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आर्बिट्रेशन ​को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बिना नोटिस भी नियुक्त हो सकता है मध्यस्थ: जस्टिस बनवारी लाल शर्मा बने सोल आर्बिट्रेटर

Rajasthan High Court Rules Arbitration Notice Not Mandatory if Dispute Already Known Between Parties

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि पक्षकारों के बीच विवाद की जानकारी पहले से मौजूद हो और दोनों पक्ष न्यायालय में मध्यस्थता संबंधी कार्यवाही कर चुके हों, तो आर्बिट्रेशन एंड कंसिलिएशन एक्ट, 1996 की धारा 21 के तहत अलग से नोटिस नहीं देने मात्र से मध्यस्थ नियुक्ति आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता।

राजस्थान हाईकोर्ट ने कोटा स्थित “कोटा सर्विस स्टेशन” पेट्रोल पंप साझेदारी विवाद में राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बनवारी लाल शर्मा को एकल मध्यस्थ नियुक्त किया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की विशेष एकलपीठ ने यह फैसला याचिकाकर्ता अशोक कुमार गुप्ता और शंभूदयाल माहेश्वरी की ओर दायर आर्बिट्रेशन एप्लीकेशन पर सुनवाई करते हुए दिया हैं.

याचिका में कहा गया कि साझेदारी फर्म के संचालन और एचपीसीएल के साथ कारोबारी सहयोग को लेकर साझेदारों के बीच गंभीर विवाद उत्पन्न हो गए हैं।

आरोप लगाया गया कि एक पक्ष के परिजन द्वारा व्यवसाय में हस्तक्षेप और विभिन्न शिकायतों के कारण फर्म की प्रतिष्ठा तथा संचालन प्रभावित हुआ।

एचपीसीएल और प्रतिवादी Prakash Chandra Gupta ने दलील दी कि मध्यस्थ नियुक्त् करने से पूर्व धारा 21 के तहत पूर्व नोटिस नहीं दिया गया, इसलिए आवेदन विचारणीय नहीं है।

साथ ही यह भी कहा गया कि पेट्रोल पंप डीलरशिप समाप्त हो चुकी है और साझेदारी समझौता पंजीकृत नहीं होने के कारण आवेदन बाधित है।

हालांकि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि अदालत को धारा 11 के तहत केवल यह देखना होता है कि पक्षकारों के बीच वैध मध्यस्थता क्लॉज और वास्तविक विवाद मौजूद है या नहीं।

अदालत ने माना कि दोनों पक्ष पहले ही धारा 9 के तहत अंतरिम राहत के लिए अदालत पहुंच चुके थे, इसलिए विवाद की जानकारी दोनों को थी और ऐसे में अलग नोटिस की कमी आवेदन को अमान्य नहीं बनाती।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि मध्यस्थता प्रक्रिया में न्यूनतम न्यायिक हस्तक्षेप होना चाहिए तथा विवाद के गुण-दोष का परीक्षण मध्यस्थ द्वारा किया जाना उचित है।

हाईकोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बनवारी लाल शर्मा को एकल मध्यस्थ नियुक्त करते हुए सभी विवादों का निस्तारण कानून के अनुसार करने के निर्देश दिए।

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