बुजुर्ग दंपति से 2 करोड़ की ठगी के आरोपियों की जमानत खारिज, सख्त टिप्पणी- कहा राज्य में साइबर थाना कर्मियों को तकनीकी समझ तक नहीं,
जोधपुर, 28 नवंबर 2025
मुंबई पुलिस के अधिकारी बनकर राज्य के एक 84 वर्षिय बुजुर्ग को Digital Arrest कर 2 करोड़ रूपए की ठगी के एक मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया हैं.
जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए ना केवल आरोपियों को राहत देने से इंकार किया, बल्कि राजस्थान में साइबर अपराध जांच, बैंकिंग सुरक्षा और डिजिटल निगरानी तंत्र में बड़ी कमियों पर तीखी टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार को 34 महत्वपूर्ण सुधारात्मक निर्देश जारी किए है.
डिजिटल सुरक्षा का गंभीर संकट
हाईकोर्ट ने “डिजिटल अरेस्ट” के बढ़ते साइबर अपराध को बेहद गंभीर माना हैं.
जस्टिस रवी चिरानिया की एकलपीठ ने कहा कि यह मामला केवल एक साधारण ठगी का नहीं, बल्कि अत्यधिक संगठित, तकनीकी रूप से उन्नत और खतरनाक साइबर अपराध का उदाहरण है, जो समाज की डिजिटल सुरक्षा, बैंकिंग प्रणाली और नागरिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है.
सरकार की खामियों को लेकर कोर्ट ने कहा कि आज डिजिटल दुनिया जिस तीव्र गति से आगे बढ़ रही है, उसी गति से अपराधियों ने अपनी तकनीक, रणनीति और अपराध की जटिलता को विकसित कर लिया है.
लेकिन इसके विपरीत, राज्य की साइबर पुलिस, बैंकिंग सतर्कता और नागरिक जागरूकता उस तेजी से मेल नहीं खा पा रही है.
हाईकोर्ट ने इस अंतर को “डिजिटल सुरक्षा का गंभीर संकट” बताया.
बुजुर्ग आसान टारगेट
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि Digital Arrest और ठगी के इस प्रकार के अपराधों में सबसे अधिक खतरा वरिष्ठ नागरिकों, अकेले रहने वाले व्यक्तियों और तकनीकी रूप से कम जागरूक लोगों को होता है.
हाईकोर्ट ने कहा कि Digital Arrest के इस मामले में भी 84 वर्षीय बुजुर्ग दंपति को डर, धमकी और मनोवैज्ञानिक दबाव का शिकार बनाया गया.
कोर्ट ने माना कि अपराधियों ने पीड़ितों की उम्र और मानसिक स्थिति का लाभ उठाते हुए व्यवस्थित तरीके से लाखों रुपये ठगने की योजना बनाई.
जस्टिस रवि चिरानिया ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस प्रकार की ठगी किसी भी “स्वतंत्र और आधुनिक डिजिटल समाज” के लिए घातक है.
ब ठग सरकारी अधिकारी बनकर, नकली डिजिटल नोटिस दिखाकर, वीडियो कॉल पर ‘वर्चुअल हिरासत’ बनाकर किसी नागरिक को आतंकित करते हैं, तो यह न केवल वित्तीय अपराध होता है, बल्कि नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानसिक शांति पर हमला भी है.
साइबर थानों कर्मियों को तकनीकी समझ तक नहीं
राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपने फैसले मे राज्य की साइबर पुलिसिंग पर भी कठोर टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य के साइबर थानों में तकनीकी विशेषज्ञों की कमी है ओर अधिकांश कर्मियों को डिजिटल अपराध की तकनीकी समझ तक नहीं हैं.
कोर्ट ने कहा कि राज्य में अब भी साईबर मामलो की जांच प्रक्रिया पुराने स्वरूप पर आधारित है.
राज्य में बैंक और साइबर पुलिस के बीच भी समन्वय में गंभीर कमी है और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र (Quick Response Mechanism) लगभग ना के बराबर हैं.
हाईकोर्ट ने राज्य के साईबर विभाग में Quick Response Mechanism की कमी को चिंताजनक बताते हुए कहा कि इस तरह की कमजोरी के कारण अपराधियों को बढ़ावा मिलता है और पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है.
“DG साइबर का कार्यालय बना, पर प्रणाली ठप
हाईकोर्ट की एकलपीठ ने राज्य में साईबर ठगी और क्राइम मामलों में किए गए प्रयासों को लेकर भी तंज किया हैं.
हाईकोर्ट ने कह कि राजस्थान राज्य उन राज्यों में से एक है जिसने वर्ष 2024 में विशेष रूप से साइबर अपराधों से निपटने के लिए महानिदेशक, साइबर क्राइम (Director General, Cyber Crime) का कार्यालय स्थापित किया.
कोर्ट ने कहा कि यह कदम और प्रयास सराहनीय है, हालांकि जिस गति और जिस अवसंरचना के साथ डीजी, एससीआरबी एवं साइबर के कार्यालय द्वारा काम किया जा रहा है और आगे बढ़ने का इरादा है, वह समझ से परे है.
कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य में डीजी साइबर का कार्यालय बनाए जाने के बावजूद राजस्थान राज्य में साइबर अपराधों को नियंत्रित करने, उनकी जांच करने और अन्य आवश्यक कदम उठाने के लिए कोई समुचित प्रणाली प्रभावी रूप से स्थापित नहीं हो पाई है.
मेवात जैसे क्षेत्र बन रहे हॉटस्पॉट
हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य के कई क्षेत्र जैसे मेवात आदि — साइबर अपराधों के हॉटस्पॉट बन चुके हैं.
हाईकोर्ट ने कहा कि जिस तरह से कुछ क्षेत्र साईबर अपराध के गढ बनें है उन पर नियंत्रण करना जरूरी है.
सरकार ने कहा कि नियत्रंण कर रहे
मामले में सरकार कि ओर से पेश किए आंकड़ो पर भी कोर्ट ने टिप्पणी की हैं.
कोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों में बढ़ते साइबर अपराधों पर नियंत्रण हेतु ऑपरेशन एंटी वायरस, ऑपरेशन साइबर शील्ड आदि विशेष अभियान शुरू किए, जिनके माध्यम से कुछ हद तक इन अपराधों पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया है.
सरकार ने कहा कि राज्य इन क्षेत्रों में लगातार साइबर अपराधों को नियंत्रित करने के लिए कार्य कर रहा है.
जिस पर कोर्ट ने कहा कि इस आदेश के सुरक्षित रखे जाने के बाद, अदालत ने विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों के माध्यम से नोट किया कि राज्य में हाल ही में कुछ गंभीर साइबर अपराध पकड़े गए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि राज्य की ओर से कुछ प्रभावी कार्रवाई की जा रही है.
हाईकोर्ट ने सरकार के प्रयास को सराहनीय बताया और कहा कि केवल अपराधियों को पकड़ लेने से पर्याप्त मदद नहीं मिलती, क्योंकि अनेक तकनीकी पहलुओं को संभालना और बाद में ट्रायल में साबित करना होता है, जो तब कठिन हो जाता है जब जांच आईटी पेशेवरों/विशेषज्ञों की सहायता के बिना की जाती है.
ये हैं मामला
जोधपुर के 84 वर्षीय प्रेम मोहन गोविला और उनकी पत्नी को कॉल कर आरोपियों ने खुद को “मुंबई साइबर पुलिस अधिकारी” बताया। कॉल पर आरोप लगाया गया कि—उनके खातों से 538 करोड़ रुपये के साइबर अपराध से जुड़े लेनदेन हुए हैं,
ठगो ने बुजुर्ग दंपंति को राष्ट्रीय एजेंसियां जांच करने का डर दिखाया और कहा किउनके सभी बैंक खाते सुरक्षा कारणों से खाली कर “सरकारी सुरक्षित खातों” में ट्रांसफर करने होंगे.
डराए और धमकाए गए बुजुर्ग दंपति ने 9 दिनों में 2 करोड़ 2 लाख रुपये कई खातों में भेज दिए.
जमानत याचिकाए खारिज
हाईकोर्ट ने इस मामले के आरोपी गुजरात के दो आरोपी युवकों अदनान हैदर भाई और राहुल जगदीश भाई जाधव की जमानत याचिका खारिज करते हुए यह फैसला दिया हैं.
हाईकोर्ट ने दोनो आरोपियों की जमानत याचिकाए खारिज करते हुए कहा कि जमानत याचिका में तथ्य छुपाने की कोशिश कि गयी जो कि न्यायिक प्रक्रिया के साथ छल हैं.
जांच में सामने आया कि इस राशि में से 45 लाख रुपये सीधे जमानत अर्ज़ी देने वाले दोनों आरोपियों के खातों में पहुंचे थे.
कोर्ट ने कहा अगस्त और अक्टूबर 2025 की विस्तृत जांच रिपोर्टों ने दिखाया कि आरोपियों के खातों में ठगी की धनराशि पहुंची थी.
हाईकोर्ट ने याचिकाए खारिज करते हुए कहा कि “जमानत याचिका में तथ्य छुपाए गए हैं। ऐसे गंभीर आर्थिक-साइबर अपराध में राहत नहीं दी जा सकती।”
राजस्थान में साइबर सुरक्षा के लिए 34 बिंदूओ पर आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों को रोकने के लिए गृह विभाग, पुलिस महानिदेशक, DG साइबर और अन्य एजेंसियों को व्यापक और ऐतिहासिक आदेश दिए हैं।
1. राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) की स्थापना
ACS होम राज्य में R4C (Rajasthan Cyber Crime Control Centre) की स्थापना के लिए अधिसूचना जारी करेगा।
यह केंद्र I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) की तर्ज पर कार्य करेगा।
R4C राज्य और केंद्र की सभी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगा।
2. R4C को I4C जैसी सभी शक्तियाँ
R4C के पास I4C जैसी शक्तियाँ होंगी और आवश्यकतानुसार नए विंग भी बनाए जाएंगे।
3. साइबर क्राइम रिपोर्टिंग की नई सुविधा
1930 से अलग एक नया टोल-फ्री नंबर शुरू होगा,
01 फरवरी 2026 से यह नंबर ऑटो-FIR रजिस्ट्रेशन की सुविधा देगा।
FIR स्वतः सेंट्रल पोर्टल पर दर्ज होकर संबंधित साइबर थाने को भेजी जाएगी।
4. साइबर क्राइम जांच के लिए IT इंस्पेक्टर की नियुक्ति
IT Act 2000 की धारा 78 के अनुसार साइबर अपराध की जांच केवल इंस्पेक्टर स्तर और उससे ऊपर के अधिकारी कर सकते हैं।
इसलिए राज्य IT-क्वालिफाइड IT इंस्पेक्टर नियुक्त करेगा।
ये इंस्पेक्टर केवल DG साइबर के अधीन कार्य करेंगे।
इसके लिए विशेष भर्ती नियम बनाए जाएंगे।
5. IT इंस्पेक्टरों की ट्रांसफर नीति
इन इंस्पेक्टरों का स्थानांतरण किसी अन्य विभाग में नहीं होगा।
केवल प्रतिनियुक्ति (deputation) या ACS Home/DG Cyber की अनुमति से होगा।
6. डिजिटल फॉरेंसिक लैब
IT Act 2000 की धारा 79(a) के अनुसार मान्यता प्राप्त डिजिटल फॉरेंसिक लैब स्थापित की जाए।
यह लैब 01 फरवरी 2026 से कार्यरत होनी चाहिए।
सभी डिजिटल रिपोर्ट 30 दिनों में IO को उपलब्ध कराई जाए।
7. साइबर सुरक्षा के लिए त्रैमासिक संयुक्त बैठकें
ACS Home, DGP और DG साइबर हर तीन महीने में—
बैंकों, टेलीकॉम कंपनियों, इंटरनेट प्रदाताओं और सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ बैठक करेंगे।
बैंकों, फिनटेक कंपनियों और वित्तीय संस्थाओं के लिए निर्देश
8. ATM में AI आधारित सुरक्षा
ATM में AI आधारित सॉफ्टवेयर लगाकर unauthorized multi-card usage रोका जाए।
9. म्यूल अकाउंट पर सख्ती
सभी बैंक म्यूल अकाउंट की पहचान कर कार्रवाई करें।
10. RBI का Mule Hunter AI टूल अनिवार्य
सभी बैंक इस टूल का उपयोग करेंगे।
11. म्यूल अकाउंट की दोबारा KYC
इन खातों में शामिल बैंक कर्मचारियों की भूमिका की जांच; दोषियों पर कार्रवाई।
12. मृत/इनएक्टिव खातों की दोबारा KYC
इन खातों का घर जाकर सत्यापन अनिवार्य।
13. संदिग्ध खातों की इंटरनेट बैंकिंग बंद
कम डिजिटल कौशल वाले या कम लेनदेन वाले खातों की UPI लिमिट कम की जाए।
14. Bulk Transfer की निगरानी
अनजान व्यक्तियों द्वारा bulk transfer रोकने के आदेश।
15. संदिग्ध क्षेत्रों में बैंक स्टाफ की निगरानी
साइबर अपराध बढ़ने वाले क्षेत्रों में बैंक कर्मचारियों पर विशेष नजर।
डिजिटल डिवाइस, SIM कार्ड, कॉल सेंटर के लिए निर्देश
16. डिजिटल डिवाइस बिक्री का पंजीकरण
नए/पुराने उपकरण बेचने वाले हर दुकानदार को पंजीकरण कराना होगा।
SHO भौतिक जांच करेगा।
01 फरवरी 2026 से लागू।
17. सभी डिवाइस की ऑनलाइन एंट्री DG Cyber सिस्टम में
खरीद–फरोख्त की पूरी जानकारी सिस्टम में अपलोड करना अनिवार्य।
18. एक व्यक्ति को अधिकतम 3 सिम कार्ड
3 से अधिक सिम जारी करने से पहले कड़ी जांच अनिवार्य।
19. कॉल सेंटर और BPO का पंजीकरण
राजस्थान में हर Call Centre/BPO को DG Cyber के साथ पंजीकरण कराना होगा।
20. सोशल मीडिया अकाउंट पर KYC
राज्य में रहने वाले हर व्यक्ति की ID आधार/वैध कार्ड से लिंक हो।
फेक प्रोफाइल ब्लॉक किए जाएँ।
21. यूट्यूबर व डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स का पंजीकरण
फ्रीडम ऑफ स्पीच सुरक्षित रखते हुए नियमन किया जाएगा।
E-commerce, Courier, Gig Workers के लिए निर्देश
22. गिग वर्कर्स का पंजीकरण
DG साइबर के साथ रजिस्ट्रेशन अनिवार्य।
QR कोड व ID कार्ड—01 फरवरी 2026 से अनिवार्य।
23. Ola/Uber/Swiggy/Zomato चालकों का पंजीकरण
कमर्शियल नंबर प्लेट + DG Cyber पंजीकरण अनिवार्य।
24. Police Verification अनिवार्य
सभी डिलीवरी/कूरियर स्टाफ का बैकग्राउंड चेक।
25. महिला सुरक्षा
6 महीने में 15% महिला ड्राइवर, 2–3 वर्षों में 25% तक वृद्धि। ऐप में “Female Driver Preference” विकल्प अनिवार्य।
सरकारी विभागों के लिए डिजिटल ऑडिट
26. मासिक डिजिटल ऑडिट
सभी विभाग अपने डिजिटल लेनदेन का मासिक ऑडिट करें। धोखाधड़ी रोकथाम के उद्देश्य से।
Digital Arrest SOP
27. बुजुर्गों के खातों पर विशेष निगरानी
अचानक बड़े लेनदेन पर 48 घंटे में घर जाकर जांच। FD उपयोग पर विशेष सतर्कता।
Prosecution Wing के लिए निर्देश
28. प्रत्येक जिले में Special Public Prosecutor
साइबर मामलों के विशेषज्ञ SPP नियुक्त हों।
29. हाईकोर्ट में भी SPP
साइबर मामलों की पैरवी के लिए नियुक्ति।
30. Cyber Law Consultant की नियुक्ति
अभियोजन निदेशालय में डिजिटल कानून विशेषज्ञ नियुक्त हों।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा
31. 16 वर्ष से कम बच्चों के लिए SOP
स्मार्टफोन, ऑनलाइन गेमिंग के लिए 4 माह में दिशानिर्देश जारी हों।
डेटा प्रोटेक्शन कानूनों का पालन
32. DPDP Act 2023 और Rules 2025 का सख्त अनुपालन
साइबर अवेयरनेस
33. Cyber Security Awareness Cell
RSLSA जागरूकता अभियान चलाए।
जिला–तालुका स्तर पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराए।
34. स्कूल–कॉलेज–विभागों में जागरूकता अभियान
बड़े स्तर पर साइबर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँ।