जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश के जरिए जेल में बंद बी.ए. तृतीय सेमेस्टर में अध्ययन एक आरोपी छात्र साहिद को अंतरिम जमानत दी हैं.
राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने आरोपी छात्र को अपनी विश्वविद्यालय परीक्षाओं में शामिल होने के लिए 45 दिनों की अंतरिम जमानत प्रदान की है।
हाईकोर्ट ने माना कि शिक्षा का अधिकार और छात्र का शैक्षणिक भविष्य भी महत्वपूर्ण है, इसलिए सीमित अवधि के लिए राहत दी जानी चाहिए।
जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने यह आदेश साहिद पुत्र जाहिर द्वारा दायर अंतरिम जमानत आवेदन पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
साहिद जिला डीग की जेल में न्यायिक अभिरक्षा में बंद है और उसके खिलाफ थाना कैथवाड़ा में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं तथा आईटी एक्ट की धारा 66-डी के तहत मामला दर्ज है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि साहिद जनक नेमसिंह परमार महाविद्यालय, सीकरी (डीग) में बी.ए. तृतीय सेमेस्टर का छात्र है।
उसकी परीक्षाएं 18 जून 2026 से शुरू होकर 1 जुलाई 2026 तक चलनी हैं।
अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि छात्र ने पूर्व सेमेस्टर में अच्छे अंक प्राप्त किए थे और वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहता है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक ने अंतरिम जमानत का विरोध किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और इस तथ्य को ध्यान में रखा कि याचिकाकर्ता एक छात्र है।
सशर्त दी जमानत
हाईकोर्ट ने कहा कि उसे परीक्षाओं में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए और इसी आधार पर 16 जून 2026 से 2 जुलाई 2026 तक 45 दिनों की अंतरिम जमानत प्रदान दी हैं.
हाईकोर्ट ने जमानत के लिए कुछ शर्तें भी निर्धारित की हैं।
आदेश के अनुसार, याचिकाकर्ता को 2 जुलाई 2026 को संबंधित जेल अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। इसके अलावा उसे ट्रायल कोर्ट के समक्ष 50 हजार रुपये की राशि जमा करनी होगी तथा 1 लाख रुपये का व्यक्तिगत मुचलका और 50-50 हजार रुपये के दो सक्षम जमानती प्रस्तुत करने होंगे।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दो जमानतदारों में से एक याचिकाकर्ता का निकट संबंधी होना चाहिए।