कानोड़िया स्कूल ऑफ लॉ फॉर वीमेन और Laws And Legals की संयुक्त पहल ‘द फर्स्ट’ का आगाज; राजस्थान हाईकोर्ट की पहली महिला सीनियर एडवोकेट गायत्री राठौड़ सम्मानित, छात्राओं को आत्मनिर्भर पहचान और निरंतर संघर्ष का संदेश
जयपुर। देश के न्यायिक एवं विधि क्षेत्र में उभरती चुनौतियों, तकनीकी बदलावों और महिलाओं की भूमिका पर चर्चा के उद्देश्य से शनिवार, 31 अक्टूबर को कानोड़िया स्कूल ऑफ लॉ फॉर वीमेन में विशेष व्याख्यान शृंखला ‘द फर्स्ट’ (The First) का शुभारंभ किया गया।
कानोड़िया स्कूल ऑफ लॉ फॉर वूमेन, जयपुर और लॉज एंड लीगल्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस व्याख्यान शृंखला के तहत ‘Emerging Trends and Challenges in Court and Legal Sector’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अशोक कुमार जैन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम में राजस्थान हाईकोर्ट की पहली महिला सीनियर एडवोकेट गायत्री राठौड़, राजस्थान बार काउंसिल के को-चेयरमैन सतीश खाण्डल, महाविद्यालय की डायरेक्टर डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, प्रिंसिपल डॉ. वर्तिका अरोड़ा और लॉज एंड लीगल्स फाउंडेशन की चेयरमैन सुजैन कंटालिया मौजूद रहीं।
इस व्याख्यान शृंखला का उद्देश्य कानून से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाने वाली महिलाओं के योगदान को सम्मानित करना और विद्यार्थियों को उनके अनुभवों, संघर्षों तथा उपलब्धियों से प्रेरित करना है।
इसी के तहत इस शृंखला के पहले कार्यक्रम में राजस्थान की पहली महिला सीनियर एडवोकेट गायत्री राठौड़ का सम्मान किया गया।

जस्टिस अशोक कुमार जैन ने गिनाईं न्याय व्यवस्था की चुनौतियां
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जस्टिस अशोक कुमार जैन ने न्यायिक व्यवस्था के समक्ष मौजूद चुनौतियों और विधिक क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों पर विस्तार से विचार रखे।
उन्होंने मजिस्ट्रेट से राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश तक की अपनी यात्रा साझा करते हुए विद्यार्थियों को जीवन में आत्मसम्मान, आत्मनिष्ठा और मूल्यों को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।

जस्टिस जैन ने विधिक क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग का स्वागत किया, लेकिन इसके संभावित दुरुपयोग के प्रति भी आगाह किया।
उन्होंने कहा कि नई तकनीक के उपयोग के साथ उससे जुड़ी चुनौतियों को समझना भी आवश्यक है।
उन्होंने AI के संदर्भ में एल्गोरिदम में संभावित पक्षपात, निजता का अधिकार, भूला देने के अधिकार, साइबर सुरक्षा और डिजिटल विभाजन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

उनके संबोधन में इस बात पर जोर रहा कि तकनीकी प्रगति के साथ न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्षता, गोपनीयता और नैतिक जिम्मेदारी सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
जस्टिस जैन ने विद्यार्थियों को ईमानदारी, चरित्र, सादगी और नैतिक मूल्यों को जीवन में सर्वोच्च स्थान देने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर दृढ़ रहने और व्यक्तिगत मूल्यों से समझौता नहीं करने का संदेश दिया।

पहचान स्थापित करना बड़ी चुनौती, लेकिन हार्डवर्क ही रास्ता-गायत्री राठौड़
राजस्थान हाईकोर्ट की पहली महिला सीनियर एडवोकेट गायत्री राठौड़ ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को समर्पण, अनुशासन और व्यवस्थित कार्यशैली के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन अपनी स्वतंत्र पहचान स्थापित करना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को सफलता प्राप्त करने तक निरंतर प्रयास करते रहने और असफलताओं से निराश न होने के लिए प्रेरित किया।
उनके अनुसार, परंपरागत सोच से अलग हटकर विचार करना गलत नहीं है, बल्कि कई बार यही सोच प्रगति और नई संभावनाओं का रास्ता खोलती है।
गायत्री राठौड़ ने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहने और निरंतर मेहनत के माध्यम से विधिक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने का संदेश दिया।

सोच-समझकर कानूनी संघर्ष चुनने की सलाह
राजस्थान बार काउंसिल के को-चेयरमैन और राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता सतीश खाण्डल ने न्यायपालिका के प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए युवा अधिवक्ताओं को अपने कानूनी संघर्षों और पेशेवर निर्णयों का चयन सोच-समझकर करने की सलाह दी।
उन्होंने छात्राओं से अपनी स्वतंत्र पहचान स्थापित करने और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास के माध्यम से किसी भी लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
उनके संबोधन में युवा विधि विद्यार्थियों और अधिवक्ताओं को आत्मविश्वास के साथ अपने पेशेवर जीवन में आगे बढ़ने तथा न्यायिक व्यवस्था में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।

प्राचार्य डॉ. वर्तिका अरोड़ा ने बताया विधि शिक्षा का व्यापक महत्व
कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. वर्तिका अरोड़ा ने अतिथियों का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विधिक पेशा सामाजिक परिवर्तन, तकनीकी प्रगति और संवैधानिक विकास के साथ लगातार बदल रहा है।
उन्होंने कहा कि विधि शिक्षा केवल कानूनों को समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस समाज को समझना भी आवश्यक है जिसकी सेवा के लिए कानून बनाए जाते हैं।
इस प्रकार के संवाद विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं का आकलन करने, व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने और अपने भविष्य के लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
डॉ. अरोड़ा ने इस संयुक्त पहल के लिए लॉज एंड लीगल्स फाउंडेशन की चेयरमैन सुजैन कंटालिया के सहयोग के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्रगान से शुरुआत, राष्ट्रगीत के साथ समापन
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
सत्र के दौरान विद्यार्थियों को न्यायिक एवं विधिक क्षेत्र के अनुभवी व्यक्तित्वों से सीधे संवाद करने और उनके अनुभवों से सीखने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का मंच संचालन महाविद्यालय की छात्राओं शिवी सरोल और आशिका ने किया।
अंत में लॉज एंड लीगल्स फाउंडेशन की अध्यक्ष सुजैन कंटालिया ने अतिथियों, वक्ताओं और आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

