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राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश: प्रदेशभर में अधिवक्ताओं के चैंबर 30 मई 2026 तक हर हाल में तैयार हों

जोधपुर, 25 सितम्बर।

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य की अदालतों में अधिवक्ताओं के चैंबरों की कमी को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं.

जस्टिस डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और जस्टिस दिनेश मेहता की खंडपीठ ने कहा कि प्रदेश की सभी अदालतों में वकीलों के चैंबरों का निर्माण कार्य 30 मई 2026 तक हर हाल में पूरा कर लिया जाए.

बार संघों की मांगें

बांसवाड़ा बार संघ सहित कई बार संघों ने अधिवक्ताओं के चैंबर और न्यायालय परिसरों में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर बार-बार मुद्दा उठाया था.

इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, हाईकोर्ट प्रशासन और केंद्र सरकार को आवश्यक कदम उठाने के आदेश दिए.

7 दिन में चैंबरों की संख्या तय करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य को निर्देश दिया कि प्रदेश के हर न्यायालय परिसर के लिए आवश्यक चैंबरों की संख्या 7 दिनों के भीतर पेश करे.

इसके बाद राज्य सरकार 35 जिला न्यायालयों और 1250 अधीनस्थ अदालतों में पंजीकृत बार सदस्यों और कार्यरत वकीलों की संख्या के आधार पर चैंबरों की आवश्यकता तय करेगी.

15 दिन में नीति और डिज़ाइन

हाईकोर्ट ने चैंबरो के निर्माण को लेकर सरकार को आदेश दिया कि राज्य सरकार 15 दिनों में एक व्यापक योजना और नीति तैयार करे.

इस योजना में चैंबरों का डिज़ाइन ऐसा होना चाहिए कि प्रत्येक कक्ष न्यूनतम 4 वकीलों के आधार पर अधिकतम वकीलों को समायोजित कर सके।

राज्य सरकार 30 दिनों में निर्माण शुरू करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। छह महीने के भीतर निर्माण कार्य शुरू होगा और उसे 30 मई 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।.

नए भवनों में मिलेगी प्राथमिकता

कोर्ट ने कहा कि यदि प्राथमिकता तय करनी हो, तो नवनिर्मित भवनों में पहले वकीलों के चैंबर बनाए जाएं ताकि पुराने भवनों से स्थानांतरित हो रहे वकीलों को सम्मानजनक स्थान पर चैंबर उपलब्ध कराए जा सकें.

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आगे बनने वाले किसी भी न्यायालय भवन या विस्तार योजना में वकीलों के चैंबरों के लिए पर्याप्त जगह और डिज़ाइन अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा।

वित्तीय सहायता लेने की छूट

राज्य सरकार को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वह चैंबर निर्माण के लिए केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सके।

कड़ा रुख अपनाएगा हाईकोर्ट

कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि तय समयसीमा में निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ, तो राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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