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विधायक गणेश बंसल की पत्नी संतोष बंसल को राजस्थान हाईकोर्ट से राहत, कोर्ट ने कहा-राजनीतिक प्रतिशोध की आशंका प्रथम दृष्टया निराधार नहीं

Rajasthan High Court Protects MLA Ganesh Bansal’s Wife Santosh Bansal from Arrest; Justice Sanjeet Purohit Notes Prima Facie Substance in Political Vendetta Allegation

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने हनुमानगढ़ नगर परिषद की पूर्व सभापति और विधायक गणेश राज बंसल की पत्नी संतोष बंसल को बड़ी राहत दी है।

जस्टिस संजीत पुरोहित की एकलपीठ ने उनके खिलाफ दर्ज FIR के मामले में अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि कम समय में कई FIR दर्ज होने और कथित घटनाओं से लंबे समय बाद मामला दर्ज किए जाने के तथ्यों को देखते हुए राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित कार्रवाई की आशंका में दम नजर आता है।

हाईकोर्ट ने मामले को विचारार्थ स्वीकार करते हुए चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के आदेश दिए हैं।

तब तक संतोष बंसल को हनुमानगढ़ टाउन थाने में दर्ज FIR के संबंध में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

नगर परिषद की फाइलें गायब करने और गबन के आरोप

पूर्व सभापति संतोष बंसल के खिलाफ हनुमानगढ़ टाउन पुलिस थाने में दर्ज की गई FIR में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 381, 409, 193 और 120-B के तहत अपराध तय किए गए हैं।

आरोप नगर परिषद से संबंधित सरकारी फाइलों के गायब होने और कथित अनियमितताओं से जुड़े हैं।

संतोष बंसल की ओर से अधिवक्ता कुणाल उपाध्याय ने राजस्थान हाईकोर्ट में क्रिमिनल मिसलेनियस पिटीशन दायर कर FIR को चुनौती दी।

याचिका में आरोप लगाया गया कि उनके खिलाफ दर्ज की गई FIR दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है।

याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए ये प्रमुख तर्क

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि संतोष बंसल के खिलाफ कम समय के भीतर कई FIR दर्ज की गई हैं।

इससे पहले FIR संख्या 624/2026 और 625/2026 भी दर्ज की गई थीं, जिनमें कथित घटनाएं वर्ष 2003 से संबंधित थीं और लगभग 23 साल की देरी से मामले दर्ज किए गए थे।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के अनुसार, हाईकोर्ट की दूसरी पीठ ने 29 सितंबर 2026 को एक अन्य याचिका में संबंधित मामलों में उपरोक्त दोनों FIR को निरस्त कर दिया था।

उस आदेश में संबंधित FIR को कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए याचिकाकर्ता को परेशान करने और प्रतिशोध की भावना से दर्ज किए जाने का उल्लेख किया गया था।

वर्तमान FIR के संबंध में भी याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि आरोप वर्ष 2006 और 2013 की कथित घटनाओं से जुड़े हैं, जबकि FIR वर्ष 2026 में दर्ज की गई।

याचिका में यह भी कहा गया कि आरोप सामान्य प्रकृति के हैं और संतोष बंसल की कोई विशिष्ट भूमिका स्पष्ट रूप से नहीं बताई गई है।

अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सरकारी फाइलों के गबन और गायब होने से जुड़े आरोप सह-आरोपियों मालचंद और गंगाराम के संबंध में बताए गए हैं।

इन सह-आरोपियों को भी हाईकोर्ट की समन्वय पीठ से गिरफ्तारी के विरुद्ध अंतरिम संरक्षण मिल चुका है।

राज्य सरकार ने किया विरोध

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने याचिका का विरोध किया।

राज्य की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता के खिलाफ विभिन्न आपराधिक मामले दर्ज होना उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि की ओर संकेत करता है।

साथ ही, राज्य सरकार ने इस आरोप से इनकार किया कि वर्तमान FIR राजनीतिक प्रतिशोध या दुर्भावनापूर्ण मंशा से दर्ज की गई है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार किया।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

जस्टिस संजीत पुरोहित की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि बहुत कम समय के भीतर याचिकाकर्ता के खिलाफ कई FIR दर्ज हुई हैं।

वर्तमान FIR भी वर्ष 2003, 2006 और 2013 की कथित घटनाओं से संबंधित आरोपों के संदर्भ में अस्पष्ट देरी के बाद दर्ज की गई है।

कोर्ट ने कहा कि इन परिस्थितियों में याचिकाकर्ता की ओर से FIR को परेशान करने वाली और राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित कार्रवाई बताने वाले तर्क में प्रथम दृष्टया दम नजर आता है।

अदालत ने कहा कि मामले में विचार किए जाने की आवश्यकता है और इसे चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

चार सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत आदेश दिया कि संतोष बंसल को हनुमानगढ़ टाउन पुलिस थाने में दर्ज FIR संख्या 645/2026 के संबंध में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

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