राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण में लंबे समय से रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं होने से हजारों सरकारी कर्मचारियों की अपीलें लंबित, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम मौका दिय
जयपुर। राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण (Rajasthan Civil Services Appellate Tribunal) में अध्यक्ष, न्यायिक सदस्य एवं प्रशासनिक सदस्यों के लंबे समय से रिक्त पड़े पदों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है।
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने राज्य सरकार को स्पष्ट आदेश दिया है कि यदि अगली सुनवाई से पहले नियुक्तियां नहीं की गईं तो कार्मिक विभाग (DOP) के प्रमुख सचिव को स्वयं अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा।
जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने यह टिप्पणी अधिवक्ता दिलीप सिंह कुरका की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दी है।
याचिका में अधिकरण के ठप होने का मुद्दा
अधिवक्ता दिलीप सिंह कुरका की ओर से अधिवक्ता सुनील समदड़िया ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण में अध्यक्ष, न्यायिक सदस्य एवं प्रशासनिक सदस्यों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिसके कारण अधिकरण पूरी तरह कार्य नहीं कर पा रहा है।
इसका सीधा असर हजारों सरकारी कर्मचारियों पर पड़ रहा है, जिन्हें अपने सेवा विवादों में वैधानिक अपील का मंच उपलब्ध नहीं हो रहा।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने हाल ही में हजारों कर्मचारियों के तबादले किए हैं।
ऐसे में बड़ी संख्या में कर्मचारी इन आदेशों को चुनौती देना चाहते हैं, लेकिन अधिकरण के निष्क्रिय होने के कारण वे अपनी शिकायतों के निस्तारण के लिए किसी प्रभावी वैधानिक मंच तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को दिया एक सप्ताह का आश्वासन
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुए एडवोकेट जनरल राजेन्द्र प्रसाद ने अधिकरण में दो सदस्यों की नियुक्ति एक सप्ताह के भीतर करने की जानकारी दी।
इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 निर्धारित कर दी।
हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी
खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि यदि अगली सुनवाई से पहले नियुक्तियां नहीं होती हैं तो कार्मिक विभाग (Department of Personnel – DOP) के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा।
गौरतलब है कि ट्रिब्यूनल में पिछले एक माह में तबादलों से जुड़ी हजारों नई याचिकाएं दायर की गई हैं। लेकिन सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने से इन याचिकाओं पर सुनवाई नहीं हो पा रही और न ही शिक्षकों को राहत मिल पा रही है।
यदि राज्य सरकार समय पर नियुक्तियां कर देती है तो राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण का कामकाज फिर से शुरू हो सकेगा।
इससे सेवा संबंधी विवादों, तबादलों, पदोन्नति तथा अन्य प्रशासनिक मामलों में अपील करने वाले हजारों सरकारी कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
अब सभी की निगाहें 11 अगस्त 2026 की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट होगा कि राज्य सरकार ने अदालत को दिए गए आश्वासन का पालन किया या नहीं।