जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर के पालासनी गांव में जैन उपासरे (जैन धार्मिक स्थल) के रास्ते पर अतिक्रमण के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए रास्ता खोलने और कथित अतिक्रमण हटाने के प्रशासनिक आदेशों को रद्द कर दिए हैं।
हाईकोर्ट ने पाया कि मौके की जांच करने वाली कमेटी ने रास्ते में किसी तरह की बाधा नहीं होने की बात कही थी, लेकिन इसके बावजूद उपखंड अधिकारी ने रास्ता खुलवाने का आदेश जारी कर दिया।
जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी ने वीरेंद्र गोदारा की याचिका स्वीकार करते हुए दोनों आदेश निरस्त कर दिए। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि अतिक्रमण का मूल विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। इस पर अब अतिरिक्त जिला कलेक्टर को उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर स्वतंत्र रूप से फैसला करना होगा।
वीरेंद्र गोदारा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश जोशी ने अधिवक्ता दिनेश कुमार गोदारा के साथ पैरवी की। वहीं, प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता प्रहलाद सिंह भाटी ने पक्ष रखा।
शिकायत के बाद रास्ते की जांच के लिए बनी कमेटी
पालासनी गांव में जैन उपासरे के पीछे से गुजरने वाले आम रास्ते पर अतिक्रमण की शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद पंचायत समिति लूणी के विकास अधिकारी ने 25 फरवरी 2026 को मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की।
कमेटी ने 2 जून 2026 को मौके का निरीक्षण किया। रिपोर्ट में बताया गया कि उपासरे की पूर्व दिशा में मुख्य सड़क चालू है और पश्चिम दिशा का रास्ता उपासरे तक खुला है। उपासरे तक आने-जाने के रास्ते में किसी तरह की बाधा नहीं मिली।
रिपोर्ट में दक्षिण दिशा की ओर आगे रास्ता बंद होने का भी जिक्र किया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि उस तरफ वीरेंद्र गोदारा और सुनील के मकान करीब 20 से 25 साल से बने हुए हैं।
कमेटी ने यह भी बताया कि अतिक्रमण का मामला कोर्ट में लंबित है और पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने से पट्टे का नवीनीकरण नहीं हो पा रहा है।
रिपोर्ट के बावजूद सात दिन में रास्ता खोलने का निर्देश
यानी विकास अधिकारी की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया था कि जैन उपासरे तक आने-जाने का रास्ता खुला है और वहां पहुंचने में कोई बाधा नहीं है। साथ ही कथित अतिक्रमण का मामला सक्षम अधिकारी के सामने लंबित है।
इसके बावजूद, उपखंड अधिकारी, जोधपुर दक्षिण ने 7 अगस्त 2026 को आदेश जारी कर वीरेंद्र गोदारा को सात दिन के भीतर रास्ता खुलवाने और कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
इसके बाद 21 अगस्त 2026 को उपखंड अधिकारी ने एक और आदेश जारी कर पालासनी गांव के निवासी वीरेंद्र गोदारा के कथित अतिक्रमण को हटाने के निर्देश दिए।
रास्ता खोलने के आदेश को हाईकोर्ट में दी चुनौती
पालासनी निवासी वीरेंद्र गोदारा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उपखंड अधिकारी, जोधपुर दक्षिण के आदेशों को चुनौती दी। इन आदेशों में उन्हें सार्वजनिक रास्ते और जैन उपासरे के लिए आवंटित जमीन पर अतिक्रमण का आरोपी मानते हुए सात दिन में रास्ता खोलने और कथित अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश जोशी ने बताया कि जांच कमेटी ने 2 जून को मौके का निरीक्षण किया और 9 जुलाई 2026 को रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में रास्ते में किसी तरह की बाधा नहीं होने की बात कही गई थी।
विकास अधिकारी ने भी 14 जुलाई 2026 को उपखंड अधिकारी को पत्र भेजकर यही जानकारी दी थी। इसके बावजूद 7 अगस्त को रास्ता खुलवाने का आदेश जारी कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने आदेश जारी करने का आधार पूछा
याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच कमेटी की रिपोर्ट और विकास अधिकारी के 14 जुलाई के पत्र पर विचार किया। कोर्ट ने पाया कि उपखंड अधिकारी को पहले ही बता दिया गया था कि रास्ते में कोई बाधा नहीं है।
रास्ता खुलवाने का निर्देश देने का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब संबंधित अधिकारी पहले ही रास्ते में रुकावट नहीं होने की बात स्पष्ट कर चुका था, तो उपखंड अधिकारी के पास रास्ता दोबारा खुलवाने का निर्देश देने का कोई आधार नहीं था।
इसके अलावा, हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि उपखंड अधिकारी ने अपने 7 अगस्त के आदेश में यह भी नहीं बताया कि रास्ता खोलने का निर्देश किन कारणों से दिया जा रहा है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने 7 अगस्त 2026 का आदेश रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश भी निरस्त
7 अगस्त 2026 को रास्ता खुलवाने के आदेश के बाद उपखंड अधिकारी, जोधपुर दक्षिण ने 21 अगस्त 2026 को एक और आदेश जारी किया था। इसमें पालासनी निवासी याचिकाकर्ता वीरेंद्र गोदारा के कथित अतिक्रमण को हटाने के निर्देश दिए गए थे।
हाईकोर्ट ने 7 अगस्त के मूल आदेश को निरस्त करने के साथ ही उसके आधार पर जारी 21 अगस्त के आदेश को भी रद्द कर दिया।
अतिरिक्त जिला कलेक्टर को स्वतंत्र रूप के करना होगा फैसला
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण से जुड़ा मामला अतिरिक्त जिला कलेक्टर (प्रथम), जोधपुर के सामने लंबित है। अब अतिरिक्त जिला कलेक्टर को मामले के तथ्यों और परिस्थितियों की जांच कर कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से फैसला करना होगा।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अतिरिक्त जिला कलेक्टर 7 अगस्त के रद्द किए गए आदेश से प्रभावित हुए बिना मामले पर निर्णय लें। यानी उन्हें उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर अपने स्तर पर फैसला करना होगा।
अतिक्रमण विवाद पर अंतिम फैसला अभी बाकी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह तय नहीं किया कि संबंधित जमीन पर अतिक्रमण हुआ है या नहीं। कोर्ट ने रास्ता खुलवाने और कथित अतिक्रमण हटाने से जुड़े दोनों प्रशासनिक आदेश रद्द किए हैं, लेकिन जमीन पर अतिक्रमण को लेकर मूल विवाद का फैसला अभी बाकी है।