जयपुर: भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) की लीगल कंसल्टेंट भर्ती में 3 साल की एलएलबी और 5 साल की इंटीग्रेटेड एलएलबी डिग्री को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में बीएसएनएल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
साथ ही कोर्ट ने 3 साल की एलएलबी करने वाले याचिकाकर्ता को चल रही भर्ती प्रक्रिया में प्रोविजनल तौर पर शामिल होने की राहत दी है।
मामला बीएसएनएल की ओर से 7 जुलाई 2026 को जारी भर्ती विज्ञापन से जुड़ा है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि विज्ञापन में 3 साल और 5 साल की एलएलबी, दोनों को जरूरी योग्यता माना गया है। लेकिन 5 साल की इंटीग्रेटेड एलएलबी, खासकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने वाले उम्मीदवारों को अलग फायदा दिया गया है।
याचिका में इसी शर्त को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जब दोनों तरह की एलएलबी डिग्री मान्य हैं, तो भर्ती में 5 साल की डिग्री वालों को अलग फायदा देना बराबरी के अधिकार के खिलाफ है।
जस्टिस समीर जैन ने अनमोल देवेंदा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए बीएसएनएल को नोटिस जारी किया है।
हाईकोर्ट ने नोटिस का जवाब तीन सप्ताह में मांगा है। हाईकोर्ट ने अभी इस दलील पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।
यानी राजस्थान हाईकोर्ट ने फिलहाल बीएसएनएल की भर्ती शर्त को सही या गलत घोषित नहीं किया है। कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी कर बीएसएनएल से जवाब मांगा है।
हालांकि, कोर्ट ने 3 साल वाले उम्मीदवार को फिलहाल भर्ती प्रक्रिया से बाहर नहीं होने दिया है और उसे प्रोविजनल तौर पर आगे की प्रक्रिया में शामिल होने की राहत दी है।
क्या है पूरा विवाद?
बीएसएनएल ने 7 जुलाई 2026 को लीगल कंसल्टेंट के पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया था।
इसमें उम्मीदवार के पास बार काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त संस्थान से 3 साल या 5 साल की एलएलबी डिग्री होना जरूरी बताया गया।
इसके साथ एलएलबी में कम से कम 60% अंक और डिग्री हासिल करने के बाद 3 साल का जरूरी अनुभव भी रखा गया।
यानी विज्ञापन की जरूरी योग्यता में 3 साल और 5 साल की एलएलबी, दोनों को जगह दी गई थी।
विवाद तब शुरू हुआ जब विज्ञापन में 5 साल की इंटीग्रेटेड एलएलबी को ‘डिजायरेबल’ योग्यता के तौर पर ज्यादा महत्व दिया गया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे 3 साल की एलएलबी करने वाले उम्मीदवारों की तुलना में 5 साल की डिग्री वाले उम्मीदवारों को फायदा मिल सकता है।
3 साल की LLB वाले उम्मीदवार ने उठाया सवाल
इस मामले में याचिका अनमोल देवेंदा ने दाखिल की है।
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद राजस्थान विश्वविद्यालय से 3 साल की एलएलबी की है।
याचिका में बताया गया है कि उन्होंने एलएलबी में 62.5% अंक हासिल किए हैं।
दिसंबर 2022 में राजस्थान बार काउंसिल में उनका वकील के तौर पर नामांकन भी हुआ।
याचिकाकर्ता का कहना है कि वह बीएसएनएल की भर्ती के लिए तय जरूरी योग्यता पूरी करते हैं। इसके बावजूद 5 साल की इंटीग्रेटेड एलएलबी को अलग फायदा देने वाली शर्त से 3 साल की एलएलबी करने वाले उम्मीदवारों को नुकसान हो सकता है।
उनकी दलील है कि 3 साल और 5 साल की एलएलबी, दोनों कानून की मान्य डिग्रियां हैं।
ऐसे में सिर्फ कोर्स की अवधि अलग होने की वजह से दोनों तरह के उम्मीदवारों के बीच फर्क नहीं किया जाना चाहिए।
NLU की डिग्री को अलग फायदा क्यों?
याचिका में खास सवाल 5 साल की इंटीग्रेटेड एलएलबी और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से मिली डिग्री को लेकर उठाया गया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि जब बीएसएनएल ने 3 साल की एलएलबी को भी भर्ती के लिए जरूरी योग्यता माना है, तो 5 साल की एलएलबी करने वालों को अलग फायदा देने की कोई साफ वजह होनी चाहिए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि 3 साल की एलएलबी करने वाले उम्मीदवारों के पास भी बार काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त कानून की डिग्री है।
ऐसे में सिर्फ डिग्री के तरीके के आधार पर उन्हें दूसरे उम्मीदवारों से कमतर नहीं माना जा सकता।
इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने इस शर्त को संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 के खिलाफ बताया है।
अनुच्छेद 14 बराबरी के अधिकार से जुड़ा है, जबकि अनुच्छेद 19 नागरिकों को कुछ मौलिक स्वतंत्रताएं देता है।
हाईकोर्ट ने BSNL से मांगा जवाब
मामले पर सुनवाई के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने बीएसएनएल को नोटिस जारी कर 3 सप्ताह में जवाब देने को कहा है।
कोर्ट ने फिलहाल याचिकाकर्ता को चल रही भर्ती प्रक्रिया में प्रोविजनल तौर पर शामिल होने की राहत भी दी है।
यानी मामले की सुनवाई चलने तक उम्मीदवार सिर्फ 3 साल की एलएलबी डिग्री होने की वजह से भर्ती प्रक्रिया से बाहर नहीं होगा।
हालांकि, यह अंतरिम राहत है। हाईकोर्ट ने अभी यह तय नहीं किया है कि 5 साल की इंटीग्रेटेड एलएलबी को भर्ती में अलग फायदा देने वाली शर्त सही है या नहीं।
इस पर बीएसएनएल का जवाब आने के बाद आगे सुनवाई होगी।
अब BSNL के जवाब पर नजर
अब अगली सुनवाई में बीएसएनएल इस भर्ती शर्त पर अपना पक्ष रखेगा। याचिकाकर्ता ने 5 साल की इंटीग्रेटेड एलएलबी को दिए गए अलग महत्व पर सवाल उठाया है।
दूसरी तरफ याचिकाकर्ता का कहना है कि जब भर्ती के लिए 3 साल और 5 साल की एलएलबी, दोनों को जरूरी योग्यता माना गया है, तो चयन के दौरान 5 साल की डिग्री वालों को अलग फायदा क्यों दिया गया।
यानी मामला सिर्फ एक उम्मीदवार की भर्ती तक सीमित नहीं है।
बड़ा सवाल यह है कि क्या एक ही भर्ती में मान्य एलएलबी डिग्री रखने वाले उम्मीदवारों के बीच कोर्स की अवधि या संस्थान के आधार पर अलग फायदा दिया जा सकता है?
अब बीएसएनएल का जवाब आने के बाद हाईकोर्ट इस मुद्दे पर आगे सुनवाई करेगा।
इसके बाद साफ होगा कि भर्ती विज्ञापन में रखी गई इस शर्त को कोर्ट किस नजर से देखता है।