जोधपुर, 13 दिसंबर
राजस्थान हाईकोर्ट ने चर्चित फिल्म निर्माता विक्रम प्रवीण भट्ट मामले में पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी और सहकर्मियों की गिरफ्तारी से जुड़े मामले में जांच प्रक्रिया की वैधता पर संदेह जताते हुए पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) उदयपुर, पुलिस अधीक्षक (एसपी) उदयपुर और जांच अधिकारी (आईओ) को 15 दिसंबर 2025 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संपूर्ण रिकॉर्ड के साथ पेश होने के आदेश दिए हैं।
मामला 42 करोड़ रुपये के फिल्म प्रोजेक्ट से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट विवाद से संबंधित है।
उदयपुर निवासी डॉ. अजय मुरडिया ने विक्रम भट्ट और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी व आपराधिक विश्वासघात के आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप है कि फिल्म निर्माण के दौरान मनगढ़ंत और अत्यधिक खर्च दिखाकर आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
विक्रम भट्ट व अन्य की ओर से अधिवक्ता डी.एस. घडसाना और महेन्द्र गोदारा ने पैरवी करते हुए दलील दी कि यह विवाद पूरी तरह सिविल प्रकृति का है और इसे आपराधिक रूप देना कानून का दुरुपयोग है।
अधिवक्ता ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट के तहत बनी दोनों फिल्में रिलीज हो चुकी हैं और लगभग डेढ़ वर्ष तक अनुबंध निर्विवाद रूप से चला।
अचानक खर्चों को लेकर विवाद खड़ा कर 7 दिसंबर 2025 (रविवार) को बिना पर्याप्त प्रारंभिक जांच के जल्दबाजी में गिरफ्तारी की गई।
अधिवक्ताओं ने ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार, दिल्ली रेस क्लब बनाम उत्तर प्रदेश (2024) और भजनलाल केस जैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में एफआईआर से पहले प्रारंभिक जांच अनिवार्य है और परस्पर विरोधी धाराओं में एक साथ मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।
सरकारी अधिवक्ता विक्रमसिंह राजपुरोहित ने कोर्ट को बताया कि शिकायतकर्ता और फिल्म कंपनी के कर्मचारियों के बयान के आधार पर प्रारंभिक जांच की गई और उसके बाद गिरफ्तारी हुई।
शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता राकेश अरोड़ा ने कहा कि खर्चों में हेराफेरी के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि बहस और रिकॉर्ड के अवलोकन के बाद ही यह तय होगा कि पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया का पालन किया या नहीं।
कोर्ट ने इसके लिए आईजीपी, एसपी और जांच अधिकारी को रिकॉर्ड सहित पेश होने का आदेश दिया है।
विक्रम भट्ट की बेटी को राहत
कोर्ट ने विक्रम भट्ट की गर्भवती बेटी के संबंध में राहत देते हुए कहा कि उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, हालांकि वे कोर्ट की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाएंगी।
मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर 2025 को होगी, जहां पुलिस अधिकारियों को पूरे केस रिकॉर्ड के साथ स्थिति स्पष्ट करनी होगी।