जयपुर: राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण (Rajasthan Civil Services Appellate Tribunal) यानी रेट में लंबे समय से खाली पड़े पदों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट की सख्ती का असर दिखा है।
राज्य सरकार ने राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण में दो नए सदस्यों की नियुक्ति कर दी है। मंगलवार को सरकार ने दोनों नियुक्तियों के आदेश हाईकोर्ट में पेश किए।
हालांकि, रेट के अध्यक्ष का पद अभी भी खाली है।
सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है और इसके लिए कुछ और समय चाहिए।
इस पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई 15 सितंबर तक टाल दी।
हाईकोर्ट की चेतावनी के बाद नियुक्तियां
राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण (रेट) में खाली पदों को लेकर मामला कई महीनों से चल रहा है।
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को साफ तौर पर कहा था कि एक सप्ताह के अंदर खाली पदों पर नियुक्तियां की जाएं।
हाईकोर्ट ने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर तय समय में नियुक्तियां नहीं की गईं तो कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव को खुद कोर्ट में आकर जवाब देना होगा।
अब अगली सुनवाई से पहले सरकार ने रेट में दो सदस्यों की नियुक्ति कर दी है। सरकार ने नियुक्ति के आदेश कोर्ट के सामने रखे।
यानी पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने जिस तेजी से नियुक्तियां करने को कहा था, उसके बाद सरकार की ओर से दो पद भर दिए गए हैं। अब नजर अध्यक्ष की नियुक्ति पर है।
दो नए सदस्यों की नियुक्ति
राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त आरएएस अधिकारी अतर सिंह नेहरा और वीरेंद्र सिंह को रेट में सदस्य नियुक्त किया है।
सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि दोनों की नियुक्ति हो चुकी है और इसके आदेश भी कोर्ट के सामने पेश कर दिए गए हैं।
सरकार ने साथ ही बताया कि अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया भी चल रही है।
इसी वजह से अध्यक्ष की नियुक्ति पूरी करने के लिए कुछ और समय मांगा गया।
हाईकोर्ट ने सरकार की इस बात को देखते हुए मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को तय कर दी।
4 महीने से खाली अध्यक्ष का पद
रेट में अध्यक्ष का पद काफी समय से खाली पड़ा था। 19 मार्च को तत्कालीन अध्यक्ष विकास सीताराम भले के तबादले के बाद यह पद खाली हुआ था।
इसके बाद अध्यक्ष का पद करीब चार महीने तक खाली रहा। फिलहाल एक अधिकारी को अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
वहीं, रेट में एक न्यायिक सदस्य के नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होने की वजह से भी कामकाज प्रभावित हो रहा था।
याचिका में कहा गया था कि रेट में पर्याप्त सदस्य नहीं होने से सरकारी कर्मचारियों के सेवा से जुड़े मामलों की सुनवाई ठीक से नहीं हो पा रही है।
1300 से ज्यादा अपीलें अटकीं
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया था कि रेट में 1300 से ज्यादा अपीलें लंबित हैं।
सदस्यों की कमी के कारण इन मामलों पर प्रभावी तरीके से सुनवाई नहीं हो पा रही थी।
रेट का काम सरकारी कर्मचारियों से जुड़े सेवा विवादों की सुनवाई करना है। तबादले, पदोन्नति और नौकरी से जुड़े दूसरे विवादों में कर्मचारी इस अधिकरण के सामने अपील कर सकते हैं।
लेकिन जब अधिकरण में ही जरूरी पद खाली हों और पर्याप्त सदस्य उपलब्ध न हों तो मामलों की सुनवाई प्रभावित होती है।
इसका सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ता है, जो अपने सेवा विवाद को लेकर रेट का रुख करते हैं।
तबादलों के बाद और बढ़ी जरूरत
पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से हाईकोर्ट को यह भी बताया गया था कि राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर कर्मचारियों के तबादले किए हैं।
ऐसे में कई कर्मचारी अपने तबादले से जुड़े आदेशों को चुनौती देना चाहते हैं। लेकिन अगर रेट में पर्याप्त सदस्य नहीं होंगे तो इन मामलों की सुनवाई में देरी होगी।
इसी वजह से याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के सामने रेट के खाली पदों को जल्द भरने का मुद्दा उठाया था।
हाईकोर्ट ने भी माना था कि अगर अधिकरण में जरूरी पद ही खाली रहेंगे तो कर्मचारियों के सेवा विवादों की सुनवाई कैसे होगी।
इसी दौरान कोर्ट ने सरकार पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर सरकार अधिकरण नहीं चला सकती तो उसे बंद करने पर विचार करना चाहिए।
अध्यक्ष की नियुक्ति का इंतजार
दो सदस्यों की नियुक्ति के बाद रेट में कामकाज को लेकर स्थिति पहले से बेहतर होने की उम्मीद है।
हालांकि, अध्यक्ष का पद अभी भी खाली है और एक न्यायिक सदस्य के नियमित तौर पर काम पर नहीं आने से भी अधिकरण का काम प्रभावित हो रहा है।
सरकार ने बताया है कि नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। अब अगली सुनवाई में सरकार को अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर कोर्ट को जानकारी देनी होगी।
क्या है रेट और क्यों जरूरी है?
राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण (रेट) सरकारी कर्मचारियों के सेवा से जुड़े विवादों की सुनवाई करता है।
अगर किसी कर्मचारी को तबादले, पदोन्नति या सेवा से जुड़े किसी आदेश पर आपत्ति है तो वह तय प्रक्रिया के तहत रेट में अपील कर सकता है।
यानी सरकारी कर्मचारियों के लिए यह एक अहम कानूनी मंच है।
अगर यहां पद खाली रहने की वजह से सुनवाई प्रभावित होती है तो कर्मचारियों को अपने मामलों के निपटारे के लिए इंतजार करना पड़ता है।
इसी वजह से रेट में लंबे समय से खाली पदों का मामला राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंचा था।
15 सितंबर को फिर सुनवाई
फिलहाल राज्य सरकार ने दो सदस्यों की नियुक्ति कर दी है और उनके आदेश भी हाईकोर्ट में पेश कर दिए हैं।
अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर सरकार ने समय मांगा है।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को तय की है।
अब अगली सुनवाई में यह देखना अहम होगा कि अध्यक्ष की नियुक्ति कहां तक पहुंची और रेट में लंबित मामलों की सुनवाई को नियमित करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।