टॉप स्टोरी

‘तलाक के बाद पिता की सहमति नहीं होने पर भी नहीं रोक सकते बच्चे का पासपोर्ट’, हाईकोर्ट का पासपोर्ट अथॉरिटी को तुरंत पासपोर्ट जारी करने का आदेश; कहा- बच्चे का भविष्य किसी एक अभिभावक की इच्छा पर निर्भर नहीं

चर्चित खबरें

चुनाव से ठीक पहले लॉरेंस बिश्नोई के भाई आरजू बिश्नोई से धमकी दिलवाने के आरोप में FIR, राजस्थान हाईकोर्ट ने संजय मूंदड़ा की गिरफ्तारी पर लगाई रोक

Ancestral Property Dispute: Rajasthan HC Refuses to Interfere With Police Probe Over Alleged Forged Signatures

रविवार को शाम 4 बजे दायर हुई याचिका, शाम 5 बजे शुरू हुई सुनवाई; 5 अक्टूबर तक गिरफ्तारी पर रोक, सोमवार को गंगानगर सभापति चुनाव में भाग लेने की मिली अनुमति

जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनावों के बीच रविवार को उस समय कानूनी हलचल तेज हो गई, जब श्रीगंगानगर नगर परिषद के सभापति पद के उम्मीदवार संजय मूंदड़ा ने गिरफ्तारी की आशंका को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

मूंदड़ा के खिलाफ लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के एक कथित गुर्गे के जरिए धमकी दिलवाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।

मामले की तात्कालिकता को देखते हुए रविवार शाम हाईकोर्ट में तत्काल सुनवाई हुई।

शाम करीब 5 बजे हुई सुनवाई में जस्टिस सुनील बेनीवाल की एकलपीठ ने संजय मूंदड़ा की गिरफ्तारी पर 5 अक्टूबर तक रोक लगा दी। इसके साथ ही उन्हें सोमवार को होने वाले सभापति पद के चुनाव में भाग लेने की अनुमति भी दी गई।

शाम 4 बजे दायर हुई याचिका, एक घंटे बाद कोर्ट में सुनवाई

संजय मूंदड़ा की ओर से रविवार शाम करीब 4 बजे अधिवक्ता राजेश परिहार के जरिए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। मामले की गंभीरता और चुनाव की समयबद्धता को देखते हुए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया।

राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल के निर्देश पर मामले की सुनवाई के लिए जस्टिस सुनील बेनीवाल की एकलपीठ गठित की गई।

करीब शाम 5 बजे सुनवाई शुरू हुई और लगभग एक घंटे तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत प्रदान की।

5 अक्टूबर तक गिरफ्तारी पर रोक

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने संजय मूंदड़ा की गिरफ्तारी पर 5 अक्टूबर तक रोक लगा दी।

कोर्ट के इस आदेश से सोमवार को होने वाले गंगानगर नगर परिषद सभापति पद के चुनाव से ठीक पहले मूंदड़ा को बड़ी राहत मिली है।

मामले में राजस्थान सरकार की ओर से दो अतिरिक्त महाधिवक्ता अदालत के समक्ष उपस्थित हुए और याचिका का विरोध किया।

FIR की कॉपी नहीं देने का आरोप, सुनवाई से पहले ऑनलाइन मिली

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेश परिहार ने अदालत के समक्ष दलील दी कि एफआईआर दर्ज होने के करीब 24 घंटे बाद तक भी याचिकाकर्ता को एफआईआर की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई।

अधिवक्ता के अनुसार, हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू होने से ठीक पहले एफआईआर की प्रति ऑनलाइन उपलब्ध हो सकी।

इसके बाद याचिका में एफआईआर में लगाई गई धाराओं और गिरफ्तारी की आशंका को लेकर अदालत के समक्ष पक्ष रखा गया।

चुनाव से रोकने के लिए गंभीर धाराएं लगाने का आरोप

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत में आरोप लगाया कि संजय मूंदड़ा को सभापति पद के चुनाव में भाग लेने से रोकने के उद्देश्य से उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।

अधिवक्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि एफआईआर में संगठित अपराध से संबंधित गंभीर प्रावधान लगाए गए हैं और इसके चलते गिरफ्तारी की आशंका पैदा हो गई थी।

याचिकाकर्ता का कहना था कि गिरफ्तारी का डर उन्हें चुनाव प्रक्रिया से दूर करने की स्थिति पैदा कर सकता था।

वही राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिकत महाधिवक्ताओं ने याचिका का विरोध किया.

सभापति चुनाव से ठीक पहले हाईकोर्ट की शरण

श्रीगंगानगर नगर परिषद के सभापति पद के चुनाव से ठीक पहले एफआईआर दर्ज होने और गिरफ्तारी की आशंका के बीच संजय मूंदड़ा ने रविवार को हाईकोर्ट का रुख किया।

चुनाव सोमवार को होना प्रस्तावित है, ऐसे में याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की गई।

हाईकोर्ट की ओर से दी गई अंतरिम राहत के बाद फिलहाल 5 अक्टूबर तक गिरफ्तारी पर रोक लागू रहेगी और मूंदड़ा को सोमवार के सभापति पद के चुनाव में भाग लेने की अनुमति मिल गई है।

रविवार को आधा दर्जन से अधिक प्रत्याशी पहुंचे हाईकोर्ट

नगर निकाय के सभापति और चैयरमेन चुनावों के बीच रविवार को राजस्थान हाईकोर्ट में कई प्रत्याशियों से जुड़े मामले तत्काल सुनवाई के लिए पहुंचे।

आधा दर्जन से अधिक प्रत्याशियों ने एफआईआर और संभावित गिरफ्तारी को लेकर राहत की मांग की।

सोमवार को विभिन्न नगर निकायों में चेयरमैन और सभापति पद के चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले दर्ज हुई एफआईआर और गिरफ्तारी की आशंका को लेकर प्रत्याशियों का हाईकोर्ट पहुंचना चुनावी माहौल में कानूनी हलचल का बड़ा विषय बन गया है।

सबसे अधिक लोकप्रिय

Father’s Consent Not Mandatory for Child’s Passport After Divorce, Rajasthan High Court Orders Immediate Issuance

‘तलाक के बाद पिता की सहमति नहीं होने पर भी नहीं रोक सकते बच्चे का पासपोर्ट’, हाईकोर्ट का पासपोर्ट अथॉरिटी को तुरंत पासपोर्ट जारी करने का आदेश; कहा- बच्चे का भविष्य किसी एक अभिभावक की इच्छा पर निर्भर नहीं