जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने करीब 56 हजार उपभोक्ता शिकायतें अलग-अलग फोरम में लंबित होने के मामले में कंज्यूमर कमीशनों में खाली पदों को लेकर सख्त रुख अपनाया है।
हाईकोर्ट ने उपभोक्ता आयोगों में खाली पदों पर जरूरी कार्रवाई के लिए सरकार को 5 अक्टूबर तक का वक्त दियाा
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर 5 अक्टूबर तक खाली पदों पर जरूरी कार्रवाई नहीं हुई, तो फूड, सिविल सप्लाई एंड कंज्यूमर अफेयर्स के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को कोर्ट में पेश होकर जवाब देना होगा।
दरअसल राजस्थान के अलग-अलग कंज्यूमर फोरम में करीब 56 हजार शिकायतें पेंडिंग हैं। सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट को बताया कि खाली पद भरने और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर देने की कार्रवाई की जा रही है।
सरकार ने यह भी बताया कि जिन अध्यक्षों और सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें रिलीव कर दिया गया है, उन्हें नियमों के मुताबिक दोबारा काम पर लिया जाएगा। लेकिन यह तभी होगा, जब उनकी उम्र 65 साल से ज्यादा न हुई हो।
इसी सुनवाई में राजस्थान सिविल सर्विस अपीलेट ट्रिब्यूनल की जोधपुर सीट का मुद्दा भी उठा। सरकार ने कहा कि जरूरी नियुक्ति और कार्रवाई दो हफ्ते में पूरी कर ट्रिब्यूनल को चालू किया जाएगा।
सुनवाई के बाद जस्टिस उमा शंकर व्यास और जस्टिस समीर जैन की बेंच ने सुनवाई करते हुए सरकार को 5 अक्टूबर तक खाली पदों पर जरूरी कार्रवाई पूरी करने की डेडलाइन दी है।
56 हजार पेंडिंग शिकायतों को लेकर सरकार का जवाब
हाईकोर्ट ने कंज्यूमर कमीशनों में 56 हजार शिकायतें पेंडिंग होने को गंभीरता से लिया और इन पदों पर नियुक्ति को लेकर सरकार से डेडलाइन मांगी।
वहीं सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एएजी राजेश पंवार ने कोर्ट को बताया कि सरकार कंज्यूमर कमीशनों में खाली पदों को भरने के लिए कदम उठा रही है।
सरकार ने यह भी बताया कि राजस्थान के अलग-अलग फोरम में करीब 56 हजार कंज्यूमर शिकायतें पेंडिंग हैं। ऐसे में पदों को भरने के साथ जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने पर भी काम किया जा रहा है। ताकि इन शिकायतों का निपटारा समय पर किया
जोधपुर सिविल सर्विस ट्रिब्यूनल भी 15 दिन में होगा चालू
राज्य सरकार ने राजस्थान सिविल सर्विस अपीलेट ट्रिब्यूनल की जोधपुर सीट को लेकर भी कोर्ट को भरोसा दिया।
सरकार की ओर से कहा गया कि जरूरी नियुक्तियां और अनुपालन की कार्रवाई 15 दिन में पूरी कर दी जाएगी। इसके बाद ट्रिब्यूनल को संबंधित नियमों के मुताबिक चालू किया जाएगा।
रिलीव हो चुके सदस्यों को फिर काम पर लेने की बात
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि जिन पदों पर कार्यकाल पूरा होने के बाद जगह खाली हुई है, उन्हें नियमों के मुताबिक भरा जाएगा।
अगर जिन अध्यक्षों या सदस्यों को रिलीव कर दिया गया है, अगर उनकी उम्र 65 साल से कम है तो उन्हें नियमों के तहत दोबारा काम पर लिया जा सकता है।
यानी इस मामले में सिर्फ नई नियुक्तियों की बात नहीं है। कोर्ट के सामने यह भी मुद्दा था कि जिन सदस्यों को कार्यकाल पूरा होने के बाद रिलीव कर दिया गया है, उनकी जगह खाली हो गई है और इसका असर कंज्यूमर मामलों की सुनवाई पर पड़ रहा है।
सरकार ने कार्यकाल पूरा होने से खाली हुई इन सीटों पर नियमों के मुताबिक फिर से नियुक्ति किए जाने की बात कही।
कंज्यूमर कमीशन के सदस्यों का कार्यकाल कितना?
दरअसल, कंज्यूमर कमीशनों में कुछ पद सदस्यों का कार्यकाल खत्म होने की वजह से खाली हुए हैं। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि ऐसे खाली पदों को भरने की प्रक्रिया की जा रही है।
वहीं सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन रूल्स, 2020 के नियम 10 का जिक्र किया। इस नियम के मुताबिक स्टेट कमीशन और डिस्ट्रिक्ट कमीशन के प्रेसिडेंट या सदस्य का कार्यकाल 4 साल या 65 साल की उम्र तक होता है। दोनों में से जो पहले पूरा हो जाए, उसी समय कार्यकाल खत्म हो जाता है।
यानी किसी सदस्य का 4 साल का कार्यकाल पूरा हो गया है, तो सिर्फ इस वजह से उसका पद खाली नहीं रखा जा सकता कि वह पहले से काम कर रहा था। नियमों के मुताबिक अगर दोबारा नियुक्ति की पात्रता है, तो उसके लिए भी तय प्रक्रिया अपनानी होगी।
यानी कोर्ट के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं था कि कितने पद खाली हैं। सवाल यह भी था कि ये पद खाली क्यों हुए और उन्हें भरने के लिए सरकार क्या कर रही है। इसी वजह से कोर्ट ने सदस्यों के कार्यकाल से जुड़े नियम को भी ऑर्डर में दर्ज किया।
कोर्ट ने कहा- लोगों को बेबस नहीं छोड़ सकते
हाईकोर्ट ने कहा कि जब लोगों के अधिकारों के लिए कानून बना हुआ है, तो कंज्यूमर और दूसरे स्टेकहोल्डर्स को अपने जायज कानूनी अधिकारों के लिए बेबस नहीं छोड़ा जा सकता। हाईकोर्ट ने यह बात कंज्यूमर कमीशनों में खाली पदों और पेंडिंग शिकायतों को देखते हुए कही।
फिलहाल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया और खाली पदों को लेकर अगली सुनवाई तक जरूरी कार्रवाई करने को कहा।
5 अक्टूबर तक कार्रवाई नहीं हुई तो प्रिंसिपल सेक्रेटरी होंगे पेश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को तय की है।
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर 5 अक्टूबर तक खाली पदों के संबंध में अनुपालन नहीं हुआ तो खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होकर जवाब देना होगा।
साथ ही हाईकोर्ट ने साथ ही राज्य सरकार को राजस्थान सिविल सर्विस अपीलेट ट्रिब्यूनल की जोधपुर सीट पर 15 दिन के भीतर जरूरी नियुक्तियां और कार्रवाई पूरी कर उसे चालू करने के अपने आश्वासन पर अमल करने को कहा है।