आई है। तीसरे मामले में भी उन्होंने जमानत प्राप्त कर रखी है और संबंधित पुनरीक्षण याचिका में आगे की कार्यवाही पर रोक है।
राज्य की ओर से इन दलीलों का विरोध किया गया, हालांकि सुनवाई के दौरान यह स्वीकार किया गया कि दो मामलों में अब तक नरेश मीणा की संलिप्तता नहीं पाई गई है।
हाईकोर्ट ने आदेश में दर्ज किया कि वर्तमान मामले में जमानत के दौरान उनके खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर के संबंध में समन्वय पीठ ने भी मामले को प्रथम दृष्टया राजनीतिक कारणों से दर्ज हुआ माना है।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि अन्य दो मामलों में उनकी भूमिका सामने नहीं आई है और वर्तमान मामले में आगे की कार्यवाही पर भी समन्वय पीठ द्वारा रोक लगाई गई है।
इन परिस्थितियों और पूरे मामले के तथ्यों को देखते हुए अदालत ने नरेश मीणा को एक और अवसर देते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहाई
हाईकोर्ट ने नरेश मीणा को 1 लाख रुपये के निजी मुचलके तथा 50-50 हजार रुपये की दो जमानतों के आधार पर रिहा करने का निर्देश दिया है।
नरेश मीणा को ट्रायल कोर्ट और मामले के स्थानांतरित होने पर संबंधित अदालत के समक्ष सुनवाई की सभी तारीखों पर उपस्थित होना होगा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत अवधि के दौरान नरेश मीणा किसी अन्य अपराध में शामिल नहीं होंगे और प्रत्येक माह के पहले सप्ताह में संबंधित पुलिस थाने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
जमानत की शर्तों के उल्लंघन की सूचना मिलने पर ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत रद्द की जा सकती है।
विधानसभा उपचुनाव में हुई थी थप्पड़ मारने की घटना
यह पूरा विवाद देवली-उनियारा उपचुनाव 2024 से जुड़ा है।
13 नवंबर 2024 को टोंक के समरावता गांव में निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ने एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था। इस घटना के बाद समरावता सहित कई इलाकों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई थीं।
