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अनुच्छेद 227 के तहत पारित आदेश के खिलाफ Rule 134 में अपील दायर नहीं की जा सकती- राजस्थान हाईकोर्ट

Rajasthan High Court Rejects State Government’s Special Appeal, Rules Article 227 Order Not Appealable Under Rule 134

राजस्थान हाईकोर्ट से राज्य सरकार को बड़ा झटका, स्पेशल अपील रिट खारिज

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर Special Appeal Writ को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि हाईकोर्ट के एकलपीठ द्वारा संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए पारित आदेश के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट रूल्स, 1952 के Rule 134 के तहत Special Appeal Writ maintainable नहीं है।

चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने राजस्थान सरकार की ओर से दायर स्पेशल अपील याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया हैं.

हालांकि हाईकेार्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश से राज्य सरकार को 19 नवंबर 2025 के एकलपीठ के आदेश को कानून के अनुसार अन्य तरीके से चुनौती देने से रोका नहीं जाएगा।

राज्य सरकार ने एकलपीठ के आदेश को दी थी चुनौती

मामले में राजस्थान सरकार, माध्यमिक/प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर और जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारंभिक शिक्षा, जोधपुर की ओर से यह अपील दायर की गई थी।

राज्य ने 19 नवंबर 2025 को एकलपीठ द्वारा पारित उस आदेश की वैधता और शुद्धता को चुनौती दी थी, जिसके माध्यम से राज्य की ओर से दायर रिट याचिका खारिज कर दी गई थी।

मामले में राजस्थान गैर-सरकारी शैक्षणिक संस्था अधिकरण जयपुर, लाल बहादुर शास्त्री एजुकेशनल सोसायटी रातनाडा जोधपुर और अन्य पक्षकार प्रतिवादी थे।

2017 में ही निष्पादन अदालत ने पारित किया था न्यायिक आदेश

खंडपीठ ने रिकॉर्ड पर विचार करते हुए कहा कि 20 अप्रैल 2017 को निष्पादन अदालत ने राज्य सरकार की ओर से उठाई गई आपत्तियों को खारिज करते हुए न्यायिक आदेश पारित किया था।

इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में S.B. Civil Writ Petition दायर की थी, जिसे एकलपीठ ने खारिज कर दिया था। इसके बाद राज्य ने खंडपीठ के समक्ष Special Appeal Writ दायर की।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के Radhey Shyam & Anr. Vs. Chhabi Nath & Ors. मामले का हवाला देते हुए कहा कि इसमें स्पष्ट हैं कि सिविल कोर्ट के न्यायिक आदेश संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट क्षेत्राधिकार के अधीन नहीं हैं।

साथ ही अनुच्छेद 227 के तहत हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र को अनुच्छेद 226 से अलग माना गया है।

हाईकोर्ट इसी कानूनी सिद्धांत के आधार पर कहा कि सिविल कोर्ट के न्यायिक आदेश के खिलाफ अनुच्छेद 226 के तहत रिट क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

Rule 134 के तहत अपील क्यों नहीं हुई स्वीकार?

हाईकोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट रूल्स, 1952 के Rule 134(i) का भी विश्लेषण किया।

कोर्ट ने कहा कि इस प्रावधान के तहत हाईकोर्ट के एकलपीठ के कुछ अंतिम आदेशों के खिलाफ अपील का प्रावधान है, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं हैं।

पीठ ने स्पष्ट किया कि Rule 134 के तहत उस आदेश के खिलाफ Special Appeal Writ maintainable नहीं होगी, जो एकलपीठ ने संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए पारित किया हो।

हाईकोर्ट ने खारिज की राज्य की Special Appeal

मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि वर्तमान Special Appeal Writ maintainable नहीं है। इसी आधार पर राज्य सरकार की अपील खारिज करने का आदेश दिया गया.

हालांकि, अदालत ने महत्वपूर्ण रूप से यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को 19 नवंबर 2025 के एकलपीठ के आदेश को कानून के अनुसार चुनौती देने से यह फैसला नहीं रोकेगा।

क्या है फैसले का सार?

इस फैसले में हाईकोर्ट ने मुख्य रूप से अनुच्छेद 226 और 227 के अधिकार क्षेत्र तथा Rule 134 के तहत Special Appeal की maintainability के सवाल पर फैसला दिया हैं.

हाईकोर्ट ने मौजूदा अपील को maintainable नहीं माना, लेकिन राज्य को संबंधित आदेश को कानून में उपलब्ध अन्य उचित माध्यम से चुनौती देने की स्वतंत्रता बरकरार रखी है।

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