जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर में सास की हत्या के मामले में आरोपी बहू को बरी करने के निचली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।
हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में पेश किए गए परिस्थितिजन्य सबूतों की कड़ी पूरी नहीं है। पुलिस और अभियोजन पक्ष ऐसे पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सके, जिनसे यह साबित हो कि बहू ने ही अपनी सास की हत्या की थी।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई कानूनी या तथ्यात्मक गलती नहीं मानी और मृतका के पति भंवरलाल की अपील खारिज कर दी।
जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस भुवन गोयल की बेंच ने यह फैसला सुनाया। अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रहलाद शर्मा ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अमित पुनिया उपस्थित हुए।
घटना के समय बहू की मौजूदगी साबित नहीं हुई
मामला 27 जनवरी 2020 को जयपुर के हरमाड़ा थाना क्षेत्र में मन्नी देवी की मौत से जुड़ा है। मृतका के पति भंवरलाल ने अपनी बहू रीना शर्मा पर हत्या का आरोप लगाया था।
आरोप था कि रीना ने बेलन से मारपीट की और बाल पकड़कर मन्नी देवी का सिर दीवार से टकराया, जिससे उनकी मौत हो गई।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद गवाहों के बयानों को देखने के बाद कहा कि घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। ऐसा कोई गवाह भी नहीं मिला, जिसने घटना के समय रीना को मन्नी देवी के साथ घर में देखा हो।
मृतका के बेटे और बेटी ने अपने बयानों में कहा था कि घटना वाले दिन रीना अपने मायके में थी। जांच अधिकारी ने भी माना कि जांच के दौरान ऐसा कोई गवाह नहीं मिला, जिसने घटना के समय दोनों को साथ देखा हो।
CCTV फुटेज को लेकर भी उठे सवाल
अभियोजन पक्ष ने फ्लैट में लगे CCTV कैमरे की फुटेज को पेन ड्राइव में पेश किया था। इसके जरिये रीना की घटना के समय मौजूदगी साबित करने की कोशिश की गई। हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि फुटेज को पेन ड्राइव में डालने वाले व्यक्ति की कोर्ट में गवाही नहीं हुई थी।
फुटेज के साथ दिए गए प्रमाणपत्र पर भी सवाल उठे। संबंधित गवाह ने जिरह के दौरान पेन ड्राइव में फुटेज डालने की प्रक्रिया की जानकारी होने से इनकार किया और प्रमाणपत्र में दर्ज कुछ बातों को गलत बताया।
हाईकोर्ट ने माना कि इन कमियों के चलते CCTV फुटेज को भरोसेमंद सबूत नहीं माना जा सकता और इससे रीना के खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर की चोट का जिक्र नहीं मिला
हाईकोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट में मन्नी देवी के सिर पर चोट दर्ज नहीं थी। ऐसे में सिर दीवार से टकराकर हत्या किए जाने के अभियोजन के आरोप की पुष्टि नहीं हो सकी।
हाईकोर्ट ने यह भी देखा कि मृतका के पति और आरोपी के भाई ने अपने बयानों में मन्नी देवी के घर पर अकेले होने और रसोई में काम करते समय ऊपर से गिरने की बात कही थी। इन बयानों के मद्देनजर अभियोजन की ओर से बताई गई घटना की परिस्थितियां संदेह से परे साबित नहीं हुईं।
बेलन और कैंची की बरामदगी से भी आरोप साबित नहीं हुए
अभियोजन पक्ष का दावा था कि जांच के दौरान रीना से बेलन और कैंची बरामद की गई थीं। हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि बरामदगी के गवाह पुलिसकर्मी थे और इन सामानों की बरामदगी से जुड़े रिकॉर्ड में भी कमियां थीं। गवाहों ने माना कि बेलन और कैंची रीना के अकेले कब्जे वाले कमरे या अलमारी से बरामद नहीं हुए थे।
हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि बेलन और कैंची पर फिंगरप्रिंट की जांच नहीं कराई गई और न ही उन्हें FSL भेजा गया। ऐसे में इन वस्तुओं की बरामदगी से रीना के खिलाफ हत्या के आरोप की पुष्टि नहीं हो सकी।
बरी करने के फैसले में दखल से किया इनकार
हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में, जहां प्रत्यक्षदर्शी नहीं होते और परिस्थितियों के आधार पर आरोप साबित करने होते हैं, वहां अभियोजन को हर कड़ी साबित करनी पड़ती है।
सभी सबूतों को जोड़ने के बाद भी अगर आरोपी के अलावा किसी दूसरी संभावना से इनकार नहीं किया जा सके, तो हत्या का आरोप साबित नहीं माना जा सकता। इस मामले में अभियोजन के सबूत एक-दूसरे से जुड़कर आरोप साबित नहीं कर पाए।
हाईकोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने रीना शर्मा को बरी करने का फैसला उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दिया था और उसमें कोई कानूनी या तथ्यात्मक गलती नहीं थी।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने भंवरलाल की अपील खारिज कर दी और बहू को बरी करने का फैसला बरकरार रखा।