सोडाला से गुर्जर की थड़ी तक मास्टर प्लान के अनुसार मुख्य सड़क की चौड़ाई 100 फीट करने का अनुरोध
जयपुर। न्यू सांगानेर रोड पर बढ़ते अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के मुद्दे को गंभीर मानते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार सहित संबंधित एजेंसियों से जवाब तलब किया है।
सुरेश चंद रावत व अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, जयपुर नगर निगम (हेरिटेज) और जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता डॉ. गीतेश जोशी और वागीश शर्मा ने न्यायालय को बताया कि न्यू सांगानेर रोड पर लगातार बढ़ते अतिक्रमण, अवैध निर्माण और सड़क किनारे की अवैध पार्किंग के कारण यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
मास्टर प्लान निर्धारित 100 फीट
अधिवक्ता ने कहा कि मास्टर प्लान के अनुसार सोडाला से गुर्जर की थड़ी तक मुख्य सड़क की चौड़ाई लगभग 100 फीट निर्धारित है, जबकि विश्वकर्मा नगर क्षेत्र की आंतरिक सड़कें 30 फीट चौड़ी दर्शाई गई हैं।
अधिवक्ता ने कहा कि इसके विपरीत वर्तमान स्थिति में अवैध पार्किंग और अतिक्रमण के कारण कई स्थानों पर सड़क की प्रभावी चौड़ाई घटकर लगभग 20 फीट रह गई है, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
याचिका में यह भी कहा गया कि कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान, दुकानदार और निजी वाहन मालिक सार्वजनिक सड़क और फुटपाथ का उपयोग पार्किंग के रूप में कर रहे हैं, जिससे न केवल यातायात बाधित होता है बल्कि आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही भी प्रभावित होती है।
ट्रैफिक जाम की समस्या
याचिका में कहा गया कि स्थानीय निवासियों ने कई बार नगर निगम, जेडीए और पुलिस प्रशासन को शिकायतें भी दीं, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सड़क की चौड़ाई कम होने से ट्रैफिक जाम की समस्या लगातार बढ़ रही है और दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। उन्होंने न्यायालय से मांग की है कि संबंधित एजेंसियों को अतिक्रमण हटाने, अवैध पार्किंग रोकने तथा मास्टर प्लान के अनुरूप सड़क की मूल चौड़ाई बहाल करने के निर्देश दिए जाएं।
खंडपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद मामले को गंभीर सार्वजनिक हित का विषय मानते हुए राज्य सरकार, नगर निगम और जेडीए को नोटिस जारी किया तथा निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो मामले में आगे सख्त निर्देश भी दिए जा सकते हैं, ताकि शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाया जा सके और सार्वजनिक मार्गों पर अवैध कब्जों को समाप्त किया जा सके।
मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी, जहां संबंधित विभागों द्वारा की गई कार्रवाई और उनके जवाब के आधार पर न्यायालय आगे के आदेश पारित करेगा।Sources