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विश्वविद्यालय की देरी की सजा योग्य उम्मीदवार को नहीं दी जा सकती : राजस्थान हाईकोर्ट

Rajasthan High Court Rules Delayed University Result Cannot Deny Selection to Eligible Candidate

हाईकोर्ट ने कहा, भर्ती प्रक्रिया में योग्यता प्राप्त करने की वास्तविक तिथि महत्वपूर्ण होती है, न कि प्रमाण-पत्र जारी होने की तिथि।

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी अभ्यर्थी ने वास्तविक रूप से निर्धारित कट-ऑफ तिथि से पहले आवश्यक शैक्षणिक योग्यता प्राप्त कर ली है, तो विश्वविद्यालय द्वारा समेकित परिणाम या अंकतालिका देर से जारी होने के आधार पर उसे चयन से वंचित नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में वास्तविक योग्यता प्राप्त करने की तिथि को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और तकनीकी देरी के आधार पर अधिक मेरिट वाले उम्मीदवार को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में योग्यता प्राप्त करने की वास्तविक तिथि महत्वपूर्ण होती है, न कि प्रमाण-पत्र जारी होने की तिथि।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश एकलपीठ के आदेश को मुहर लगाते हुए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) की विशेष अपील को खारिज कर दिया है।

एकलपीठ ने याचिकाकर्ता लोकेश कुमार यादव के पक्ष में फैसला देते हुए उसकी उम्मीदवारी पर मेरिट के आधार पर विचार कर नियुक्ति के लिए अनुशंसा करने का आदेश दिया था।

भर्ती का पूरा विवाद

मामले के अनुसार राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने वर्ष 2020 में लोक निर्माण विभाग (PWD) में जूनियर इंजीनियर (सिविल) के 276 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था।

विज्ञापन में यह शर्त रखी गई थी कि उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में इंजीनियरिंग डिग्री या समकक्ष योग्यता होनी चाहिए, हालांकि अंतिम वर्ष में अध्ययनरत उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते थे, बशर्ते परीक्षा से पहले वे आवश्यक योग्यता प्राप्त कर लें।

याचिकाकर्ता लोकेश कुमार यादव, जो अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित हैं, ने परीक्षा में भाग लिया और लिखित परीक्षा में 101.1416 अंक प्राप्त किए।

इसके बावजूद उन्हें चयन सूची में शामिल नहीं किया गया, जबकि उनसे कम अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को नियुक्ति दे दी गई।

बोर्ड ने उनके मामले में डिग्री पूर्ण होने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा और कहा कि उनका समेकित परिणाम बाद में घोषित हुआ है।

कोविड-19 के कारण उत्पन्न स्थिति

रिकॉर्ड से यह तथ्य सामने आया कि याचिकाकर्ता ने बी.टेक. का अंतिम (आठवां) सेमेस्टर मई 2019 में ही उत्तीर्ण कर लिया था, लेकिन प्रथम सेमेस्टर का एक बैक पेपर शेष था।

कोविड-19 महामारी के कारण विश्वविद्यालय ने 4 अगस्त 2021 और 3 सितंबर 2021 के आदेशों के माध्यम से निर्णय लिया कि जिन छात्रों की परीक्षाएं आयोजित नहीं हो सकीं, उन्हें पास मानते हुए अगले सेमेस्टर में प्रोन्नत किया जाएगा।

इस निर्णय के कारण याचिकाकर्ता को भी लंबित पेपर में उत्तीर्ण माना गया।

हालांकि, डिग्री का समेकित परिणाम अक्टूबर 2021 में और अंकतालिका दिसंबर 2021 में जारी हुई, जिसके आधार पर बोर्ड ने उन्हें कट-ऑफ तिथि से पूर्व योग्य नहीं माना।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विधि का स्थापित सिद्धांत यह है कि योग्यता प्राप्त करने की तिथि परिणाम घोषित होने की तिथि से निर्धारित होती है, परंतु इस मामले में विश्वविद्यालय ने प्रमाणित किया कि याचिकाकर्ता ने अंतिम सेमेस्टर मई 2019 में ही पास कर लिया था और कोविड-19 की विशेष परिस्थितियों में लंबित पेपर को अगस्त 2021 में पास माना गया।

इस प्रकार वह भर्ती परीक्षा की कट-ऑफ तिथि 12 सितंबर 2021 से पहले ही आवश्यक योग्यता प्राप्त कर चुका था।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि आरक्षित वर्ग के अधिक मेरिट वाले उम्मीदवार को केवल इस कारण नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता कि विश्वविद्यालय ने समेकित परिणाम बाद में जारी किया।

भर्ती प्रक्रिया में व्यावहारिक और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, विशेषकर तब जब कोविड-19 जैसी असाधारण परिस्थितियां मौजूद रही हों।

अंतिम आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद एकलपीठ के फैसले को सही ठहराते हुए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की विशेष अपील खारिज कर दी।

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी पर मेरिट के आधार पर विचार कर उसे नियुक्ति के लिए पात्र माना जाए तथा नियमानुसार लाभ प्रदान किए जाएं।

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